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दो महीने बाद फिर से मंडी में सब्जियां बेच सकेंगे मासाखोर
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सब्जी मंडी में शेड के नीचे सब्जी बेचते मासाखोर।
- फोटो : Jind
जींद। पिछले दो महीने से संघर्ष कर रहे मासाखोरों को आखिरकार सब्जी मंडी में सब्जी बेचने की अनुमति मिल गई है। अब एक दिन में आधे मासाखोर ही सब्जी बेच सकेंगे। बाकी आधे मासाखोर दूसरे दिन सब्जी की दुकान लगाएंगे।
शुक्रवार देर शाम आढ़ती एसोसिएशन, प्रशासन और मासाखोरों के बीच हुई बैठक में इस फार्मूले पर सहमति बन गई। इसके बाद कुल 228 मासाखोरों की पहचान की गई। इसमें शनिवार से 114 मसाखोरों ने सब्जी मंडी में कामकाज शुरू कर दिया। हालांकि अभी उन्हें एक शेड के नीचे ही कामकाज करने की अनुमति मिली है। एक शेड के नीचे 7 गुना 7 फुट के 117 ब्लॉक बनाए गए हैं। इस परिधि में बैठकर मासाखोर सब्जी बेच सकेंगे। मासाखोर यूनियन के सत्यवान व राजपाल ने कहा कि प्रशासन और आढ़ती एसोसिएशन के प्रयासों से उन्हें दोबारा काम करने की अनुमति मिली है। मासाखोरों की संख्या ज्यादा है, इसलिए एक शेड के नीच काम करना मुश्किल होगा। भीड़भाड़ भी होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि उन्हें दूसरा शेड भी उपलब्ध करवाया जाएगा।
लॉकडाउन में हटवा दी थी दुकान
लॉकडाउन के दौरान सब्जी मंडी में भीड़ नहीं हो इसके चलते प्रशासन ने मासाखोरों को मंडी से हटा दिया था। तब से ही मासाखोर दोबारा काम की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। दो महीने तक लड़ी लड़ाई के बाद आखिरकार उन्हें सब्जी मंडी में काम करने की अनुमति मिल ही गई।
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शर्तों के साथ दी गई है अनुमति
मासाखोरों को प्रशासन के कहने पर अस्थायी राहत दी गई है। इसके लिए शर्तें तय हुई हैं कि शारीरिक दूरी का पालन होगा। समस्या का स्थायी हल निकालने के लिए विभाग को पत्र लिखा हुआ है। उच्चाधिकारियों से निर्देश मिलने के बाद नई व्यवस्था की जाएगी।
संजीव कुमार, सचिव मार्केट कमेटी।
भाईचारे से करेंगे काम
सभी आढ़तियों और प्रशासन से मिले सहयोग के कारण ही मासाखोरों को काम करने की अनुमति मिल पाई है। उनकी रोजी-रोटी का संकट सभी आढ़तियों के लिए भी चिंता का विषय था। उम्मीद है कि सभी भाईचारे के माहौल में मिलजुल कर कार्य करेंगे।
अवतार कुमरा, प्रधान सब्जी मंडी आढ़ति एसोसिएशन।
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शुक्रवार देर शाम आढ़ती एसोसिएशन, प्रशासन और मासाखोरों के बीच हुई बैठक में इस फार्मूले पर सहमति बन गई। इसके बाद कुल 228 मासाखोरों की पहचान की गई। इसमें शनिवार से 114 मसाखोरों ने सब्जी मंडी में कामकाज शुरू कर दिया। हालांकि अभी उन्हें एक शेड के नीचे ही कामकाज करने की अनुमति मिली है। एक शेड के नीचे 7 गुना 7 फुट के 117 ब्लॉक बनाए गए हैं। इस परिधि में बैठकर मासाखोर सब्जी बेच सकेंगे। मासाखोर यूनियन के सत्यवान व राजपाल ने कहा कि प्रशासन और आढ़ती एसोसिएशन के प्रयासों से उन्हें दोबारा काम करने की अनुमति मिली है। मासाखोरों की संख्या ज्यादा है, इसलिए एक शेड के नीच काम करना मुश्किल होगा। भीड़भाड़ भी होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि उन्हें दूसरा शेड भी उपलब्ध करवाया जाएगा।
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लॉकडाउन में हटवा दी थी दुकान
लॉकडाउन के दौरान सब्जी मंडी में भीड़ नहीं हो इसके चलते प्रशासन ने मासाखोरों को मंडी से हटा दिया था। तब से ही मासाखोर दोबारा काम की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। दो महीने तक लड़ी लड़ाई के बाद आखिरकार उन्हें सब्जी मंडी में काम करने की अनुमति मिल ही गई।
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शर्तों के साथ दी गई है अनुमति
मासाखोरों को प्रशासन के कहने पर अस्थायी राहत दी गई है। इसके लिए शर्तें तय हुई हैं कि शारीरिक दूरी का पालन होगा। समस्या का स्थायी हल निकालने के लिए विभाग को पत्र लिखा हुआ है। उच्चाधिकारियों से निर्देश मिलने के बाद नई व्यवस्था की जाएगी।
संजीव कुमार, सचिव मार्केट कमेटी।
भाईचारे से करेंगे काम
सभी आढ़तियों और प्रशासन से मिले सहयोग के कारण ही मासाखोरों को काम करने की अनुमति मिल पाई है। उनकी रोजी-रोटी का संकट सभी आढ़तियों के लिए भी चिंता का विषय था। उम्मीद है कि सभी भाईचारे के माहौल में मिलजुल कर कार्य करेंगे।
अवतार कुमरा, प्रधान सब्जी मंडी आढ़ति एसोसिएशन।