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Jind News: सावन माह का पहला सोमवार आज, मंदिरों में उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़
Mon, 14 Jul 2025 12:57 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 14 Jul 2025 12:57 AM IST
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13जेएनडी03 : जयंती देवी मंदिर में भगवान शिव की पूजा करते हुए श्रद्धालु। पुजारी।
- फोटो : mathura
जींद। सावन माह 2025 का पहला सोमवार 14 जुलाई को है और इस दिन जींद के पौराणिक जयंती देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ेगी। सावन माह जो भगवान शिव को समर्पित है के पहले दिन (11 जुलाई) से ही मंदिर में भक्तों का तांता लगा हुआ है। सुबह होते ही श्रद्धालु मंदिर पहुंचना शुरू हो जाते हैं और भगवान शिव का जलाभिषक करते हैं।
मंदिर में सुबह ही हर-हर महादेव के जयघोष से मंदिर परिसर गूंज उठता है। सोमवार को मंदिर में भगवान शिव के रुद्राभिषेक के लिए श्रद्धालुओं ने दूध, दही, शहद, गंगाजल और घी से शिवलिंग का अभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी।
सोमवार को भगवान शिव के जलाभिषेक को लेकर ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:11 से 04:52 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:59 से 12:55 बजे तक रहेगा। इसके साथ ही प्रदोष काल भी जलाभिषेक के लिए यह शुभ माना जाता है। जयंती देवी मंदिर में सावन माह के पहले सोमवार को विशेष तैयारियां की गई हैं।
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मंदिर परिसर में मौजूद शिवालय को फूलों और रंग बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। हर दिन की तरह सोमवार को सुबह 4 बजे से मंदिर के पट खुल जाएंगे। श्रद्धालु बेलपत्र, फूलमाला और गंगाजल के साथ भगवान शिव की पूजा अर्चना करेंगे। श्रद्धालुओं के लिए शिव पूजा के लिए विशेष सर्पनुमा पात्र बनाए गए हैं जिनमें जल या दूध डाल कर भगवान शिव का अभिषेक किया जाएगा।
ऐसे करें श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा
सोमवार को प्रात:काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शिवलिंग की पूजा के लिए मंदिर जाएं या घर पर शिवलिंग स्थापित करके श्रद्धा और नियम से पूजन करें। शिवलिंग का अभिषेक जल, दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से करें। इसके बाद बेलपत्र, सफेद पुष्प, अक्षत और भस्म अर्पित करें। फिर भगवान शिव को सफेद मिठाई का भोग लगाएं और तीन बार ताली बजाते हुए उनका नाम स्मरण करें।
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सावन में आने वाले प्रत्येक सोमवार का विशेष महत्व होता है। इस दिन व्रत रखकर शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्रियां अर्पित करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस मास में श्रद्धापूर्वक शिवलिंग पर केवल एक लोटा जल भी अर्पित किया जाए तो भगवान शिव प्रसन्न होकर अपने भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
-नवीन शास्त्री पुजारी जयंती देवी मंदिर।
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मंदिर में सुबह ही हर-हर महादेव के जयघोष से मंदिर परिसर गूंज उठता है। सोमवार को मंदिर में भगवान शिव के रुद्राभिषेक के लिए श्रद्धालुओं ने दूध, दही, शहद, गंगाजल और घी से शिवलिंग का अभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी।
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सोमवार को भगवान शिव के जलाभिषेक को लेकर ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:11 से 04:52 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:59 से 12:55 बजे तक रहेगा। इसके साथ ही प्रदोष काल भी जलाभिषेक के लिए यह शुभ माना जाता है। जयंती देवी मंदिर में सावन माह के पहले सोमवार को विशेष तैयारियां की गई हैं।
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मंदिर परिसर में मौजूद शिवालय को फूलों और रंग बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। हर दिन की तरह सोमवार को सुबह 4 बजे से मंदिर के पट खुल जाएंगे। श्रद्धालु बेलपत्र, फूलमाला और गंगाजल के साथ भगवान शिव की पूजा अर्चना करेंगे। श्रद्धालुओं के लिए शिव पूजा के लिए विशेष सर्पनुमा पात्र बनाए गए हैं जिनमें जल या दूध डाल कर भगवान शिव का अभिषेक किया जाएगा।
ऐसे करें श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा
सोमवार को प्रात:काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शिवलिंग की पूजा के लिए मंदिर जाएं या घर पर शिवलिंग स्थापित करके श्रद्धा और नियम से पूजन करें। शिवलिंग का अभिषेक जल, दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से करें। इसके बाद बेलपत्र, सफेद पुष्प, अक्षत और भस्म अर्पित करें। फिर भगवान शिव को सफेद मिठाई का भोग लगाएं और तीन बार ताली बजाते हुए उनका नाम स्मरण करें।
सावन में आने वाले प्रत्येक सोमवार का विशेष महत्व होता है। इस दिन व्रत रखकर शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्रियां अर्पित करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस मास में श्रद्धापूर्वक शिवलिंग पर केवल एक लोटा जल भी अर्पित किया जाए तो भगवान शिव प्रसन्न होकर अपने भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
-नवीन शास्त्री पुजारी जयंती देवी मंदिर।