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Jind News: कर्मचारियों की कामचाेरी करा रही इज्जत का कचरा
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सुशील टुर्ण
जींद। समाज कल्याण विभाग के कर्मचारियों की कामचोरी विभाग की इज्जत का कचरा करा रही है। इसका खामियाजा जिलेभर के बुजुर्ग भुगत रहे हैं। नियमानुसार इन बुजुर्गों की पेंशन बनाने के लिए विभाग के कर्मियों को गांव में जाकर पेंशन धारक की जांच कर फोटो खींचकर अपलोड करनी होती है। इसके विपरीत विभाग के कर्मचारी गांव में न जाकर बुजुर्गों को ही जिला मुख्यालय बुला रहे हैं। इससे बुजुर्गों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इस बार जिला समाज कल्याण विभाग के पास 5600 बुजुर्गाें की पेंशन बनाने के लिए प्रो एक्टिव के तहत सूची मिली है। पिछले तीन वर्ष में इतनी ज्यादा संख्या में पहली बार बुजुर्गों की सूची मिली। शुक्रवार को समाज कल्याण विभाग कार्यालय में दिनभर बुजुर्गों की भीड़ लगी रही। इन बुजुर्गों को पेंशन बनने की फोन पर विभागीय कर्मियों ने जानकारी देकर दस्तावेज साथ लाने व फोटो खिंचवाने की बात कही थी। सबसे अधिक सफीदों खंड के बुजुर्ग समाज कल्याण विभाग में आए हुए थे।
जींद से सफीदों की दूरी लगभग 40 किलोमीटर है। गांवों से आने वाले बुजुर्गों को इससे भी अधिक दूरी तय करनी पड़ती है। इन बुजुर्गों को जींद आने से पहले गांव से शहर में जाना पड़ता है। विभागीय कर्मियों की लापरवाही का खामियाजा बुजुर्ग भुगत रहे हैं। इससे पहले भी पेंशन के लिए धारकों को खंड के बीडीपीओ कार्यालय में बुलाया जाता रहा है, जबकि जिम्मेदार कर्मचारी की ड्यूटी होती है कि गांव में जाकर बुजुर्गों की पेंशन बनाई जाए। सरकार की योजना भी घर बैठे पेंशन देने की है।
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बाक्स
समाज कल्याण विभाग पर अब बढ़ा पेंशन का काम
समाज कल्याण विभाग की तरफ से बनने वाली पेंशन का काम पहले जोनल क्रीड मैनेजर के पास था। इसमें 113 गांव व जिले के शहरों के 41 वार्ड में जोनल क्रीड मैनेजर पेंशन बनाने का काम करता था। अब यह काम जोनल क्रीड मैनेजर से वापस लेकर समाज कल्याण विभाग को सौंप दिया गया है। इसके कारण विभाग के पास काम की अधिकता हुई है। प्रो एक्टिव के तहत समाज कल्याण विभाग ने अब तक लगभग 22 हजार पेंशन बनाई हैं।
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नरवाना में गलत तरीके से पेंशन बनाने का उछला था मामला
पिछले महीने समाज कल्याण विभाग से मिलने वाली पेंशन राशि फर्जी तरीके से बनवाने का मामला भी उछला था, हालांकि इस मामले में विभागीय कार्रवाई चली हुई है। इसके बावजूद भी विभाग के कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी को निभाने से बच रहे हैं।
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बदइंतजामी... सुबह 10 बजे से 3 बजे तक बैठे रहे बुजुर्ग
बुजुर्ग बीरमति व राजेंद्र ने बताया कि वह पेंशन बनवाने के लिए सुबह 10 बजे ही कार्यालय पहुंच गए थे, लेकिन कर्मचारी मौके पर नहीं मिलने के कारण वह पिछले कई घंटे से कार्यालय के बाहर ही बैठे हैं। शाम 3 बजे तक इंतजार करते रहे। कर्मचारी घर-घर जाकर पेंशन तो बनाने से रहे, लेकिन कार्यालय आने पर भी काम नहीं बन पा रहा है।
बाक्स
खंड स्तर पर जाकर पेंशन बनाई जाती है। जो लोग खंडस्तर पर कर्मचारी के बुलाने से नहीं पहुंचे थे, वह कार्यालय में आकर पेंशन बनवा रहे हैं। सभी कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि खंडस्तर पर पेंशन बनाने के लिए बुजुर्गों को बुलाया जाए।
-सरोज ढांडा, जिला समाज कल्याण अधिकारी, जींद।
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जींद। समाज कल्याण विभाग के कर्मचारियों की कामचोरी विभाग की इज्जत का कचरा करा रही है। इसका खामियाजा जिलेभर के बुजुर्ग भुगत रहे हैं। नियमानुसार इन बुजुर्गों की पेंशन बनाने के लिए विभाग के कर्मियों को गांव में जाकर पेंशन धारक की जांच कर फोटो खींचकर अपलोड करनी होती है। इसके विपरीत विभाग के कर्मचारी गांव में न जाकर बुजुर्गों को ही जिला मुख्यालय बुला रहे हैं। इससे बुजुर्गों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इस बार जिला समाज कल्याण विभाग के पास 5600 बुजुर्गाें की पेंशन बनाने के लिए प्रो एक्टिव के तहत सूची मिली है। पिछले तीन वर्ष में इतनी ज्यादा संख्या में पहली बार बुजुर्गों की सूची मिली। शुक्रवार को समाज कल्याण विभाग कार्यालय में दिनभर बुजुर्गों की भीड़ लगी रही। इन बुजुर्गों को पेंशन बनने की फोन पर विभागीय कर्मियों ने जानकारी देकर दस्तावेज साथ लाने व फोटो खिंचवाने की बात कही थी। सबसे अधिक सफीदों खंड के बुजुर्ग समाज कल्याण विभाग में आए हुए थे।
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जींद से सफीदों की दूरी लगभग 40 किलोमीटर है। गांवों से आने वाले बुजुर्गों को इससे भी अधिक दूरी तय करनी पड़ती है। इन बुजुर्गों को जींद आने से पहले गांव से शहर में जाना पड़ता है। विभागीय कर्मियों की लापरवाही का खामियाजा बुजुर्ग भुगत रहे हैं। इससे पहले भी पेंशन के लिए धारकों को खंड के बीडीपीओ कार्यालय में बुलाया जाता रहा है, जबकि जिम्मेदार कर्मचारी की ड्यूटी होती है कि गांव में जाकर बुजुर्गों की पेंशन बनाई जाए। सरकार की योजना भी घर बैठे पेंशन देने की है।
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समाज कल्याण विभाग पर अब बढ़ा पेंशन का काम
समाज कल्याण विभाग की तरफ से बनने वाली पेंशन का काम पहले जोनल क्रीड मैनेजर के पास था। इसमें 113 गांव व जिले के शहरों के 41 वार्ड में जोनल क्रीड मैनेजर पेंशन बनाने का काम करता था। अब यह काम जोनल क्रीड मैनेजर से वापस लेकर समाज कल्याण विभाग को सौंप दिया गया है। इसके कारण विभाग के पास काम की अधिकता हुई है। प्रो एक्टिव के तहत समाज कल्याण विभाग ने अब तक लगभग 22 हजार पेंशन बनाई हैं।
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नरवाना में गलत तरीके से पेंशन बनाने का उछला था मामला
पिछले महीने समाज कल्याण विभाग से मिलने वाली पेंशन राशि फर्जी तरीके से बनवाने का मामला भी उछला था, हालांकि इस मामले में विभागीय कार्रवाई चली हुई है। इसके बावजूद भी विभाग के कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी को निभाने से बच रहे हैं।
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बदइंतजामी... सुबह 10 बजे से 3 बजे तक बैठे रहे बुजुर्ग
बुजुर्ग बीरमति व राजेंद्र ने बताया कि वह पेंशन बनवाने के लिए सुबह 10 बजे ही कार्यालय पहुंच गए थे, लेकिन कर्मचारी मौके पर नहीं मिलने के कारण वह पिछले कई घंटे से कार्यालय के बाहर ही बैठे हैं। शाम 3 बजे तक इंतजार करते रहे। कर्मचारी घर-घर जाकर पेंशन तो बनाने से रहे, लेकिन कार्यालय आने पर भी काम नहीं बन पा रहा है।
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खंड स्तर पर जाकर पेंशन बनाई जाती है। जो लोग खंडस्तर पर कर्मचारी के बुलाने से नहीं पहुंचे थे, वह कार्यालय में आकर पेंशन बनवा रहे हैं। सभी कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि खंडस्तर पर पेंशन बनाने के लिए बुजुर्गों को बुलाया जाए।
-सरोज ढांडा, जिला समाज कल्याण अधिकारी, जींद।