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ड्रोन से करवाई मैपिंग में 50 फुट पीछे किया कंडेला गांव का लाल डोरा क्षेत्र, रजिस्ट्री हुई तो टूट जाएंगे पूरे गांव के मकान
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डीसी से मिलने पहुंचे छाज्जूराम कंडेला। संवाद
- फोटो : Jind
प्रदेश सरकार द्वारा गांवों को लाल डोरा मुक्त करने के लिए चलाई गई योजना का कंडेला गांव में विरोध हुआ है। इसको लेकर रविवार को गांव में पंचायत भी हुई। जिसके बाद सोमवार को गांव के कुछ लोग भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश प्रवक्ता छाज्जूराम कंडेला की अध्यक्षता में डीसी नरेश कुमार से मिलने पहुंचे। डीसी ने मामले उचित कार्रवाई का आश्वासन देते हुए उन्हें तहसीलदार के पास भेज दिया।
छाज्जूराम कंडेला ने बताया कि कुछ दिन पहले प्रशासन द्वारा गांव की मैपिंग ड्रोन द्वारा करवाई गई थी। इसमें वर्तमान गांव के लाल डोरा क्षेत्र करीब 50 फुट पीछे दिखाया गया है। कंडेला के अनुसार इस मैपिंग पर यदि रजिस्ट्रियां होती हैं तो पूर गांव के बने हुए मकान टूट जाएंगे। यह किसी के भी पक्ष में नहीं होगा। कंडेला के अनुसार करीब 60 साल पहले गांव में जमीन पैमाइश हुई थी। उस समय भी गांव में पुरानी आबादी के क्षेत्र को छोड़ दिया गया था। यहां न तो पैमाइश करना संभव है और न ही मालिकाना हक दोबारा स्थापित करवाना। जो लोग जहां काबिज हैं, उसके मालिक वही माने गए हैं। वहीं प्रशासन द्वारा करवाई गई मैपिंग में सभी के मकानों को गलत ठहरा दिया गया है।
गांव में नहीं करने दी जाएगी कार्रवाई
कंडेला ने कहा कि ड्रोन से हुई मैपिंग में यह साफ हो चुका है कि निशानदेही सही नहीं हुई है। ऐसे में यदि प्रशासन यहां परंपरागत तरीके से निशानदेही करवाएगा तो इसका विरोध किया जाएगा। साथ ही पूरे गांव ने फैसला लिया है कि कोई भी ग्रामीण रिजिस्ट्री नहीं करवाएगा।
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खटकड़ टोल से भी किया आह्वान
कंडेला ने कहा कि यह योजना सिर्फ लोगों को बरगलाने के लिए है। जो लोग अपनी जमीन पर काबिज हैं, उनको रजिस्ट्री की जरूरत नहीं है। सरकार नई योजना के नाम पर लोगों की संपत्ति की रजिस्ट्री करवा कर मोटी फीस वसूलना चाहती है। ऐसे में खटकड़ टोल पर भी किसानों से आह्वान किया गया है कि वे इस योजना के तहत प्रशासन को गांवों में कार्रवाई नहीं करने दें।
करवाया जाएगा समाधान
मैं आज कार्यालय के काम से बाहर था। ऐसे में ग्रामीणों के आने की सूचना नहीं है। इसका पता किया जाएगा, यदि पैमाइश में कोई दिक्कत है तो दोबारा करवादी जाएगी। लोगों को कोई दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।
अजय सैनी, तहसीलदार, जींद।
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छाज्जूराम कंडेला ने बताया कि कुछ दिन पहले प्रशासन द्वारा गांव की मैपिंग ड्रोन द्वारा करवाई गई थी। इसमें वर्तमान गांव के लाल डोरा क्षेत्र करीब 50 फुट पीछे दिखाया गया है। कंडेला के अनुसार इस मैपिंग पर यदि रजिस्ट्रियां होती हैं तो पूर गांव के बने हुए मकान टूट जाएंगे। यह किसी के भी पक्ष में नहीं होगा। कंडेला के अनुसार करीब 60 साल पहले गांव में जमीन पैमाइश हुई थी। उस समय भी गांव में पुरानी आबादी के क्षेत्र को छोड़ दिया गया था। यहां न तो पैमाइश करना संभव है और न ही मालिकाना हक दोबारा स्थापित करवाना। जो लोग जहां काबिज हैं, उसके मालिक वही माने गए हैं। वहीं प्रशासन द्वारा करवाई गई मैपिंग में सभी के मकानों को गलत ठहरा दिया गया है।
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गांव में नहीं करने दी जाएगी कार्रवाई
कंडेला ने कहा कि ड्रोन से हुई मैपिंग में यह साफ हो चुका है कि निशानदेही सही नहीं हुई है। ऐसे में यदि प्रशासन यहां परंपरागत तरीके से निशानदेही करवाएगा तो इसका विरोध किया जाएगा। साथ ही पूरे गांव ने फैसला लिया है कि कोई भी ग्रामीण रिजिस्ट्री नहीं करवाएगा।
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खटकड़ टोल से भी किया आह्वान
कंडेला ने कहा कि यह योजना सिर्फ लोगों को बरगलाने के लिए है। जो लोग अपनी जमीन पर काबिज हैं, उनको रजिस्ट्री की जरूरत नहीं है। सरकार नई योजना के नाम पर लोगों की संपत्ति की रजिस्ट्री करवा कर मोटी फीस वसूलना चाहती है। ऐसे में खटकड़ टोल पर भी किसानों से आह्वान किया गया है कि वे इस योजना के तहत प्रशासन को गांवों में कार्रवाई नहीं करने दें।
करवाया जाएगा समाधान
मैं आज कार्यालय के काम से बाहर था। ऐसे में ग्रामीणों के आने की सूचना नहीं है। इसका पता किया जाएगा, यदि पैमाइश में कोई दिक्कत है तो दोबारा करवादी जाएगी। लोगों को कोई दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।
अजय सैनी, तहसीलदार, जींद।