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प्रकृति के नियमों के खिलाफ है वर्तमान जीवन शैली : सरस्वती
Wed, 05 Mar 2025 12:32 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Wed, 05 Mar 2025 12:32 AM IST
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04जेएनडी14-सीआरएसयू में हुए कार्यक्रम में मुख्य वक्ताओं को सम्मानित करते हुए। स्रोत विवि
- फोटो : udhampur
जींद। चौधरी रणबीर सिंह यूनिवर्सिटी में योग विज्ञान विभाग की तरफ से प्राकृतिक चिकित्सा को लेकर आयोजित साप्ताहिक कार्यशाला के दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. स्वामी शंकरानंद सरस्वती, साध्वी मोक्षिता, सूर्यदेव आर्य, डॉ. गौरव, पूर्व छात्र राहुल त्रिपाठी (थैरेपिस्ट) और ईशा ने शिरकत की। डॉ. स्वामी शंकरानंद सरस्वती ने प्राकृतिक चिकित्सा के दस स्वर्णिम सिद्धांतों के बारे में विस्तार पूर्वक बताया।
डॉ. स्वामी ने कहा कि आज का जीवन शेयर प्रकृति के नियमों के विरुद्ध है। सभी रोगों का मूल कारण विजातीय द्रव्य का शरीर में एकत्रित होना है। उन्होंने वर्तमान जीवन शैली को प्रकृति के नियमों के विरुद्ध बताया। मोबाइल की रेडिएशन शरीर के अनुकूल नहीं है जो की बीमारी का कारण बनती हैं। प्राकृतिक चिकित्सा व योग एक दूसरे के पूरक हैं। योग केवल आसान नहीं बल्कि एक अनुशासन है। उन्होंने महर्षि पतंजलि की ओर से रचित अष्टांग योग पर विस्तृत व्याख्यान दिया। डॉ. गौरव ने लाइव प्रैक्टिकल के माध्यम से बच्चों को न्यूरो पैथी सिखाने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि पहले मरीज की हिस्ट्री व बीपी चेक करना चाहिए एवं कौन से पॉइंट में पेन है यह देखना चाहिए। न्यूरोपैथी आधुनिक साइंस पर आधारित है। इसलिए उन्होंने बच्चों को सीखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि उनकी एक ब्रांच जींद में भी है जहां से विद्यार्थी इसे सीख सकते हैं। इस मौके पर डॉ. कुलदीप नारा, डॉ. वीरेंद्र कुमारर, डॉ. सुमन पूनिया, डॉ. ज्योति, डॉ. मंजू सुहाग मौजूद रहे।
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डॉ. स्वामी ने कहा कि आज का जीवन शेयर प्रकृति के नियमों के विरुद्ध है। सभी रोगों का मूल कारण विजातीय द्रव्य का शरीर में एकत्रित होना है। उन्होंने वर्तमान जीवन शैली को प्रकृति के नियमों के विरुद्ध बताया। मोबाइल की रेडिएशन शरीर के अनुकूल नहीं है जो की बीमारी का कारण बनती हैं। प्राकृतिक चिकित्सा व योग एक दूसरे के पूरक हैं। योग केवल आसान नहीं बल्कि एक अनुशासन है। उन्होंने महर्षि पतंजलि की ओर से रचित अष्टांग योग पर विस्तृत व्याख्यान दिया। डॉ. गौरव ने लाइव प्रैक्टिकल के माध्यम से बच्चों को न्यूरो पैथी सिखाने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि पहले मरीज की हिस्ट्री व बीपी चेक करना चाहिए एवं कौन से पॉइंट में पेन है यह देखना चाहिए। न्यूरोपैथी आधुनिक साइंस पर आधारित है। इसलिए उन्होंने बच्चों को सीखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि उनकी एक ब्रांच जींद में भी है जहां से विद्यार्थी इसे सीख सकते हैं। इस मौके पर डॉ. कुलदीप नारा, डॉ. वीरेंद्र कुमारर, डॉ. सुमन पूनिया, डॉ. ज्योति, डॉ. मंजू सुहाग मौजूद रहे।
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