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Jind News: कान्हा के रंग में रंगा शहर, मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब...राधा-कृष्ण की झांकियों ने मोहा मन
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04जेएनडी25: शिवकालोनी स्थित मंदिर में कान्हा को झूला झुलाते हुए श्रद्वालु। संवाद
जींद। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पर्व पर शुक्रवार को पूरा जींद कान्हा की भक्ति में डूबा नजर आया। सुबह से ही शहर के मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी। भक्तों ने मंदिरों में पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप के दर्शन किए और उन्हें झूला झुलाकर पूजा-अर्चना की।
श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म तक व्रत रखा। मध्यरात्रि में कान्हा के जन्म के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर व्रत खोला गया। रानी तालाब स्थित भूतेश्वर मंदिर, सोमनाथ मनसा देवी मंदिर, जयंती देवी मंदिर, शिव मंदिर, माता वैष्णवी धाम, रघुनाथ मंदिर, रामा-कृष्ण मंदिर और सोहम आश्रम समेत शहर के विभिन्न मंदिरों में विशेष सजावट की गई।
मंदिरों को रंग-बिरंगी रोशनी, फूलों और सजावटी सामग्री से सजाया गया था। कई स्थानों पर भगवान श्रीकृष्ण और राधा की झांकियों के साथ अन्य देवी-देवताओं के स्वरूप भी प्रस्तुत किए गए। डीजे और भजन-कीर्तन के बीच कलाकारों ने कृष्ण-राधा के रूप में प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को खूब आकर्षित किया। नन्हे बच्चों का कान्हा और राधा के रूप में पहुंचना भी पर्व का खास आकर्षण रहा।
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भीड़ नियंत्रित करने के लिए लगाए वालंटियर
जयंती देवी मंदिर के पुजारी पंडित नवीन कुमार शास्त्री ने बताया कि श्रद्धालुओं को झूला झुलाने के बाद लगातार आगे बढ़ाया गया, ताकि मंदिर परिसर में अधिक भीड़ एकत्रित न हो। इसके लिए वालंटियरों की ड्यूटी लगाई गई थी। मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए करीब दो क्विंटल साबूदाने की खीर प्रसाद के रूप में तैयार कर वितरित की गई।
व्रत के चलते फलों और मिठाइयों की बढ़ी मांग
जन्माष्टमी के व्रत के चलते बाजारों में फलों और मिठाइयों की मांग भी बढ़ी रही। व्रत खोलने के लिए श्रद्धालुओं ने केला, अमरूद सहित अन्य फलों की खरीदारी की। मांग बढ़ने के कारण फलों के दाम सामान्य दिनों से अधिक रहे। केले करीब 80 रुपये प्रति दर्जन बिके। मिठाई की दुकानों पर भी दिनभर ग्राहकों की भीड़ लगी रही।
फोटो कैप्शन
04जेएनडी25: शिवकालोनी स्थित मंदिर में कान्हा को झूला झुलाते हुए श्रद्वालु। संवाद
04जेएनडी26: जयंती देवी मंदिर में पूजा अर्चना करने आए श्रद्वालु। संवाद
04जेएनडी27: कान्हा की वेशभूषा में छोटा बच्चा। संवाद
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श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म तक व्रत रखा। मध्यरात्रि में कान्हा के जन्म के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर व्रत खोला गया। रानी तालाब स्थित भूतेश्वर मंदिर, सोमनाथ मनसा देवी मंदिर, जयंती देवी मंदिर, शिव मंदिर, माता वैष्णवी धाम, रघुनाथ मंदिर, रामा-कृष्ण मंदिर और सोहम आश्रम समेत शहर के विभिन्न मंदिरों में विशेष सजावट की गई।
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मंदिरों को रंग-बिरंगी रोशनी, फूलों और सजावटी सामग्री से सजाया गया था। कई स्थानों पर भगवान श्रीकृष्ण और राधा की झांकियों के साथ अन्य देवी-देवताओं के स्वरूप भी प्रस्तुत किए गए। डीजे और भजन-कीर्तन के बीच कलाकारों ने कृष्ण-राधा के रूप में प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को खूब आकर्षित किया। नन्हे बच्चों का कान्हा और राधा के रूप में पहुंचना भी पर्व का खास आकर्षण रहा।
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भीड़ नियंत्रित करने के लिए लगाए वालंटियर
जयंती देवी मंदिर के पुजारी पंडित नवीन कुमार शास्त्री ने बताया कि श्रद्धालुओं को झूला झुलाने के बाद लगातार आगे बढ़ाया गया, ताकि मंदिर परिसर में अधिक भीड़ एकत्रित न हो। इसके लिए वालंटियरों की ड्यूटी लगाई गई थी। मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए करीब दो क्विंटल साबूदाने की खीर प्रसाद के रूप में तैयार कर वितरित की गई।
व्रत के चलते फलों और मिठाइयों की बढ़ी मांग
जन्माष्टमी के व्रत के चलते बाजारों में फलों और मिठाइयों की मांग भी बढ़ी रही। व्रत खोलने के लिए श्रद्धालुओं ने केला, अमरूद सहित अन्य फलों की खरीदारी की। मांग बढ़ने के कारण फलों के दाम सामान्य दिनों से अधिक रहे। केले करीब 80 रुपये प्रति दर्जन बिके। मिठाई की दुकानों पर भी दिनभर ग्राहकों की भीड़ लगी रही।
फोटो कैप्शन
04जेएनडी25: शिवकालोनी स्थित मंदिर में कान्हा को झूला झुलाते हुए श्रद्वालु। संवाद
04जेएनडी26: जयंती देवी मंदिर में पूजा अर्चना करने आए श्रद्वालु। संवाद
04जेएनडी27: कान्हा की वेशभूषा में छोटा बच्चा। संवाद

04जेएनडी25: शिवकालोनी स्थित मंदिर में कान्हा को झूला झुलाते हुए श्रद्वालु। संवाद

04जेएनडी25: शिवकालोनी स्थित मंदिर में कान्हा को झूला झुलाते हुए श्रद्वालु। संवाद