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Jind News: हर वार्ड में खामियां देख मिशन निदेशक बोले...नागरिक अस्पताल है या बूचड़खाना
Sat, 26 Jul 2025 01:03 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 26 Jul 2025 01:03 AM IST
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फोटो कैप्शन25जेएनडी16: गायनी वार्ड में नर्स से जानकारी लेते हुए नेशनल हेल्थ मिशन के स्वास्थ
- फोटो : mathura
जींद। नेशनल हेल्थ मिशन के निदेशक (स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. वीरेंद्र यादव को नागरिक अस्पताल के निरीक्षण में शुक्रवार को हर वार्ड में इतनी खामियां मिलीं कि वह पूछ बैठे, यह अस्पताल है या बूचड़खाना। यहां की इमरजेंसी में एसी बंद मिला तो लैब में सामान नहीं। डिस्पेंसरी में भी 280 तरह की जरूरी दवाएं कम पाई गईं।
मिशन निदेशक का यह कोई औचक निरीक्षण नहीं था। वह वीरवार को ही यहां पहुंच गए थे। तय था कि शुक्रवार को नागरिक अस्पताल देखेंगे। फिर भी कोई सुधार नहीं किया। वह इमरजेंसी की ओर बढ़े तो गेट पर ही रस्सी बंधी मिली। इससे एंबुलेंस और निजी गाड़ियों का आना संभव नहीं था। उन्होंने इसे खुलवाया।
इमरजेंसी पहुंचे तो यहां का एसी बंद मिला। गर्मी और उमस के बीच ही एक बेड पर दो-दो मरीज लेटे हुए थे। यहां एग्जास्ट फैन नहीं होने से परेशान मरीज पंखों के नीचे ही बेड खींच कर ले जा रहे थे। तीमारदारों ने व्यवस्था पर सवाल उठाए।
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यह देख डॉ. वीरेंद्र यादव ने कर्मचारियों को फटकार लगाई और एसी ठीक कराने व पंखे लगाने के निर्देश दिए। इमरजेंसी वार्ड को 10 से बढ़ाकर 20 बेड करने का निर्देश दिया। यहां से लैब पहुंचकर तकनीशियन से हाथ धोने के तरीका पूछा तो वह ठीक से नहीं बता पाए।
डस्टबिन भी ठीक से रखे नहीं मिले। गायनी वार्ड में गर्भवती महिलाओं के तीमारदारों को बुलाने के लिए लाउडस्पीकर के बारे में पूछा तो मालूम चला कि टीम के आने से पहले ही अस्थाई व्यवस्था की गई है। चलाने को कहा पर वह चल नहीं पाया।
निदेशक ने गायनी वार्ड के बाहर कूलर और सीढ़ियों में लाइट लगाने के निर्देश दिए। ब्लड बैंक की एंट्री पर डिस्प्ले बोर्ड ऑन करने के लिए डॉक्टर से कहा। वे कर पाए न ही स्टाफ उसका स्विच खोज पाया।
डिस्प्ले बोर्ड पर दो ब्लड ग्रुप के आगे जीरो लिखा देख निदेशक ने पूछा, इस ग्रुप का खून चाहिए तो कोई क्या करे, इस पर स्टाफ कोई भी जवाब नहीं दे पाया। ब्लड डोनेशन वाले स्थान पर भी एलईडी नहीं थी। इसे लगाने के निर्देश दिए गए।
माइक ताले में बंद...चाबी का अता-पता नहीं
निदेशक और उनकी टीम को हैरतअंगेज अनुभव हुए। डिस्पेंसरी में लगे लाउडस्पीकर पर ताला लगा मिला। इसकी चाबी कहां गई, यह डॉक्टर बता सके न स्टाफ। इस पर निदेशक नेे सभी को फटकार लगाई। अस्पताल की डिस्पेंसरी में करीब 400 किस्म की दवाएं स्टॉक में होनी थीं, मिलीं सिर्फ 120 तरह की ही। 280 तरह की दवाएं क्यों नहीं, इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। अस्पताल के पुराने भवन की दीवार पर पीपल के उगे पेड़ देख भी टीम ने फटकार लगाई। एचआईवी की जांच के कक्ष में नंबर टेप से छुपाया हुआ था, जिसे सार्थक टीम ने उतारा। ब्लड बैंक में टीम के आने तक व्यवस्थाएं ठीक होती रहीं।
महिलाओं में खून की कमी पर डीपीएम को फटकार
ओपीडी में पांच गर्भवती महिलाओं के कार्ड देखे तो तीन में खून की कमी मिली। निदेशक ने डीपीएम को फटकार लगाते हुए पूछा, महिलाओं में खून की कमी है तो आशा वर्कर कर क्या रही हैं? नर्सिंग स्टॉफ से नवजात की देखभाल पर पूछा मगर संतोषजक जवाब नहीं मिले। इस दौरान एक महिला को बिना गंभीर कारण के रेफर करना भी पाया गया।
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मिशन निदेशक का यह कोई औचक निरीक्षण नहीं था। वह वीरवार को ही यहां पहुंच गए थे। तय था कि शुक्रवार को नागरिक अस्पताल देखेंगे। फिर भी कोई सुधार नहीं किया। वह इमरजेंसी की ओर बढ़े तो गेट पर ही रस्सी बंधी मिली। इससे एंबुलेंस और निजी गाड़ियों का आना संभव नहीं था। उन्होंने इसे खुलवाया।
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इमरजेंसी पहुंचे तो यहां का एसी बंद मिला। गर्मी और उमस के बीच ही एक बेड पर दो-दो मरीज लेटे हुए थे। यहां एग्जास्ट फैन नहीं होने से परेशान मरीज पंखों के नीचे ही बेड खींच कर ले जा रहे थे। तीमारदारों ने व्यवस्था पर सवाल उठाए।
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यह देख डॉ. वीरेंद्र यादव ने कर्मचारियों को फटकार लगाई और एसी ठीक कराने व पंखे लगाने के निर्देश दिए। इमरजेंसी वार्ड को 10 से बढ़ाकर 20 बेड करने का निर्देश दिया। यहां से लैब पहुंचकर तकनीशियन से हाथ धोने के तरीका पूछा तो वह ठीक से नहीं बता पाए।
डस्टबिन भी ठीक से रखे नहीं मिले। गायनी वार्ड में गर्भवती महिलाओं के तीमारदारों को बुलाने के लिए लाउडस्पीकर के बारे में पूछा तो मालूम चला कि टीम के आने से पहले ही अस्थाई व्यवस्था की गई है। चलाने को कहा पर वह चल नहीं पाया।
निदेशक ने गायनी वार्ड के बाहर कूलर और सीढ़ियों में लाइट लगाने के निर्देश दिए। ब्लड बैंक की एंट्री पर डिस्प्ले बोर्ड ऑन करने के लिए डॉक्टर से कहा। वे कर पाए न ही स्टाफ उसका स्विच खोज पाया।
डिस्प्ले बोर्ड पर दो ब्लड ग्रुप के आगे जीरो लिखा देख निदेशक ने पूछा, इस ग्रुप का खून चाहिए तो कोई क्या करे, इस पर स्टाफ कोई भी जवाब नहीं दे पाया। ब्लड डोनेशन वाले स्थान पर भी एलईडी नहीं थी। इसे लगाने के निर्देश दिए गए।
माइक ताले में बंद...चाबी का अता-पता नहीं
निदेशक और उनकी टीम को हैरतअंगेज अनुभव हुए। डिस्पेंसरी में लगे लाउडस्पीकर पर ताला लगा मिला। इसकी चाबी कहां गई, यह डॉक्टर बता सके न स्टाफ। इस पर निदेशक नेे सभी को फटकार लगाई। अस्पताल की डिस्पेंसरी में करीब 400 किस्म की दवाएं स्टॉक में होनी थीं, मिलीं सिर्फ 120 तरह की ही। 280 तरह की दवाएं क्यों नहीं, इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। अस्पताल के पुराने भवन की दीवार पर पीपल के उगे पेड़ देख भी टीम ने फटकार लगाई। एचआईवी की जांच के कक्ष में नंबर टेप से छुपाया हुआ था, जिसे सार्थक टीम ने उतारा। ब्लड बैंक में टीम के आने तक व्यवस्थाएं ठीक होती रहीं।
महिलाओं में खून की कमी पर डीपीएम को फटकार
ओपीडी में पांच गर्भवती महिलाओं के कार्ड देखे तो तीन में खून की कमी मिली। निदेशक ने डीपीएम को फटकार लगाते हुए पूछा, महिलाओं में खून की कमी है तो आशा वर्कर कर क्या रही हैं? नर्सिंग स्टॉफ से नवजात की देखभाल पर पूछा मगर संतोषजक जवाब नहीं मिले। इस दौरान एक महिला को बिना गंभीर कारण के रेफर करना भी पाया गया।