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Jind News: नेशनल घुड़सवारी में गांव रत्ताखेड़ा के साहिल सिंहमार ने जीता गोल्ड मेडल
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28जेएनडी45: घर पहुंचने पर साहिल को चूरमा खिलाते हुए साहिल की मां संतोष। संवाद
- फोटो : यूकेलिप्टस के पेड़ पर चढ़ा जानवर।
सफीदों (जींद)। नेशनल घुड़सवारी में गांव रत्ताखेड़ा के छोरे साहिल ने गोल्ड मेडल जीतकर सफीदों व जींद के साथ हरियाणा प्रदेश का नाम रोशन किया है। साहिल सिंहमार का अब घुड़सवारी में इंडिया टीम में सिलेक्शन हुआ है। साथ ही उन्हें इंडिया टीम का कैप्टन भी चयनित कर दिया गया है। मंगलवार को सफीदों में पहुंचने पर साहिल का पूरे ढोल नगाड़ों के साथ खुली जीप में भव्य स्वागत किया गया।
सफीदों के खानसर चौक से उसको बाइक काफिले के साथ गांव रत्ताखेड़ा में उसके घर पर ले जाया गया। गांव में पहुंचते ही साहिल की मां संतोष कुमारी ने अपने हाथों से बनाया चूरमा साहिल को खिलाया। साहिल की मां संतोष नर्स हैंए जबकि पिता एक आटा चक्की चलाते हैं। साहिल ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने दादा रिटायर्ड आर्मी कैप्टन सूरत सिंह को दिया है। बचपन से ही उसके दादा ने उन्हें घुड़सवारी के प्रेरित किया हैं।
साहिल ने बताया कि यह प्रतियोगिता 21 से 24 दिसंबर तक दिल्ली में आयोजित हुई थी। इसमें उनके छह राउंड हुए। छह राउंड में उन्होंने घुड़सवारी करते हुए तलवार से निशानेबाजी, भाले से निशानेबाजी, रिंग परेड, नींबू परेड आदि छह राउंड पूरा करके गोल्ड मेडल हासिल किया है। प्रतियोगिता में पूरे देशभर से करीब 300 प्रतिभागियों ने भाग लिया था। पहले वह झारखंड की तरफ से खेला, उसके बाद फिर वह हरियाणा की तरफ से खेला और गोल्ड मेडल हासिल किया।
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वह फिलहाल झारखंड (रांची) में 100 से अधिक बच्चों को प्रशिक्षण भी दे रहे हैं। यहां भारत की क्रिकेट टीम के कप्तान रहे महेंद्र सिंह धोनी की लड़की भी घुड़सवारी का प्रशिक्षण उनके पास ले रही है। साहिल ने पहले पायनियर सीनियर सेकंडरी स्कूल व फिर पानीपत थर्मल से अपनी 12वीं तक की पढ़ाई की है। इससे पहले भी वह हरियाणा लेवल पर दो सिल्वर मेडल प्राप्त कर चुके हैं। इस अवसर पर उनके साथ सफीदों प्रशासन की तरफ से सदर थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह, सूरत सिंह, राजिंद्र पाल सहरावत, नरेश सिंह बराड़, जयदीप सिंहमार सुनील गहलोत मौजूद रहे।
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सफीदों के खानसर चौक से उसको बाइक काफिले के साथ गांव रत्ताखेड़ा में उसके घर पर ले जाया गया। गांव में पहुंचते ही साहिल की मां संतोष कुमारी ने अपने हाथों से बनाया चूरमा साहिल को खिलाया। साहिल की मां संतोष नर्स हैंए जबकि पिता एक आटा चक्की चलाते हैं। साहिल ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने दादा रिटायर्ड आर्मी कैप्टन सूरत सिंह को दिया है। बचपन से ही उसके दादा ने उन्हें घुड़सवारी के प्रेरित किया हैं।
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साहिल ने बताया कि यह प्रतियोगिता 21 से 24 दिसंबर तक दिल्ली में आयोजित हुई थी। इसमें उनके छह राउंड हुए। छह राउंड में उन्होंने घुड़सवारी करते हुए तलवार से निशानेबाजी, भाले से निशानेबाजी, रिंग परेड, नींबू परेड आदि छह राउंड पूरा करके गोल्ड मेडल हासिल किया है। प्रतियोगिता में पूरे देशभर से करीब 300 प्रतिभागियों ने भाग लिया था। पहले वह झारखंड की तरफ से खेला, उसके बाद फिर वह हरियाणा की तरफ से खेला और गोल्ड मेडल हासिल किया।
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वह फिलहाल झारखंड (रांची) में 100 से अधिक बच्चों को प्रशिक्षण भी दे रहे हैं। यहां भारत की क्रिकेट टीम के कप्तान रहे महेंद्र सिंह धोनी की लड़की भी घुड़सवारी का प्रशिक्षण उनके पास ले रही है। साहिल ने पहले पायनियर सीनियर सेकंडरी स्कूल व फिर पानीपत थर्मल से अपनी 12वीं तक की पढ़ाई की है। इससे पहले भी वह हरियाणा लेवल पर दो सिल्वर मेडल प्राप्त कर चुके हैं। इस अवसर पर उनके साथ सफीदों प्रशासन की तरफ से सदर थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह, सूरत सिंह, राजिंद्र पाल सहरावत, नरेश सिंह बराड़, जयदीप सिंहमार सुनील गहलोत मौजूद रहे।