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Jind News: चार नवंबर तक मांगें लागू नहीं हुईं तो हड़ताल करेंगे रोडवेजकर्मी
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संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। परिवहन मंत्री के साथ आठ सितंबर को हुई बैठक में सहमति बनने के बावजूद मांगें लागू नहीं होने से हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों में रोष बढ़ गया है। हरियाणा रोडवेज कर्मचारी साझा मोर्चा ने अब सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का एलान किया है।
मोर्चा ने मुख्यमंत्री को हड़ताल का नोटिस भेजकर चेतावनी दी है कि यदि चार नवंबर तक सहमत मांगों को लागू करने संबंधी परिपत्र जारी नहीं किए गए तो पांच और छह नवंबर को रोडवेज कर्मचारी दो दिवसीय सांकेतिक हड़ताल करेंगे।
साझा मोर्चा के वरिष्ठ सदस्य जगदीप लाठर, संदीप रंगा, चमन लाल स्वामी, सुधीर अहलावत और कुलदीप ने कहा कि कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर सरकार का रवैया निराशाजनक है। बैठक में मांगों पर सहमति बनने और एक माह के भीतर संबंधित परिपत्र जारी करने का आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
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इससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है। कर्मचारियों की मांगों को लेकर पहले पांच और छह सितंबर को हड़ताल का नोटिस दिया गया था। इसके बाद आठ सितंबर को परिवहन मंत्री के साथ कर्मचारी प्रतिनिधिमंडल की बैठक हुई। बैठक में मांगों पर सहमति बनी थी और उन्हें लागू करने के लिए एक माह के भीतर परिपत्र जारी करने का भरोसा दिया गया था।
कर्मचारियों को उम्मीद थी कि सरकार तय समय में मांगों को लागू कर देगी, लेकिन निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी आदेश जारी नहीं हुए। नेताओं ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों ने सरकार को मांगें लागू करने के लिए चार नवंबर तक का समय दिया है। हड़ताल की स्थिति पैदा होने पर इसकी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।
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जींद। परिवहन मंत्री के साथ आठ सितंबर को हुई बैठक में सहमति बनने के बावजूद मांगें लागू नहीं होने से हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों में रोष बढ़ गया है। हरियाणा रोडवेज कर्मचारी साझा मोर्चा ने अब सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का एलान किया है।
मोर्चा ने मुख्यमंत्री को हड़ताल का नोटिस भेजकर चेतावनी दी है कि यदि चार नवंबर तक सहमत मांगों को लागू करने संबंधी परिपत्र जारी नहीं किए गए तो पांच और छह नवंबर को रोडवेज कर्मचारी दो दिवसीय सांकेतिक हड़ताल करेंगे।
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साझा मोर्चा के वरिष्ठ सदस्य जगदीप लाठर, संदीप रंगा, चमन लाल स्वामी, सुधीर अहलावत और कुलदीप ने कहा कि कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर सरकार का रवैया निराशाजनक है। बैठक में मांगों पर सहमति बनने और एक माह के भीतर संबंधित परिपत्र जारी करने का आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
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इससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है। कर्मचारियों की मांगों को लेकर पहले पांच और छह सितंबर को हड़ताल का नोटिस दिया गया था। इसके बाद आठ सितंबर को परिवहन मंत्री के साथ कर्मचारी प्रतिनिधिमंडल की बैठक हुई। बैठक में मांगों पर सहमति बनी थी और उन्हें लागू करने के लिए एक माह के भीतर परिपत्र जारी करने का भरोसा दिया गया था।
कर्मचारियों को उम्मीद थी कि सरकार तय समय में मांगों को लागू कर देगी, लेकिन निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी आदेश जारी नहीं हुए। नेताओं ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों ने सरकार को मांगें लागू करने के लिए चार नवंबर तक का समय दिया है। हड़ताल की स्थिति पैदा होने पर इसकी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।