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हरियाणा: जींद पहुंचे राकेश टिकैत, बोले- गांवों में कमेटियां बनाएं, खापों को और मजबूत करें
Thu, 02 Jun 2022 01:05 AM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Thu, 02 Jun 2022 01:05 AM IST
सार
राकेश टिकैत ने कहा कि हरियाणा के क्रांतिकारी युवाओं ने आंदोलन को शांतिपूर्वक चलाना सीखा। आंदोलन में शहादत देने वाले किसानों से गांव के युवा प्रेरणा लेंगे। राज्यसभा सदस्य दीपेंद्र हुड्डा सहित कई किसान नेता कार्यक्रम में पहुंचे थे।
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भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा के जींद के गुलकनी गांव में बुधवार को नौगामा खाप ने किसान आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले जिले के किसानों को श्रद्धांजलि देने के लिए गांव के बस अड्डे पर स्मारक बनाया और गांव में शहीद किसानों के स्मारक का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में मुख्यातिथि के तौर पर किसान नेता राकेश टिकैत व रतन मान ने शिरकत की, जबकि राज्यसभा सदस्य दीपेंद्र हुड्डा सहित कई किसान नेता कार्यक्रम में पहुंचे।
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संयुक्त किसान मोर्चा के नेता व भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने किसानों को संबोधित किया कि किसान आंदोलन में हरियाणा और खापों का बड़ा योगदान रहा है और उन्हीं की बदौलत इस आंदोलन में किसानों की जीत हुई है। हरियाणा के युवा क्रांतिकारी हैं और लोगों ने शांतिपूर्वक आंदोलन करना सीख लिया है।
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किसी भी बाहरी आदमी को चंदा न दें
राकेश टिकैत ने कहा कि आप जो चंदा एकत्रित करते हैं, इसके लिए अपने गांव में एक कमेटी बनाकर रखें। किसी भी बाहरी आदमी को यह चंदा न दें। पहले बहुत से लोग आए जो आपका चंदा एकत्रित करके ले गए। अब ऐसा बिल्कुल भी नहीं होने देना है। उन्होंने कहा कि किसानों की आवाज बुलंद करने के लिए गांवों में कमेटियां बनाई जाएं और अपनी खापों को और मजबूत करें।
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उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान पंजाब के लोगों द्वारा व गुरुद्वारा प्रबंधनों द्वारा जो व्यवस्था की गई, वह काबिले तारीफ थी। इसी के चलते किसान इतना लंबा आंदोलन चला पाए। इस आंदोलन में तीन पीढ़ियां एक साथ रहीं। यह आंदोलन एक वैचारिक आंदोलन था और इस आंदोलन में सोशल मीडिया का भी अहम आंदोलन रहा, जिसने इस आंदोलन को गांव-गांव तक पहुंचा दिया। पूरे देश से भिन्न-भिन्न राज्यों से लोगों ने इसमें भागीदारी की।
किसान शहीद स्मारक की तारीफ की
टिकैत ने कहा कि आंदोलन के दौरान जो किसान शहीद हुए थे, उन्हें मुआवजा अभी तक नहीं मिल पाया है। इसके संबंध में तेलंगाना की सरकार से भी बातचीत की जाएगी और मुआवजा दिलवाया जाएगा। उन जान गंवाने वाले किसानों के परिवारों का भी हमें ध्यान रखना है, जिन्होंने किसानों के लिए बलिदान दिया। उन्होंने गुलकनी में बने किसान शहीद स्मारक की तारीफ करते हुए कहा कि इसका रखरखाव अच्छे से करें। यहां एक पुस्तकालय बनवाया जाए, ताकि बच्चे यहां पढ़ सकें।
जान गंवाने वाले किसानों के नाम पर रखा जाए स्कूल, सड़क का नाम : कोहाड़
युवा किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि हमें इन किसानों से प्रेरणा लेने की जरूरत है, इन्होंने हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए कुर्बानियां दी हैं। इस सरकार द्वारा आरएसएस के नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर सड़कों और स्कूलों के नाम रखे जा रहे हैं। उनकी मांग है कि अगर किसी स्कूल, इमारत या सड़क का नाम रखना है तो किसान आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों के नाम पर रखा जाए। उन्होंने बंगलूरू में राकेश टिकैत के ऊपर हुए हमले पर कहा कि यह हमला केवल उन पर नहीं पूरे किसान समाज पर हुआ है। इसके लिए वह कोई भी कुर्बानी देने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब में गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या निंदनीय है। उन्होंने किसान आंदोलन में बहुत सहयोग दिया था।
किसान आंदोलन के लिए सभी किसान बधाई के पात्र : दीपेंद्र
राज्यसभा सदस्य एवं कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि जो विश्व के इतिहास में किसान आंदोलन जैसा आंदोलन कभी नहीं हुआ है। इसके लिए सभी किसान बधाई के पात्र हैं। इसमें करीब 700 किसानों ने अपनी जान गंवाई, इसके बावजूद किसानों ने हौसला नहीं छोड़ा और सरकार को झुकाया। उन्होंने कहा कि इस किसान आंदोलन से बहुत कुछ सीखने को मिला।
हम सरकार में भी रहे और विपक्ष में भी और उन्होंने संसद में देखा कि पंजाब के सांसद किसानों की आवाज बेहिचक उठाते थे तो उन्होंने भी आवाज उठाई। आप लोगों को ऐसे जनप्रतिनिधि चुनने चाहिए, जो आपकी आवाज चंडीगढ़ और दिल्ली में उठा सके। उन्होंने कहा कि अगर भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में प्रदेश में सरकार बनी तो जितने भी इस आंदोलन में हरियाणा के किसानों ने जान गंवाई है, उनके आश्रितों को एक-एक सरकारी नौकरी दी जाएगी।