फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jind News ›   Only 1.5 million trees per 1.5 million population of the district

जिले की 15 लाख आबादी पर सिर्फ साढ़े दस लाख पेड़

Thu, 29 Apr 2021 11:46 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 29 Apr 2021 11:46 PM IST
विज्ञापन
Only 1.5 million trees per 1.5 million population of the district
पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से मानव जीवन बुरी तरह प्रभावित है। इससे जहां ऑक्सीजन की कमी होने लगी है, वहीं मौसम का चक्र भी पूरी तरह बिगड़ गया है। पर्यावरण में कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा बढ़ रही है। सांस लेना भी दूभर होता जा रहा है। बिगड़े पर्यावरण के चलते सांस व संक्रमण जैसी बीमारियों को बढ़ावा मिल रहा है। ऐसे में हम सभी को वृक्षों को सहेजने की तरफ बढ़ना होगा ताकि न सिर्फ ऑक्सीजन का स्तर सुधारा जा सके, बल्कि पर्यावरण भी बचाया जा सके। जिले में कुल आबादी लगभग 15 लाख है और पेड़ों की संख्या लगभग साढ़े दस लाख है। आज कोरोना संक्रमण ने एक विकट स्थिति सामने लाकर रखी दी है। ऑक्सीजन की कमी के कारण सैकड़ों कोरोना संक्रमितों की मौत हो रही है। ऐेसे में हमें पर्यावरण संरक्षण के लिए पेड़-पौधों की देखभाल के लिए आगे आने की जरूरत है।
विज्ञापन

पेड़ों की लगातार कटाई होने की वजह से दिन-प्रतिदिन वन क्षेत्र घटता जा रहा है। यह न सिर्फ पर्यावरण की दृष्टि से चिंताजनक है, बल्कि मानव जीवन के लिए भी घातक है। आवासीय जरूरतों, उद्योगों और ढांचागत विकास के लिए सालों से पेड़ों को काटा जा रहा है। पेड़ों के संरक्षण के लिए बने नियम और कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इससे न सिर्फ प्राकृतिक संरचना बिगड़ रही है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक साबित हो रहा है। किरण, समाजसेवी।
विज्ञापन

जीवन के लिए ऑक्सीजन जरूरी है। यदि ऑक्सीजन नहीं होगी, तो जीवन ही समाप्त हो जाएगा। लिहाजा, ऑक्सीजन को बचाने के लिए वृक्षों को बचाना होगा। वह कहते हैं कि इंसान जो सांस छोड़ता है वह कार्बन डाई ऑक्साइड होती है। पेड़-पौधे पर्यावरण में फैली इसी कार्बन डाई ऑक्साइड को ग्रहण करते हैं और उसके बदले ऑक्सीजन छोड़ते हैं। वर्तमान में जिस तेजी से पेड़ों की कटाई की जा रही है यह मानव जीवन के लिए संकट के द्वार खोल कर रहा है। वातावरण पर इसका विपरीत असर दिखने लगा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

डॉ. सुुभाष चंद्र, खंड कृषि अधिकारी।
पहले पर्यावरण में ऑक्सीजन की जितनी मात्रा होती थी, पेड़-पौधों के अभाव में अब उसमें गिरावट आ चुकी है। इससे त्वचा और सांस की बीमारियां बढ़ रही हैं। फेफड़ों में पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं जाने की वजह से इंफेक्शन, दमा व घुटन जैसी बीमारियां होने लगी हैं। दिल के मरीजों की तादात भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में जिंदगी को बचाने के लिए पेड़ों को बचाना होगा। समाज के हर व्यक्ति को यह संकल्प लेना होगा कि हरे भरे वृक्ष नहीं काटें, बल्कि पौधे लगाने पर जोर दें।
सुनील वशिष्ठ, अन्ना टीम सदस्य।
यदि वृक्ष नहीं होंगे तो मानव जीवन समाप्त हो जाएगा। इसके परिणाम सामने हैं। पानी का घटता स्तर और सूखे की समस्या भी व्यापक होती जा रही है। जमीन बंजर हो रही है। यदि हम अब भी पेड़-पौधों के महत्व को नहीं समझ सकें, तो पेड़-पौधों के साथ ही जीवन भी समाप्त होना तय है। ऐसे में हम सभी को यह संकल्प लेना होगा कि न खुद पेड़ काटेंगे और न ही दूसरों को हरे भरे पेड़ काटने देंगे। समाज में जागरूकता फैलानी होगी कि पेड़ नहीं काटें बल्कि उन्हें संभालें। तभी पर्यावरण बचेगा और जब पर्यावरण बचेगा, तो ही जीवन भी बचेगा।
डॉ. असीम जांगड़ा, जिला सलाहकार, बागवानी जींद।
जितनी तेजी से पेड़-पौधों को काटने का सिलसिला जारी है, यदि यह नहीं थमा तो जिंदगी खत्म होना तय है। हम सभी को पर्यावरण के प्रति सचेत होना होगा। सिर्फ लोगों को पेड़ काटने से रोकने से पर्यावरण नहीं बचेगा, बल्कि पर्यावरण को बचाने के लिए पौधे लगाने होंगे। उनकी देखभाल करनी होगी, तभी पेड़ पौधे बचेंगे और तभी जिंदगी भी बचेगी।

रणधीर मताना, जिला सलाहकार, जन स्वास्थ्य विभाग।
पेड़-पौधों का हमारे जीवन में विशेष महत्व है, लेकिन आधुनिकता की ओर बढ़ते हमारे कदम पेड़-पौधों के महत्व को नहीं समझ पा रहे हैं। जाने अनजाने पेड़-पौधों को काटा जा रहा है। ऐसे में लोगों को चाहिए कि पेड़-पौधों को काटने से बचें। पर्यावरण का चक्र बिगड़ता रहा है। बरसात समय पर नहीं होती। बाढ़ जैसी आपदाएं आ रही हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि पेड़ कम होते जा रहे हैं। इसको लेकर हम गंभीर नहीं हैं।
डॉ. रजनीश जैन, प्रधान इनर व्हील क्लब।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed