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Jind News: गुरु गोविंद सिंह के जन्म उत्सव पर शहर में निकाला नगर कीर्तन
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06जेएनडी35: नगर कीर्तन के दौरान पालकी के आगे चलते हुए पंच प्यारे। संवाद
- फोटो : लीकेज तलाशने के लिए खोदी गई सड़क।
नरवाना। शहर के गांधी नगर स्थित गुरुद्वारे में गुरु गोविंद सिंह का 358वां प्रकाश उत्सव धूमधाम से मनाया गया। गुरु गोविंद सिंह के जन्म उत्सव पर भजन-कीर्तन व गुरुवाणी हुई। गुरुद्वारे में मुख्यातिथि के तौर पर कैबिनेट मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने शिरकत की। दोपहर बाद नगर कीर्तन निकाला गया, जो शहर के मुख्य रेलवे रोड, परशुराम चौक, अग्रसेन चौक, अपोलो चौक, भगत सिंह व पंजाबी चौक से होता हुआ गीता मंदिर के निकट गुरुद्वारे में संपन्न हुआ।
नगर कीर्तन में बाहर से आए कलाकारों द्वारा करतब भी दिखाए गए। कलाकारों के करतबों को देख शहर के लोग व दुकानदार दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो गए। कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी ने बताया कि इतिहास में सबसे बड़ा बलिदान गुरु गोविंद सिंह के पिताजी गुरु तेग बहादुर का रहा है। गुरु गोबिंद सिंह ने सिख धर्म सिख पद्धति की स्थापना की। अमृत चखा कर सच्चे सिख बनाए। उनके पुत्रों की कुर्बानी जग जाहिर है।
जुल्मी मुगल राजाओं ने इस्लाम धर्म अपनाने के लिए इतनी प्रताड़ना की परंतु गुरु गोविंद के पुत्रों ने विश्व के अंदर नया इतिहास रचते हुए निडर होकर अपने जीवन का वरदान कर दिया तथा अपने शीश को झुकना स्वीकार नहीं किया। इस अवसर पर गुरुद्वारा सिंह सभा के प्रधान कृष्ण सिंह घुम्मन, महासचिव छोटा सिंह, मंच संचालक जोगिंद्र सिंह, राजेंद्र गुप्ता अमरगढ़, गुरजीत सिंह, अंग्रेज सिंह, जसपाल सिंह, रामचंद्र जैन, गोल्डी महाजन, गगन, गीत, शंटी लीखा, शंकर, हर्षप्रीत, हरप्रीत, रिंकू, लवप्रीत सिंह, दर्शन मोर, गुरमीत सहारण, संदीप छाबड़ा, नरेश, सुभाष, कर्णजीत कौर, दलजीत सिंह, सुक्खा सिंह ढींढसा मौजूद रहे।
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नगर कीर्तन में बाहर से आए कलाकारों द्वारा करतब भी दिखाए गए। कलाकारों के करतबों को देख शहर के लोग व दुकानदार दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो गए। कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी ने बताया कि इतिहास में सबसे बड़ा बलिदान गुरु गोविंद सिंह के पिताजी गुरु तेग बहादुर का रहा है। गुरु गोबिंद सिंह ने सिख धर्म सिख पद्धति की स्थापना की। अमृत चखा कर सच्चे सिख बनाए। उनके पुत्रों की कुर्बानी जग जाहिर है।
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जुल्मी मुगल राजाओं ने इस्लाम धर्म अपनाने के लिए इतनी प्रताड़ना की परंतु गुरु गोविंद के पुत्रों ने विश्व के अंदर नया इतिहास रचते हुए निडर होकर अपने जीवन का वरदान कर दिया तथा अपने शीश को झुकना स्वीकार नहीं किया। इस अवसर पर गुरुद्वारा सिंह सभा के प्रधान कृष्ण सिंह घुम्मन, महासचिव छोटा सिंह, मंच संचालक जोगिंद्र सिंह, राजेंद्र गुप्ता अमरगढ़, गुरजीत सिंह, अंग्रेज सिंह, जसपाल सिंह, रामचंद्र जैन, गोल्डी महाजन, गगन, गीत, शंटी लीखा, शंकर, हर्षप्रीत, हरप्रीत, रिंकू, लवप्रीत सिंह, दर्शन मोर, गुरमीत सहारण, संदीप छाबड़ा, नरेश, सुभाष, कर्णजीत कौर, दलजीत सिंह, सुक्खा सिंह ढींढसा मौजूद रहे।
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