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Jind News: जुलाना... छह पार्षद दोबारा बने उम्मीदवार, एक हारी हुई उम्मीदवार

Sat, 22 Feb 2025 11:43 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 22 Feb 2025 11:43 PM IST
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Julana... Six councilors became candidates again, one candidate lost.
22जेएनडी35: नगर पालिका जुलाना का फाइल फोटो।
कर्मवीर
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जुलाना। कस्बे में समस्याओं की भरमार है। गलियां टूटी पड़ी हैं। सीवरेज और पेयजल की किल्लत से भी लोगों को जुझना पड़ रहा है। गलियों में स्ट्रीट लाइट की कोई व्यवस्था नही है। ऐसे में चोरी की वारदातें लगातार बढ़ रही हैं। जुलाना की कई काॅलाेनियां अवैध हैं, जहां पर लोगों को पीले पंजे का खतरा लगतार सताता रहता है। इसके बावजूद छह पार्षद दोबारा से मैदान में हैं।
वार्ड नंबर दो से पिछली बार हारी हुई उम्मीदवार कविता लगातार दूसरी बार अपनी किस्मत आजमा रही है तो वार्ड नंबर छह से ओमप्रकाश। पिछली बार उप प्रधान बने विजय बैरागी लगातार दूसरी बार मैदान में हैं लेकिन विजय अबकि बार वार्ड नंबर सात से चुनाव लड़ रहे हैं। वार्ड नंबर नौ से मजदूर नेता सुभाष पांचाल लगातार दूसरी बार चुनावी मैदान में हैं, लेकिन वार्ड में एक महाजन और दो उम्मीदवार एससी समाज से उनकी टक्कर में हैं।
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सुभाष पांचाल पिछड़े वर्ग से संबंध रखते हैं। वार्ड नंबर 10 एससी के लिए आरक्षित है जिसमें पिछली बार पार्षद बनी मीना भी चुनावी मैदान में है। वार्ड नंबर 12 से राकेश कुमार चुनाव लड़ रहे हैं। राकेश कुमार पिछली बार वार्ड नंबर 13 से पार्षद बने थे। वार्ड नंबर 13 से मौसमी मैदान में हैं। मौसमी इससे पहले वार्ड नंबर 12 की पार्षद थी। अधिकतर उम्मीदवारों से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि जो विकास कार्याें में खामियां रह गई थी इस बार उनको जरूर पूरा करवाएंगे। ऐसे में देखना यह है कि वार्डों के लोग क्या उन्हें दोबारा मौका देंगे या नही।
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बाक्स

जुलाना का इतिहास... एक बारे बने पार्षद को नकारते हैं जुलाना के बाशिंदे
जुलाना नगरपालिका 1952 में बनी थी। 2000 में इनेलो सरकार के चलते जुलाना को नगरपालिका तोड़कर गांव बना दिया और कृष्ण लाठर को सरपंच चुना गया। वर्ष 2006 में कांग्रेस सरकार ने फिर से जुलाना नगरपालिका बनाई और पार्षदों के चुनाव शुरू हो गए। वर्ष 2007 में नपा का चुनाव हुआ तो निशा देवी पार्षद बनी और 2012 में फिर दोबारा से पार्षद बनी। इसके अलावा अब तक कोई भी पार्षद दोबारा चुनाव नही जीत पाया है। इसका सीधा मतलब है कि जुलाना के लोग पिछली योजना से असंतुष्ट हो जाते हैं और उम्मीदवार को नकार देते हैं। लेकिन अबकि बार देखना होगा कि क्या जुलाना का इतिहास बदलेगा या नहीं।


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जुलाना में पहली बार प्रधान पद के लिए सीधा होगा चुनाव
जुलाना विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने जातिगत समीकरण साधने का काम किया था। हालांकि भाजपा उम्मीदवार जीत नहीं पाया लेकिन जुलाना नपा क्षेत्र से जीत मिली थी। उसी जीत को देखते हुए भाजपा ने फिर बीसी चेहरे पर दांव खेला है और जुलाना नपा से डाॅ. संजय जांगड़ा को टिकट दी है। अब देखना होगा क्या भाजपा वही दबदबा बना पाती है या नही। यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
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