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Jind News: दादा-दादी का भरण-पोषण करना वारिश की जिम्मेदारी
Fri, 08 Aug 2025 11:46 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 08 Aug 2025 11:46 PM IST
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08जेएनडी25-चाय पे चर्चा कार्यक्रम में मौजूद सीजेएम और बुजुर्ग। स्रोत प्रशासन
जींद। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मोनिका ने शुक्रवार को डे केयर सेंटर सेक्टर-7 में चाय पे चर्चा कार्यक्रम एक विशेष कानूनी साक्षरता शिविर का आयोजन किया। उन्होंने बताया कि भारत में वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष कानून बनाए गए है जिनमें वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण संतान या वारिस पर यह कानूनी जिम्मेदारी है कि वे अपने माता-पिता या दादा-दादी का उचित भरण-पोषण करें।
यदि कोई संतान ऐसा नहीं करता तो वरिष्ठ नागरिक संबंधित प्राधिकरण के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकते है और उन्हें भता, देखभाल या आवास दिलाया जा सकता है। इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों को सरकारी एवं गैर-सरकारी योजनाओं का लाभ लेने का अधिकार है जैसे वृद्धावस्था पेंशन, रेलवे एवं बस यात्रा में रियायत, आयकर में दूर, स्वास्थ्य बीमा योजनाएं, पुराने मामलों के निपटारे में प्राथमिकता।
यदि किसी वरिष्ठ नागरिक ने अपनी संपत्ति किसी शर्ट के आधार पर संतान को दी है और वह सन्तान उस शर्ट का पालन नहीं करती तो वरिष्ठ नागरिक के पास उसे वापस लेने का कानूनी अधिकार है। उन्होंने बताया कि चाय पे चर्चा केवल कानून की बातें करना नहीं है बल्कि का मकसद के माध्यम से उन वास्तविक समस्याओं को समझना भी है। जो सामना वरिष्ठ नागरिक रोजमर्रा की जिंदगी में करते हैं।
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वे किसी प्रकार के अन्याय या हिंसा का सामना करने के लिए चुप न रहे। पुलिस हेल्पलाइन, वरिष्ठ नागरिक हेल्प डेस्क, कानूनी सेक प्राधिकरण और सामाजिक संगठनों की मदद ली जा सकती है। इस अवसर पर वरिष्ठ नागरिक सुभाष पाहवा, बृजमोहन पंवार, रमाकांत, चमनलाल ग्रोवर, पीसी चैन, जोगिंद्र पाहवा, देशराज सेतिया मौजूद रहे।
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यदि कोई संतान ऐसा नहीं करता तो वरिष्ठ नागरिक संबंधित प्राधिकरण के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकते है और उन्हें भता, देखभाल या आवास दिलाया जा सकता है। इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों को सरकारी एवं गैर-सरकारी योजनाओं का लाभ लेने का अधिकार है जैसे वृद्धावस्था पेंशन, रेलवे एवं बस यात्रा में रियायत, आयकर में दूर, स्वास्थ्य बीमा योजनाएं, पुराने मामलों के निपटारे में प्राथमिकता।
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यदि किसी वरिष्ठ नागरिक ने अपनी संपत्ति किसी शर्ट के आधार पर संतान को दी है और वह सन्तान उस शर्ट का पालन नहीं करती तो वरिष्ठ नागरिक के पास उसे वापस लेने का कानूनी अधिकार है। उन्होंने बताया कि चाय पे चर्चा केवल कानून की बातें करना नहीं है बल्कि का मकसद के माध्यम से उन वास्तविक समस्याओं को समझना भी है। जो सामना वरिष्ठ नागरिक रोजमर्रा की जिंदगी में करते हैं।
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वे किसी प्रकार के अन्याय या हिंसा का सामना करने के लिए चुप न रहे। पुलिस हेल्पलाइन, वरिष्ठ नागरिक हेल्प डेस्क, कानूनी सेक प्राधिकरण और सामाजिक संगठनों की मदद ली जा सकती है। इस अवसर पर वरिष्ठ नागरिक सुभाष पाहवा, बृजमोहन पंवार, रमाकांत, चमनलाल ग्रोवर, पीसी चैन, जोगिंद्र पाहवा, देशराज सेतिया मौजूद रहे।