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Jind News: सीआरएसयू में विद्यार्थियों को तनाव से दूर रहने के मंत्र बताए
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26जेएनडी35: कार्यक्रम में विद्यार्थियों को तनाव से दूर रहने के लिए जानकारी देते हुए डॉ. संकल्प
संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। सीआरएसयू के कंप्यूटर साइंस एवं एप्लीकेशन विभाग के स्टूडेंट इंडक्शन प्रोग्राम के छठे दिन मनोचिकित्सक संकल्प डोडा ने मानसिक परेशानियों से दूर रहने के लिए जानकारी दी।
इस दौरान चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय के डायरेक्टर स्पोर्ट डॉ. नरेश देशवाल एवं एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। डॉक्टर संकल्प ने बताया कि जीवन में तनाव के बहुत सारे कारण हैं।
जिसमें अपने कार्यस्थल पर खुश न रहना, कार्यस्थल पर शोषण, क्षीण प्रबंधन क्षमता, वित्तीय अथवा अन्य प्रकार की अक्षमता मुख्य हैं। उन्होंने बताया कि तनाव दो प्रकार का होता है। सूक्ष्मकालिक एवं दीर्घकालिक। सूक्ष्मकालिक तनाव छोटी-छोटी परिस्थितियों के कारण होता है, जो कुछ ही घंटे में या एक-दो दिन में समाप्त हो जाता है।
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इसे हम बातचीत करके या ध्यान आदि लगाकर दूर कर सकते हैं। परंतु जो दीर्घकालिक तनाव होता है, वह सेहत के लिए खतरनाक होता है एवं इसके लिए मनोचिकित्सक की सलाह लेना अत्यंत आवश्यक होता है।
किसी व्यक्ति को 14 दिन से अधिक समय तक उदासी अकेलापन आदि महसूस होता हो तो उसे तुरंत मनो चिकित्सक के पास जाना चाहिए, ताकि सही समय पर उसका इलाज हो सके। तनाव के प्रारंभ सिरदर्द, चिड़चिड़ापन आदि होता है। जो बाद में नींद कम आना, किसी भी काम में मन न लगना, सुबह उठने पर थकान महसूस होना आदि की ओर बढ़ जाता है।
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जींद। सीआरएसयू के कंप्यूटर साइंस एवं एप्लीकेशन विभाग के स्टूडेंट इंडक्शन प्रोग्राम के छठे दिन मनोचिकित्सक संकल्प डोडा ने मानसिक परेशानियों से दूर रहने के लिए जानकारी दी।
इस दौरान चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय के डायरेक्टर स्पोर्ट डॉ. नरेश देशवाल एवं एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। डॉक्टर संकल्प ने बताया कि जीवन में तनाव के बहुत सारे कारण हैं।
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जिसमें अपने कार्यस्थल पर खुश न रहना, कार्यस्थल पर शोषण, क्षीण प्रबंधन क्षमता, वित्तीय अथवा अन्य प्रकार की अक्षमता मुख्य हैं। उन्होंने बताया कि तनाव दो प्रकार का होता है। सूक्ष्मकालिक एवं दीर्घकालिक। सूक्ष्मकालिक तनाव छोटी-छोटी परिस्थितियों के कारण होता है, जो कुछ ही घंटे में या एक-दो दिन में समाप्त हो जाता है।
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इसे हम बातचीत करके या ध्यान आदि लगाकर दूर कर सकते हैं। परंतु जो दीर्घकालिक तनाव होता है, वह सेहत के लिए खतरनाक होता है एवं इसके लिए मनोचिकित्सक की सलाह लेना अत्यंत आवश्यक होता है।
किसी व्यक्ति को 14 दिन से अधिक समय तक उदासी अकेलापन आदि महसूस होता हो तो उसे तुरंत मनो चिकित्सक के पास जाना चाहिए, ताकि सही समय पर उसका इलाज हो सके। तनाव के प्रारंभ सिरदर्द, चिड़चिड़ापन आदि होता है। जो बाद में नींद कम आना, किसी भी काम में मन न लगना, सुबह उठने पर थकान महसूस होना आदि की ओर बढ़ जाता है।