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तीसरी लहर से कैसे निपटेंगे, जब कुल पदों के आधे भी डॉक्टर नहीं
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नागरिक अस्पताल जींद। संवाद
- फोटो : Jind
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कोरोना की तीसरी लहर की संभावना जताई जा रही है। यह कभी भी शुरू हो सकती है। इसके लिए नागरिक अस्पताल प्रशासन ने अपनी तरफ से सभी प्रकार की तैयारियां शुरू कर ली हैं, लेकिन आधे से अधिक चिकित्सकों के पद खाली होने के कारण इस बीमारी से लड़ने के लिए नागरिक अस्पताल प्रशासन को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। नागरिक अस्पताल में ईएनटी, नेत्र रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, हृदय रोग विशेषज्ञ के पद कई वर्षों से खाली पड़े हैं। जब भी नागरिक अस्पताल को दिव्यांगता व किसी नौकरी के लिए मेडिकल बोर्ड बैठाना हो तो दूसरों जिलों के विशेषज्ञों पर निर्भर करना पड़ता है। अस्पताल में इस समय 55 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। इनमें से 24 चिकित्सक तथा तीन कंसंलटेंट तैनात हैं। नागरिक अस्पताल में फिलहाल 28 चिकित्सकों के पद खाली पड़े हैं।
जिले में 1975 में नागरिक अस्पताल का निर्माण हुआ था। उस समय यहां पर केवल 25 चिकित्सकों के पद स्वीकृत थे। उस समय भी यहां कभी भी पूरी संख्या में चिकित्सक नहीं रहे। हमेशा अस्पताल में आधे से अधिक चिकित्सकों के पद खाली रहे हैं। अब 2016 में नागरिक अस्पताल की नई बिल्डिंग बन गई और यहां पर बेडों की संख्या 200 हो गई। अब यहां पर 55 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हो गए। इसके बावजूद भी यहां चिकित्सकों की कमी पूरी नहीं हुई। पिछले वर्ष यहां पर 10 चिकित्सकों की नियुक्ति हुई। इसके बाद अस्पताल प्रशासन को कुछ राहत मिली। इससे पहले यहां पर इमरजेंसी वार्ड में भी चिकित्सकों की ड्यूटी लगाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती थी। इस समय नागरिक अस्पताल में 24 चिकित्सक तैनात हैं। इसके अलावा यहां पर तीन कंसलटेंट चिकित्सक भी तैनात किए गए हैं। इनको सेवानिवृत्ति के बाद रखा जाता है। इन चिकित्सकों से इतना काम लिया जाता है, जितना यह आराम से कर सकें। इन तीन कंसलटेंट में से एक चिकित्सक तो हमेशा यहां पर आराम करने के लिए ही आते हैं।
ईएनटी, हृदय रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ व रेडियोलॉजिस्ट नहीं
नागरिक अस्पताल में पांच वर्ष पहले ईएनटी रोहतक से आते थे। इसके बाद उनका यहां से तबादला हो गया। उनके जाने के बाद आज तक यहां किसी भी ईएनटी ने ज्वाइन नहीं किया है। नागरिक अस्पताल में आज तक हृदय रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति ही नहीं हुई है। नेत्र रोग विशेषज्ञ का पद भी नागरिक अस्पताल में पांच वर्ष से खाली पड़ा है। पिछले 15 वर्ष से नागरिक अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। जिस कारण अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए मरीजों को निजी अस्पतालों में अपनी जेब ढीली करनी पड़ती है।
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मेडिकल बोर्ड के लिए दूसरे जिलों से आते हैं चिकित्सक
नागरिक अस्पताल में हर बुधवार को दिव्यांगता सर्टिफिकेट बनाने के लिए मेडिकल बोर्ड लगाया जाता है। इसके लिए ईएनटी कुरुक्षेत्र या कैथल से बुलाए जाते हैं। इसके अलावा नेत्र रोग विशेषज्ञ नरवाना से आते हैं। जब भी इनमें से कोई चिकित्सक नहीं आता है तो मेडिकल बोर्ड में आने वाले मरीजों को मेडिकल कॉलेज अग्रोहा में रेफर करना पड़ता है। इसके अलावा नौकरी ज्वाइन करने से पहले मेडिकल बोर्ड बनवाने आने वाले युवाओं को भी रोहतक पीजीआई या फिर मेडिकल कॉलेज अग्रोहा के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
चिकित्सकों की डिमांड से स्वास्थ्य निदेशालय को अवगत करवाया जाता है। समय-समय पर चिकित्सकों की संख्या व उनकी तैनात व खाली पदों के बारे में रिपोर्ट निदेशालय को भेजी जाती है। जल्द ही नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों की तैनाती हो जाएगी। फिलहाल जितने चिकित्सक हैं, वह मरीजों का बेहतर इलाज कर रहे हैं।
डॉ. मनजीत सिंह, सिविल सर्जन।
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जिले में 1975 में नागरिक अस्पताल का निर्माण हुआ था। उस समय यहां पर केवल 25 चिकित्सकों के पद स्वीकृत थे। उस समय भी यहां कभी भी पूरी संख्या में चिकित्सक नहीं रहे। हमेशा अस्पताल में आधे से अधिक चिकित्सकों के पद खाली रहे हैं। अब 2016 में नागरिक अस्पताल की नई बिल्डिंग बन गई और यहां पर बेडों की संख्या 200 हो गई। अब यहां पर 55 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हो गए। इसके बावजूद भी यहां चिकित्सकों की कमी पूरी नहीं हुई। पिछले वर्ष यहां पर 10 चिकित्सकों की नियुक्ति हुई। इसके बाद अस्पताल प्रशासन को कुछ राहत मिली। इससे पहले यहां पर इमरजेंसी वार्ड में भी चिकित्सकों की ड्यूटी लगाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती थी। इस समय नागरिक अस्पताल में 24 चिकित्सक तैनात हैं। इसके अलावा यहां पर तीन कंसलटेंट चिकित्सक भी तैनात किए गए हैं। इनको सेवानिवृत्ति के बाद रखा जाता है। इन चिकित्सकों से इतना काम लिया जाता है, जितना यह आराम से कर सकें। इन तीन कंसलटेंट में से एक चिकित्सक तो हमेशा यहां पर आराम करने के लिए ही आते हैं।
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ईएनटी, हृदय रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ व रेडियोलॉजिस्ट नहीं
नागरिक अस्पताल में पांच वर्ष पहले ईएनटी रोहतक से आते थे। इसके बाद उनका यहां से तबादला हो गया। उनके जाने के बाद आज तक यहां किसी भी ईएनटी ने ज्वाइन नहीं किया है। नागरिक अस्पताल में आज तक हृदय रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति ही नहीं हुई है। नेत्र रोग विशेषज्ञ का पद भी नागरिक अस्पताल में पांच वर्ष से खाली पड़ा है। पिछले 15 वर्ष से नागरिक अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। जिस कारण अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए मरीजों को निजी अस्पतालों में अपनी जेब ढीली करनी पड़ती है।
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मेडिकल बोर्ड के लिए दूसरे जिलों से आते हैं चिकित्सक
नागरिक अस्पताल में हर बुधवार को दिव्यांगता सर्टिफिकेट बनाने के लिए मेडिकल बोर्ड लगाया जाता है। इसके लिए ईएनटी कुरुक्षेत्र या कैथल से बुलाए जाते हैं। इसके अलावा नेत्र रोग विशेषज्ञ नरवाना से आते हैं। जब भी इनमें से कोई चिकित्सक नहीं आता है तो मेडिकल बोर्ड में आने वाले मरीजों को मेडिकल कॉलेज अग्रोहा में रेफर करना पड़ता है। इसके अलावा नौकरी ज्वाइन करने से पहले मेडिकल बोर्ड बनवाने आने वाले युवाओं को भी रोहतक पीजीआई या फिर मेडिकल कॉलेज अग्रोहा के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
चिकित्सकों की डिमांड से स्वास्थ्य निदेशालय को अवगत करवाया जाता है। समय-समय पर चिकित्सकों की संख्या व उनकी तैनात व खाली पदों के बारे में रिपोर्ट निदेशालय को भेजी जाती है। जल्द ही नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों की तैनाती हो जाएगी। फिलहाल जितने चिकित्सक हैं, वह मरीजों का बेहतर इलाज कर रहे हैं।
डॉ. मनजीत सिंह, सिविल सर्जन।