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Jind News: जन्मजात गंभीर बीमारी वाले बच्चों पर स्वास्थ्य विभाग की विशेष नजर

Mon, 24 Feb 2025 12:16 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Updated Mon, 24 Feb 2025 12:16 AM IST
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Health department's special attention on children with serious congenital diseases
23जेएनडी06: नागरिक अस्पताल के प्र​शिक्षण केंद्र में स्टाफ नर्स को ट्रेनिंग देते हुए डिप्टी सीएम
जींद। स्वास्थ्य विभाग राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जन्म के साथ ही बीमारी वाले बच्चों की स्पेशल स्क्रीनिंग कराई जा रही है। ऐसे बच्चों की शीघ्रता से पहचान कर उन्हें सरकार की ओर से देय मुफ्त सुविधाएं दिलाई जा सकें। इसके लिए नर्स, डिलीवरी स्टाफ को स्पेशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि जब भी बच्चा पैदा होता है। उसके दिल में छेद हो, कमर का फोड़ा हो, कटे होठ हों, पैर टेढे हों की तुरंत प्रभाव से जांच कर इन बच्चों को हरियाणा सरकार की ओर से दी जाने वाली सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
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नागरिक अस्पताल के प्रशिक्षण सेंटर में हर पीएचसी, सीएचसी से एक-एक नर्स और स्टाफ को चुनकर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कई बार बच्चे के जन्म के समय ही दिल का छेद, पैरों का टेढ़ापन, आंखों का भैंगापन, जन्मजात बहरापन, मोतियाबिंद, कटे हुए होठ व तालू की कई तरह की परेशानी होती है। संसाधन उपलब्ध न हो पाने के कारण अभिभावक इन बच्चों का उपचार नहीं करा पाते। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग इन अभिभावकों की मदद करता है और उन्हें मुफ्त उपचार की सुविधा उपलब्ध कराता है। इसको लेकर नर्सिंग स्टाफ को ट्रेनिंग दी गई है, ताकि जब भी ऐसे बच्चों का पता चले तो वह तत्काल उसका रजिस्ट्रेशन नागरिक अस्पताल में कराकर उपचार की सुविधा ले सकें।
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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम राजकीय स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों में समय-समय पर जाकर 18 वर्ष तक के बच्चों के स्वास्थ्य की जांच कर रही है। विभाग की टीम जांच के दौरान कुछ कमी पाए जाने पर नागरिक अस्पताल में भेजती है। इसके अलावा स्वास्थ्य में अधिक परेशानी होने पर पीजीआई चंडीगढ़, रोहतक व मोहाली के निजी अस्पताल में मुफ्त इलाज कराया जाता है। अगर किसी भी 0 से 18 वर्ष तक के बच्चे को जन्मजात रोग जैसे दिल में छेद, कमर में फोड़ा, कटे होंठ, जन्मजात मोतिया, गंभीर खून की कमी, गंभीर कुपोषण व आंखों का भेंगापन होने पर आरबीएसके की टीम से संपर्क कर सकते हैं।
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आरबीएसके के तहत नर्सिंग ऑफिसर, नर्सों को प्रशिक्षण दिया गया है। जब भी बच्चे को कोई दिक्कत हो तो, उसे डीआईसी सेंटर भेजा जाए, ताकि उसकी स्क्रीनिंग करवा कर मुफ्त उपचार की सुविधा दी जा सके। पिछले कई सालों से लगातार दिल के छेद वाले बच्चों के आप्रेशन करवाए गए हैं। इन पर सरकार की ओर से साढ़े तीन करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई है। डीआईसी की पूरी टीम इस कार्य में लगी हुई है।
--डॉ. रमेश पांचाल, डिप्टी सीएमओ नागरिक अस्पताल जींद।
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