{"_id":"671e939336f8858fd70abaab","slug":"farmers-unknowingly-burning-profitable-stubble-dr-raveena-jind-news-c-199-1-sroh1007-124925-2024-10-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"फायदे की पराली को अनजाने में जला रहे किसान : डॉ. रवीना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फायदे की पराली को अनजाने में जला रहे किसान : डॉ. रवीना
Mon, 28 Oct 2024 12:55 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 28 Oct 2024 12:55 AM IST
विज्ञापन
27जेएनडी04: हमेटी में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में पराली प्रबंधन के लिए जागरूक करते हुए डॉ. रवीना
जींद। पराली प्रबंधन को लेकर हमेटी के निदेशक डॉ. कर्मचंद की अध्यक्षता में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें कृषि सेवाओं में कर रहे देसी डिप्लोमा के प्रशिक्षणार्थियों को कृषि यांत्रिकी की प्रोफेसर डॉ. रवीना कारगवाल ने फसल अवशेषों, विशेषकर पराली के प्रबंधन में इस्तेमाल होने वाले बेलर, चॉपर, मल्चर, सुपर सीडर के बारे में जानकारी दी।
डॉ. रवीना ने कहा कि पराली को किसान अनजाने में जलाकर नष्ट कर रहे हैं। यदि वह कृषि यंत्रों की मदद से उसे जमीन में मिलाएं तो वह मिट्टी को ताकतवर बनाती है। इससे मिट्टी में जैविक कार्बन व पौधों के लिए आवश्यक फास्फोरस, पोटाश, सल्फर जैसे तत्वों की मात्रा बढ़ती है। मिट्टी में पानी को सोखकर रखने की क्षमता में बढ़ोतरी होती है। भूमि में मौजूद लाभकारी जीवाणुओं को भोजन उपलब्ध होता है। जो किसान पराली को जलाते हैं वह अपने खेत की मिट्टी को बंजर बना रहे हैं। पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद आवश्यक तत्व, लाभकारी जीवाणु व भूमि का जैविक कार्बन सब जलकर नष्ट हो जाता है।
फैसिलिटेटर डॉ. बीपी राणा ने कहा कि जहां पर धान की कटाई हाथ से की गई है, उन खेतों में फानों को जलाए बगैर जीरो टिलेज मशीन से गेहूं की बिजाई की जा सकती है। इससे गेहूं में उगने वाले मडुंसी जैसे खरपतवारों का भी जमाव नहीं होता। हमेटी के प्रशिक्षक डॉ. सुभाष चंद्र ने कहा कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग हरियाणा किसानों को पराली प्रबंधन के लिए कृषि यंत्र उपलब्ध करवा रहा है। किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन में प्रयोग होने वाले यंत्रों पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया गया है। बेलर से गांठ बनवाने या पराली का चारे के लिए भंडारण करने वाले किसानों को एक्स सीटू स्कीम के तहत एक हजार रुपये प्रति एकड़ की मदद दी जा रही है। पराली जलाने से पर्यावरण में होने वाले अत्यधिक प्रदूषण व भूमि की उर्वरा शक्ति को होने वाले नुकसान की गंभीरता को देखते हुए किसानों पर प्रशासन जुर्माना लगाने के साथ मुकदमें दर्ज करवा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
डॉ. रवीना ने कहा कि पराली को किसान अनजाने में जलाकर नष्ट कर रहे हैं। यदि वह कृषि यंत्रों की मदद से उसे जमीन में मिलाएं तो वह मिट्टी को ताकतवर बनाती है। इससे मिट्टी में जैविक कार्बन व पौधों के लिए आवश्यक फास्फोरस, पोटाश, सल्फर जैसे तत्वों की मात्रा बढ़ती है। मिट्टी में पानी को सोखकर रखने की क्षमता में बढ़ोतरी होती है। भूमि में मौजूद लाभकारी जीवाणुओं को भोजन उपलब्ध होता है। जो किसान पराली को जलाते हैं वह अपने खेत की मिट्टी को बंजर बना रहे हैं। पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद आवश्यक तत्व, लाभकारी जीवाणु व भूमि का जैविक कार्बन सब जलकर नष्ट हो जाता है।
विज्ञापन
फैसिलिटेटर डॉ. बीपी राणा ने कहा कि जहां पर धान की कटाई हाथ से की गई है, उन खेतों में फानों को जलाए बगैर जीरो टिलेज मशीन से गेहूं की बिजाई की जा सकती है। इससे गेहूं में उगने वाले मडुंसी जैसे खरपतवारों का भी जमाव नहीं होता। हमेटी के प्रशिक्षक डॉ. सुभाष चंद्र ने कहा कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग हरियाणा किसानों को पराली प्रबंधन के लिए कृषि यंत्र उपलब्ध करवा रहा है। किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन में प्रयोग होने वाले यंत्रों पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया गया है। बेलर से गांठ बनवाने या पराली का चारे के लिए भंडारण करने वाले किसानों को एक्स सीटू स्कीम के तहत एक हजार रुपये प्रति एकड़ की मदद दी जा रही है। पराली जलाने से पर्यावरण में होने वाले अत्यधिक प्रदूषण व भूमि की उर्वरा शक्ति को होने वाले नुकसान की गंभीरता को देखते हुए किसानों पर प्रशासन जुर्माना लगाने के साथ मुकदमें दर्ज करवा रहा है।

27जेएनडी04: हमेटी में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में पराली प्रबंधन के लिए जागरूक करते हुए डॉ. रवीना
विज्ञापन