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वायु प्रदूषण बढ़ने से नागरिक अस्पताल में बढ़ रही रोगियों की संख्या, बुजुर्ग सबसे ज्यादा
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नागरिक अस्पताल में पंजीकरण खिड़की पर लगी मरीजों की लाइन। संवाद
- फोटो : Jind
जींद। जिले में दीपावली के बाद बढ़े वायु प्रदूषण के कारण नागरिक अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे लोग जो पहले से ही किसी बीमारी से ग्रसित हैं, उनको अधिक परेशानी हो रही है। वायु प्रदूषण का सीधा असर बुजुर्गों को हो रहा है। अस्पताल में इस समय सबसे अधिक ओपीडी चेस्ट एंड टीबी रोग विशेषज्ञ डॉ. विनिता के पास होती है। इसके अलावा पोस्ट कोविड मरीजों की संख्या भी अब अस्पताल में बढ़ने लगी है।
जून में जिले में पोस्ट कोविड मरीजों की संख्या बढ़ते देख अस्पताल प्रशासन ने यहां पर स्पेशल पोस्ट कोविड मरीजों के लिए ओपीडी शुरू की थी। इसे उमंग का नाम दिया गया था। इस ओपीडी में डॉ. सतीश सुलेख व डॉ. आरएस तंवर बैठते थे। उस समय भी प्रतिदिन 70 के आसपास ओपीडी होती थी। धीरे-धीरे पोस्ट कोविड मरीजों की संख्या कम हुई। इसके बाद दोनों ही चिकित्सक अस्पताल से सेवा मुक्त हो गए। बाद में यह ओपीडी नागरिक अस्पताल प्रशासन ने बंद कर दी। अब इन पोस्ट कोविड मरीजों को चेस्ट एंड टीबी रोग विशेषज्ञ डॉ. विनिता देखती हैं। डॉ. विनिता की ओपीडी में दीपावली के बाद प्रतिदिन 80 मरीज आ रहे हैं। इनमें अधिकतर वही मरीज हैं, जो कोरोना से ठीक हो चुके हैं। लेकिन उनकी छाती में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ ही दिक्कत हो जाती है। इन लोगों को सांस लेने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल है जींद
जींद शहर देश में सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में शामिल है। दिवाली के बाद जींद का एक्यूआई 450 के आसपास चल रहा था, लेकिन मंगलवार को इसमें आंशिक गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार हवा चलने से प्रदूषण से राहत मिली है, लेकिन फिर भी यह खतरनाक स्तर पर बना हुआ है।
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बहुत सावधानी बरतने की जरूरत
चेस्ट एंड टीबी रोग विशेषज्ञ डॉ. विनिता ने कहा कि कोरोना काल के दौरान काफी लोग ऐसे थे, जो कोरोना से ठीक तो हो गए लेकिन उनकी छाती में इंफेक्शन काफी दिनों तक रहा। इस कारण इस प्रकार के लोगों के फेफड़े काफी कमजोर हो गए हैं। जरा सी धूल-मिट्टी व वायु प्रदूषण इनको फिर से परेशान कर देता है। ऐसे मरीजों को धूल भरे वातावरण से दूर रहना चाहिए। इन्हें हर समय गर्म पानी पीना चाहिए। घर से बाहर निकलें तो मास्क जरूर लगाएं। इसके अलावा किसी ठंडी चीज से इन्हें बचना चाहिए।
एक सप्ताह में वायु प्रदूषण का स्तर
दिनांक एक्यूआई
तीन नवंबर 261
चार नवंबर 447
पांच नवंबर 462
छह नवंबर 422
सात नवंबर 463
आठ नवंबर 401
नौ नवंबर 403
एसएमओ डॉ. गोपाल गोयल ने बताया कि वायु प्रदूषण के साथ ही अस्पताल में पोस्ट कोविड मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। पहले उमंग ओपीडी में इन मरीजों को देखा जाता था। अब इन मरीजों को चेस्ट एंड टीबी रोग विशेषज्ञ डॉ. विनिता देख रही हैं। वायु प्रदूषण से टीबी मरीजों को भी परेशानी होती है। इसके लिए चिकित्सकों को विशेष हिदायतें दी गई हैं, ताकि इस प्रकार के मरीजों को कोई परेशानी नहीं हो।
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जून में जिले में पोस्ट कोविड मरीजों की संख्या बढ़ते देख अस्पताल प्रशासन ने यहां पर स्पेशल पोस्ट कोविड मरीजों के लिए ओपीडी शुरू की थी। इसे उमंग का नाम दिया गया था। इस ओपीडी में डॉ. सतीश सुलेख व डॉ. आरएस तंवर बैठते थे। उस समय भी प्रतिदिन 70 के आसपास ओपीडी होती थी। धीरे-धीरे पोस्ट कोविड मरीजों की संख्या कम हुई। इसके बाद दोनों ही चिकित्सक अस्पताल से सेवा मुक्त हो गए। बाद में यह ओपीडी नागरिक अस्पताल प्रशासन ने बंद कर दी। अब इन पोस्ट कोविड मरीजों को चेस्ट एंड टीबी रोग विशेषज्ञ डॉ. विनिता देखती हैं। डॉ. विनिता की ओपीडी में दीपावली के बाद प्रतिदिन 80 मरीज आ रहे हैं। इनमें अधिकतर वही मरीज हैं, जो कोरोना से ठीक हो चुके हैं। लेकिन उनकी छाती में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ ही दिक्कत हो जाती है। इन लोगों को सांस लेने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल है जींद
जींद शहर देश में सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में शामिल है। दिवाली के बाद जींद का एक्यूआई 450 के आसपास चल रहा था, लेकिन मंगलवार को इसमें आंशिक गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार हवा चलने से प्रदूषण से राहत मिली है, लेकिन फिर भी यह खतरनाक स्तर पर बना हुआ है।
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बहुत सावधानी बरतने की जरूरत
चेस्ट एंड टीबी रोग विशेषज्ञ डॉ. विनिता ने कहा कि कोरोना काल के दौरान काफी लोग ऐसे थे, जो कोरोना से ठीक तो हो गए लेकिन उनकी छाती में इंफेक्शन काफी दिनों तक रहा। इस कारण इस प्रकार के लोगों के फेफड़े काफी कमजोर हो गए हैं। जरा सी धूल-मिट्टी व वायु प्रदूषण इनको फिर से परेशान कर देता है। ऐसे मरीजों को धूल भरे वातावरण से दूर रहना चाहिए। इन्हें हर समय गर्म पानी पीना चाहिए। घर से बाहर निकलें तो मास्क जरूर लगाएं। इसके अलावा किसी ठंडी चीज से इन्हें बचना चाहिए।
एक सप्ताह में वायु प्रदूषण का स्तर
दिनांक एक्यूआई
तीन नवंबर 261
चार नवंबर 447
पांच नवंबर 462
छह नवंबर 422
सात नवंबर 463
आठ नवंबर 401
नौ नवंबर 403
एसएमओ डॉ. गोपाल गोयल ने बताया कि वायु प्रदूषण के साथ ही अस्पताल में पोस्ट कोविड मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। पहले उमंग ओपीडी में इन मरीजों को देखा जाता था। अब इन मरीजों को चेस्ट एंड टीबी रोग विशेषज्ञ डॉ. विनिता देख रही हैं। वायु प्रदूषण से टीबी मरीजों को भी परेशानी होती है। इसके लिए चिकित्सकों को विशेष हिदायतें दी गई हैं, ताकि इस प्रकार के मरीजों को कोई परेशानी नहीं हो।