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Jind News: फाल्गुन अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने किया पिंडदान
Fri, 28 Feb 2025 01:21 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 28 Feb 2025 01:21 AM IST
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27जेएनडी10: मेले में खरीददारी करते हुए श्रद्धालु। संवाद
जींद। पांडु पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर वीरवार को फाल्गुन अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान करने के बाद पिंडदान किया। ऐतिहासिक पिंडतारक तीर्थ पर बुधवार शाम को श्रद्धालु पहुंचना शुरू हो गए थे और पूरी रात धर्मशालाओं में सत्संग और कीर्तन का आयोजन चलता रहा। वीरवार को अल सुबह से ही श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान और पिंडदान शुरू कर दिया जो मध्यांह के बाद तक चलता रहा। इस मौके पर दूर दराज से आएं श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया और सूर्यदेव को जलार्पण करके सुख-समृद्धि की कामना की।
मेले में श्रद्धालुओं ने जमकर की खरीददारी
पिंडारा तीर्थ पर फाल्गुन अमावस्या पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने जमकर खरीदारी की। तीर्थ पर जगह-जगह लोगों ने सामान बेचने के लिए फड़े लगाई हुई थी। जिस पर बच्चों और महिलाओं ने खरीदारी की। बच्चों ने जहां अपने लिए खिलौने खरीदे तो वहीं बड़ों ने भी घर के लिए सामान खरीदे। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पिंडारा तीर्थ पर पुलिस कर्मियों को लगाया गया था।
-- -क्या है महत्व
पिंडतारक तीर्थ के संबंध में किंवदंती है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की। बाद में सोमवती अमावस्या के आने पर युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। तभी से यह माना जाता है कि पांडु पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है। महाभारत काल से ही पितृ विसर्जन की अमावस्या, विशेषकर सोमवती अमावस्या पर यहां पिंडदान करने का विशेष महत्व है। यहां पिंडदान करने के लिए विभिन्न प्रांतों के लोग श्रद्धालु आते हैं।
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प्राचीन भूतेश्वर मंदिर के पुजारी महेश शांडिल्य ने बताया कि फाल्गुन मास की अमावस्या को शिव खप्पर पूजा करने का विधान है। यह पूजा दुखों को नष्टकर सुखमय जीवन जीने की एक आध्यात्मिक पद्धति है। इस दिन पूरे विधि विधान से पूजा पाठ करने से भगवान शिव और माता पार्वती प्रसन्न होते हैं। जिससे दरिद्रता का नाश होता है। दुख खत्म होते हैं और उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
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मेले में श्रद्धालुओं ने जमकर की खरीददारी
पिंडारा तीर्थ पर फाल्गुन अमावस्या पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने जमकर खरीदारी की। तीर्थ पर जगह-जगह लोगों ने सामान बेचने के लिए फड़े लगाई हुई थी। जिस पर बच्चों और महिलाओं ने खरीदारी की। बच्चों ने जहां अपने लिए खिलौने खरीदे तो वहीं बड़ों ने भी घर के लिए सामान खरीदे। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पिंडारा तीर्थ पर पुलिस कर्मियों को लगाया गया था।
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पिंडतारक तीर्थ के संबंध में किंवदंती है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की। बाद में सोमवती अमावस्या के आने पर युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। तभी से यह माना जाता है कि पांडु पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है। महाभारत काल से ही पितृ विसर्जन की अमावस्या, विशेषकर सोमवती अमावस्या पर यहां पिंडदान करने का विशेष महत्व है। यहां पिंडदान करने के लिए विभिन्न प्रांतों के लोग श्रद्धालु आते हैं।
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प्राचीन भूतेश्वर मंदिर के पुजारी महेश शांडिल्य ने बताया कि फाल्गुन मास की अमावस्या को शिव खप्पर पूजा करने का विधान है। यह पूजा दुखों को नष्टकर सुखमय जीवन जीने की एक आध्यात्मिक पद्धति है। इस दिन पूरे विधि विधान से पूजा पाठ करने से भगवान शिव और माता पार्वती प्रसन्न होते हैं। जिससे दरिद्रता का नाश होता है। दुख खत्म होते हैं और उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

27जेएनडी10: मेले में खरीददारी करते हुए श्रद्धालु। संवाद

27जेएनडी10: मेले में खरीददारी करते हुए श्रद्धालु। संवाद