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Jind News: शहर की सड़कों पर रात के अंधेरे में मौत बनकर घूम रहे बेसहारा पशु

Sat, 23 Nov 2024 02:09 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 23 Nov 2024 02:09 AM IST
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Destitute animals roaming like death in the dark of night on the streets of the city
22जेएनडी31: सड़क पर गोवंश का रात को प्रकोप। संवाद
जींद। शहर की सड़कों पर रात के अंधेरे में घूम रहे 2500 बेसहारा गाेवंश मौत का साया बने हुए हैं। इनसे वाहन चालकों को मुक्ति दिलवाने के लिए नगर परिषद ने प्रथम चरण में गाय को पकड़ने का अभियान शुरू किया है। इसके बाद सांड पकड़ने के लिए दिसंबर में दूसरा चरण शुरू होगा।
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पहले चरण में गाय को पकड़कर श्री गोशाला में छोड़ने का काम शुक्रवार से ही शुरू हुआ है। गाय को नंदीशालाओं ने छोड़ने से एक तो सड़क हादसों की संख्या में कमी आएगी। दूसरी तरफ सर्दी में गाय भी बीमार होने से बचेगी। दूसरी तरफ सर्दी और धुंध में होने वाले हादसों को रोका जा सकेगा। नगर परिषद ने विधानसभा चुनाव से पहले एक बार बेसहारा पशुओं को पकड़ने का अभियान शुरू किया था, लेकिन चुनाव के दौरान यह अभियान रुक गया।
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इसके बाद अब तक इसकी संभाल नहीं की गई। पिछले एक सप्ताह पहले धुंध के समय इन पशुओं के कारण वाहन चालकों को जान जोखिम में डालकर चलना पड़ा। धुंध में सड़कों पर बेसहारा पशु दिखाई नहीं देने के कारण वाहन चालकों को ज्यादा डर रहता है। अब सर्दी के समय धुंध में बेसहारा पशुओं के कारण होने वाले हादसों को रोकने के लिए नगर परिषद ने गाय को पकड़ने का अभियान शुरू किया है। पहले दिन लगभग 20 गाय को गोशाला में पहुंचाया गया।
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आसपास के क्षेत्रों से छोड़े जा रहे गोवंश
नगर परिषद ने कई बार अभियान चलाकर गोवंश को पकड़कर नंदीशाला में छोड़ा है, लेकिन जींद की सीमा से सटे दूसरे क्षेत्रों से गोवंश को शहर के नजदीक छोड दिया जाता है। इसके कारण आए दिन गोवंश की संख्या शहर में ज्यादा बढ़ रही है। इनको रोकने के लिए भी प्रशासन के पास कोई व्यवस्था नहीं है।
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सभी गोशालाओं को गाय रखने के लिए लिखा पत्र
नगर परिषद ने जिले में चल रही सभी गोशालाओं को पत्र लिखकर सड़कों पर घूम रही गाय को रखने के लिए कहा है। इन गोशालाओं में पहले चरण में गाय को रखा जाएगा। इसमें श्रीगोशाला की तरफ से नगर परिषद को गाय रखने के लिए सहमति जताकर पत्र लिखा है। इसके बाद दूसरी गोशालाओं में गाय को रखा जाएगा।
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चारे की कमी बताकर गोवंश को रखने से किया था मना
छह महीने पहले नंदीशाला और गोशालाओं ने चारे और अन्य व्यवस्था की कमी का हवाला देकर बेसहारा गोवंश लेने से मना कर दिया था। इसके चलते गोवंश को पकड़ने का अभियान रुक गया था।
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सरकार की तरफ से पहले गोशालाओं को प्रति गोवंश 150 रुपये सालाना दिए जाते थे, जो बाद में 300 रुपये कर दिए गए थे, लेकिन इस राशि से एक पशु के लिए दस दिन के चारे की भी व्यवस्था नहीं हो सकती थी।
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रात में झुंड बनाकर सड़क पर बैठ जाते हैं गोवंश
शहर में बेसहारा गोवंशों की संख्या बढ़ रही है। रात को गोवंश सड़कों पर झुंड बनाकर बैठ जाते हैं। बरसात का मौसम होने के कारण मच्छर से बचने के लिए यह कॉलोनियों से निकलकर मुख्य मार्गों पर आ जाते हैं। इसकी वजह से हादसा होने का डर रहता है।

वर्जन
गोवंश को नंदीशाला में छोड़ने का अभियान शुरू कर दिया है। पहले दिन 20 गोवंश को छोड़ा है। शनिवार से अभियान को तेज किया जाएगा, ताकि सर्दी के मौसम में धुंध के कारण होने वाले हादसों को रोका जा सके। इसके अलावा गोवंश भी सुरक्षित रहेगा।
-ऋषिकेश चौधरी, ईओ, नगर परिषद, जींद।
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