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Jind News: नागरिक अस्पताल की फायर सेफ्टी रामभरोसे, दो भवन, हजारों मरीज-तीमारदार और तीनों शिफ्टों में एक फायरमैन

Mon, 31 Aug 2026 12:17 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 31 Aug 2026 12:17 AM IST
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Civil Hospital's fire safety is left to God's mercy, with two buildings, thousands of patients and attendants, and one fireman in all three shifts.
30जेएनडी31: नागरिक अस्पताल में खाली सिलिंडरों को रिफिल करवाने के लिए लेकर जाते हुए कर्मी। संवा
जींद। नागरिक अस्पताल में फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर गंभीर स्थिति बनी हुई है। अस्पताल के दो भवनों में प्रतिदिन करीब 1800 मरीजों की ओपीडी होती है। हजारों की संख्या में तीमारदारों की मौजूदगी रहती है लेकिन आगजनी जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए तीनों शिफ्टों में महज एक फायरमैन तैनात है। ऐसे में अस्पताल की फायर सेफ्टी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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फायरमैन की ओर से अस्पताल प्रशासन से अतिरिक्त स्टाफ उपलब्ध करवाने की मांग कई बार की जा चुकी है लेकिन अभी तक पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो पाई है।
अस्पताल के दोनों भवनों में अलग-अलग वार्ड और स्वास्थ्य सेवाएं संचालित होने के कारण यहां लगातार मरीजों और तीमारदारों की आवाजाही रहती है। ऐसी स्थिति में एक ही फायरमैन के लिए पूरे परिसर में किसी आपात स्थिति को संभालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
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उपकरण रखने के लिए भी उचित जगह नहीं
अस्पताल में फायर सेफ्टी उपकरणों और फायरमैन के लिए अलग से उचित कमरे की व्यवस्था भी नहीं है। फायर से संबंधित उपकरणों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से रखने के लिए स्थान उपलब्ध करवाने की मांग भी अस्पताल प्रशासन के समक्ष कई बार रखी जा चुकी है। समस्या जस की तस बनी हुई है। अस्पताल के दोनों भवनों में मरीजों की लगातार आवाजाही रहती है।
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अस्पताल को अब तक नहीं मिली फायर एनओसी
नागरिक अस्पताल की फायर सेफ्टी व्यवस्था से जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अस्पताल भवन को अभी तक फायर एनओसी नहीं मिली है। इतनी बड़ी संख्या में मरीजों और तीमारदारों की मौजूदगी वाले अस्पताल भवन के लिए फायर सुरक्षा के सभी मानकों को पूरा करना जरूरी है। एनओसी नहीं होने के कारण अस्पताल की फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। बीते सप्ताह अस्पताल में एक्सपायर हो चुके गैस सिलिंडरों को बदल दिया गया है। खाली सिलिंडरों को दोबारा रिफिल करवाने के लिए भेजा गया है। इससे अस्पताल में गैस सिलिंडरों से जुड़े जोखिम को कम करने की दिशा में कदम उठाया गया है लेकिन फायर सेफ्टी के लिए पर्याप्त स्टाफ, उपकरणों के सुरक्षित रखरखाव और फायर एनओसी जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं पूरी करना भी जरूरी है।

वर्जन
अस्पताल में फायर एनओसी के लिए काम चल रहा है।दोनों भवनों में फायर एनओसी लेने के लिए अधिकतर काम पूरा हो चुका है। आगामी कुछ समय में लोक निर्माण विभाग की तरफ से एनओसी दी जानी है। यह काम पूरा होने के बाद मिलेगी। इसके लिए लोक निर्माण विभाग को पत्र लिखा जा चुका है। इसके अलावा अस्पताल में कार्यरत कर्मियों को समय समय पर फायर उपकरणों को चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। -डॉ. रघुवीर पूनिया, पीएमओ नागरिक अस्पताल जींद।
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