फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jind News ›   Chaudhary Daleram was the special of Netaji Subhash Chandra Bose

जींद: नेताजी सुभाष चंद्र बोस के खास थे चौधरी दलेराम, आजाद हिंद फौज के सैनिक रहे छात्तर गांव के दीवान सिंह

Sun, 23 Jan 2022 05:29 PM IST
भूपेंद्र सिंह सतीश जागलान, संवाद न्यूज एजेंसी, जींद (हरियाणा)
सतीश जागलान, संवाद न्यूज एजेंसी, जींद (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sun, 23 Jan 2022 05:29 PM IST
सार

चौधरी दलेराम छह साल बाद जब गांव लौटे तो ग्रामीणों ने फूलमालाओं से स्वागत किया था। एक जून 1940 को ब्रिटिश सेना में शामिल हुए थे। 15 फरवरी 1942 में लेफ्टिनेंट के पद पर नेताजी की आईएनए में शामिल हुए थे।

विज्ञापन
Chaudhary Daleram was the special of Netaji Subhash Chandra Bose
चौधरी दलेराम और दीवान सिंह का फाइल फोटो।  - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हरियाणा के जींद जिले के गांव जलालपुर कलां निवासी चौधरी दलेराम छह साल से गांव से लाता थे। ग्रामीण उन्हें मरा मान चुके थे। तभी एक दिन दलेराम लौट आए और उन्होंने बताया कि वह नेताजी की सेना आईएनए में काम करके लौटे हैं। यह सुनकर ग्रामीणों का सीन चौड़ा हो गया और उन्हें दलेराम का ढोल नगाड़ों और फूलमालाओं ने से भव्य स्वागत किया। चौधरी दलेराम को कई बार प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों ने सम्मानित भी किया। ग्रामीणों ने उनके नाम पर गांव की किसी संस्था का नाम रखने की सरकार से मांग की है।

विज्ञापन


चौधरी दलेराम के बेटे सुरेंद्र जागलान ने बताया कि उनके पिता एक जून 1940 को ब्रिटिश सेना में भर्ती हुए थे। इसके बाद उनके पिता 1941 में सिंघापुरा गए और कर्नल मोहन सिंह के नेतृत्व में 15 फरवरी 1942 को वह आईएनए (आजाद हिंद फौज) में शामिल हो गए। 1942 में ही उनकी नेताजी सुभाषचंद्र बोस से मुलाकात हुई।
विज्ञापन


नेताजी नेे उनकी काबलियत को देखते हुए उन्हें आजाद ब्रिगेड प्रथम नंबर 670 में लेफ्टिनेंट बना दिया। इसके बाद वह नेताजी के खास हो गए। काफी दिन बाद वह नेताजी के साथ कई स्थानों पर घूमे। इसके बाद उन्हें अंग्रेजों ने पकड़ लिया था। आजाद हिंद फौज को अंग्रेजों ने व्हाइट, ग्रे व ब्लैक तीन भागों में बांटा। व्हाइट व ग्रे में शामिल लोगों ने कहा कि वह किसी के बुलाने के बाद सेना में भर्ती हुए थे जबकि ब्लैक भाग के लोगों ने कहा कि वह भारत को आजाद करवाने के लिए सेना में भर्ती हुए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


चौधरी दलेराम को मिला ताम्रपत्र। संवाद
चौधरी दलेराम इसी ब्लैक भाग में शामिल थे। इसके बाद उन्हें रंगून जेल में भेज दिया। रंगून जेल से उन्हें जिगर कच्छा जेल भेजा गया। बाद में उन्हें मुलतान जेल में भेजा गया। इसके बाद भोला भाई देसाई व पंडित जवाहरलाल के प्रयासों से इन्हें 25 फरवरी 1946 को मुलतान जेल से रिहा किया गया। 

घर के लोग समझे हो चुकी है मौत 

सुरेंद्र जागलान ने बताया कि उनके पिता चौधरी दलेराम 1940 में घर से गए थे लेकिन इसके बाद उनसे कोई संपर्क नहीं हुआ। अचानक ही छह साल बाद जब वह घर लौटे तो ग्रामीणों को पता चला कि वह तो आजाद हिंद फौज में थे। इसके बाद ग्रामीणों ने ढोल नगाड़ों के साथ उनका जोरदार स्वागत किया। 

कई प्रधानमंत्रियों व मुख्यमंत्रियों ने किया सम्मानित

चौधरी दलेराम को आजादी के बाद प्रधानमंत्रियों व मुख्यमंत्रियों ने ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया। 1972 में उन्हें प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सम्मानित किया। 1986 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने भी उन्हें सम्मानित किया। 1988 में मुख्यमंत्री चौधरी देवीलाल, 1991 में चौधरी भजनलाल और 1996 में चौधरी बंसीलाल ने उन्हें सम्मानित किया। 

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा चौधरी दलेराम को दिया गया ताम्रपत्र। संवाद

आजादी के दिन ही हुआ आजादी के मतवाले का निधन

भारत देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था। चौधरी दलेराम का निधन 15 अगस्त 1996 को 76 साल की आयु में हुआ। पूरे राजकीय सम्मान के साथ इस आजादी के मतलवाले का अंतिम संस्कार किया गया। चौधरी दलेराम स्वतंत्रता सेनानी संगठन के 12 साल तक जिला प्रधान भी रहे। उन्होंने संगठन का प्रधान रहते हुए जिले के लगभग 35 लोगों की पेंशन शुरू करवाई। आज भी ग्रामीण उनका नाम बड़े सम्मान व गर्व के साथ लेते हैं।

आजाद हिंद फौज के सैनिक रहे छात्तर गांव के दीवान सिंह 

उचाना। गांव छात्तर ने देश और प्रदेश को इतने वीर सपूत दिए हैं, जिनका देश की स्वतंत्रता अतुल्य योगदान रहा है। गांव छात्तर निवासी दिवान सिंह आजाद हिंद फौज में सैनिक के पद पर रहे। दिवान सिंह के बेटे ईश्वर व पोते सतीश कुमार ने कहा कि हिंद फौज के छात्तर गांव सिपाही दीवान सिंह ने देश की आजादी में योगदान देने के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आजाद हिंद फौज में शामिल होने के लिए महान स्वतंत्रता सेनानी दिए।

इस गांव के जांबाजों ने जान पर खेलकर पहले अंग्रेजों की नाक में दम किया और फिर आजादी के बाद पाकिस्तानी फौज को मुंहतोड़ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह ऐसा गांव है जहां देश को स्वतंत्रता दिलाने को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में सैनिकों ने गठित आजाद हिंद फौज में भर्ती होकर संघर्ष किया। उनके बेटे ईश्वर ने कहा कि मेरे पिता ने जो आजाद हिंद फौज का सन 1939 में जो मेडल मिला था वह आज भी मेरे पास सुरक्षित है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed