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Jind News: पूर्व मंत्री की फर्जी वसीयत तैयार कर संपति हड़पने पर पुत्रवधू समेत तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज
Thu, 18 Jul 2024 01:01 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Thu, 18 Jul 2024 01:01 AM IST
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नरवाना। पूर्व मंत्री एवं पूर्व सांसद की फर्जी वसीयत तैयार करवा प्रोपर्टी हड़पने पर शहर थाना नरवाना पुलिस ने पुत्रवधू समेत तीन लोगों के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग कर धोखाधड़ी करने के आरोप में मामला दर्ज किया है।
पेप्सू (पटियाला और पूर्वी पंजाब राज्य संघ) सरकार में मंत्री एवं पूर्व सांसद रहे इंद्रसिंह के बेटे मेजर जनरल अनिल चौधरी, उनके भाई सत्यरूप सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनके पिता इंद्र सिंह 1952 में पेप्सू सरकार में मंत्री तथा 1977 में सांसद भी रहे हैं। उनकी नरवाना समेत अन्य स्थानों पर संपत्ति थी। उन्होंने अपनी जीवनकाल में अपनी चल-अचल संपत्ति की कोई वसीयत नहीं की। 26 नवंबर 2000 को उनकी मौत होने के बाद उनके वारिसान में बराबर संपत्ति बांट दी गई थी। उनके पिता इंद्र सिंह के नाम नरवाना में 1551 वर्ग गज का मकान है। इसमें सभी का बराबर का हिस्सा है। जनवरी 2022 में सभी छह वारिस ने बंटवारे की याचिका दायर की। इस पर वारिसान राजबाला ने आठ मई 2023 जवाब दावा पेश किया। इसमें वसीयत को कोई जिक्र नहीं था। गत चार मार्च को राजबाला ने अदालत में दावा किया कि 15 फरवरी 2000 को उनके ससुर इंद्र सिंह ने अपनी जमीन की वसीयत उनके नाम की थी। दावे में प्रस्तुत की गई वसीयत 16 जनवरी 2023 को रजिस्टर्ड करवाई गई है, जबकि उनके पिता इंद्र सिंह की मौत वर्ष 2000 में हो चुकी थी। वसीयत पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं। जमीन हड़पने के लिए फर्जीवाड़े का सहारा लिया गया है। शहर थाना के जांच अधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि पुलिस ने मेजर जनरल अनिल चौधरी की शिकायत पर पटेल नगर निवासी राजबाला, गांव तारखां निवासी महा सिंह, गांव मैंगलपुर निवासी सतबीर के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी कागजातों का सहारा लेने समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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पेप्सू (पटियाला और पूर्वी पंजाब राज्य संघ) सरकार में मंत्री एवं पूर्व सांसद रहे इंद्रसिंह के बेटे मेजर जनरल अनिल चौधरी, उनके भाई सत्यरूप सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनके पिता इंद्र सिंह 1952 में पेप्सू सरकार में मंत्री तथा 1977 में सांसद भी रहे हैं। उनकी नरवाना समेत अन्य स्थानों पर संपत्ति थी। उन्होंने अपनी जीवनकाल में अपनी चल-अचल संपत्ति की कोई वसीयत नहीं की। 26 नवंबर 2000 को उनकी मौत होने के बाद उनके वारिसान में बराबर संपत्ति बांट दी गई थी। उनके पिता इंद्र सिंह के नाम नरवाना में 1551 वर्ग गज का मकान है। इसमें सभी का बराबर का हिस्सा है। जनवरी 2022 में सभी छह वारिस ने बंटवारे की याचिका दायर की। इस पर वारिसान राजबाला ने आठ मई 2023 जवाब दावा पेश किया। इसमें वसीयत को कोई जिक्र नहीं था। गत चार मार्च को राजबाला ने अदालत में दावा किया कि 15 फरवरी 2000 को उनके ससुर इंद्र सिंह ने अपनी जमीन की वसीयत उनके नाम की थी। दावे में प्रस्तुत की गई वसीयत 16 जनवरी 2023 को रजिस्टर्ड करवाई गई है, जबकि उनके पिता इंद्र सिंह की मौत वर्ष 2000 में हो चुकी थी। वसीयत पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं। जमीन हड़पने के लिए फर्जीवाड़े का सहारा लिया गया है। शहर थाना के जांच अधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि पुलिस ने मेजर जनरल अनिल चौधरी की शिकायत पर पटेल नगर निवासी राजबाला, गांव तारखां निवासी महा सिंह, गांव मैंगलपुर निवासी सतबीर के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी कागजातों का सहारा लेने समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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