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400 शाखाओं पर पांच हजार कर्मचारी रहे कार्य से विमुख
ब्यूरो/अमर उजाला, जींद
Updated Thu, 13 Nov 2014 12:50 AM IST
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वेतन वृद्धि सहित अन्य मांगों को लेकर जिले भर के बैंक कर्मचारी और अधिकारी बुधवार को हड़ताल पर रहे। इससे जिले भर की 400 से अधिक शाखाओं में जहां करीब 150 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ, वहीं करीब 70 करोड़ रुपये के चेकों की क्लीयरेंस भी बाधित रही।
अपनी मांगों को लेकर बैंक कर्मचारी सुबह सफीदों गेट स्थित स्टेट बैंक ऑफ पटियाला की शाखा पर एकत्रित हुए और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बैंक कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि दिल्ली में इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) के साथ बातचीत में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन (यूएफबीयू) ने लचीला रवैया अपनाया, लेकिन एसोसिएशन अपनी जिद पर अड़ी रही। यही कारण है कि बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों को हड़ताल का फैसला लेना पड़ा है।
ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर एसोसिएशन के जिला प्रभारी रणवीर सिंह के अनुसार बैंक यूनियन और सरकार के बीच हर पांच साल में समझौता होता है। पिछली बार एक जनवरी 2012 को समझौता होना चाहिए था, लेकिन सरकार ने नहीं किया। ऐसे में यह समझौता दो साल की देरी से चल रहा है।
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उन्होंने बताया कि बैंक कर्मचारियों की मांग 25 प्रतिशत वेतन वृद्धि की थी और आईबीए के साथ बातचीत में बैंक कर्मचारी 23 प्रतिशत तक आ गए, लेकिन आईबीए 11 प्रतिशत से ऊपर नहीं बढ़ी। इसके अलावा आउटसोर्सिंग से कर्मचारियों की भर्ती करने, बैंकों का विलय करने और निजी बैंकों को लाइसेंस देने के विरोध में भी हड़ताल रखी गई।
निजी बैंकों से चला काम
सार्वजनिक बैंकों की हड़ताल होने के कारण लोगों ने निजी बैंकों की शरण ली। इसके चलते निजी बैंकों में अन्य दिनों के मुकाबले अधिक भीड़ रही। विशेषकर पैसे जमा करवाने वाले कारोबारियों ने हड़ताल के कारण निजी बैंकों में ही पैसे जमा करवाए।
अटके चैक और ट्रांसफर
हड़ताल के चलते बैंकों में जमा करवाए गए चेक क्लीयर नहीं होने से लोगों के करोड़ों रुपये बैंकों में फंस गए। चेक क्लीयर नहीं होने से उपभोक्ताओं के अपने काम भी बाधित हुए।
नहीं भरी गई फीस
नौकरी के लिए चालान फीस स्टेट बैंक ऑफ पटियाला में भरनी थी। बड़ी मुश्किल से समय निकालकर इस काम के लिए आया, लेकिन हड़ताल के कारण फीस जमा नहीं हो सकी। पूरा दिन खराब हो गया। -सुमित, विजय नगर
नहीं निकला कैश
मुझे पैसे की बहुत जरूरत है और कैश निकलवाने के लिए बैंक शाखा आया हूं लेकिन अब यहां आकर पता चला कि हड़ताल है। सारी योजना धरी रह गई। -ओमप्रकाश, शिव कॉलोनी
नहीं मिली पेंशन
मैं सेना से सेवानिवृत्त हूं और पेंशन लेने के लिए आया हूं, बैंक की हड़ताल होने के कारण पेंशन नहीं मिल सकी। इससे घर के अन्य काम भी बाधित हुए और दोबारा से आना पड़ेगा। -लखमी, सिंधवीखेड़ा
पत्नी के इलाज में आई बाधा
पत्नी का इलाज करवाने के लिए गांव से आया था, लेकिन बैंक की हड़ताल होने के कारण पैसे नहीं मिले और पत्नी का इलाज भी नहीं हो सका। - लखी, ग्रामीण चौकीदार निडानी
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अपनी मांगों को लेकर बैंक कर्मचारी सुबह सफीदों गेट स्थित स्टेट बैंक ऑफ पटियाला की शाखा पर एकत्रित हुए और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बैंक कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि दिल्ली में इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) के साथ बातचीत में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन (यूएफबीयू) ने लचीला रवैया अपनाया, लेकिन एसोसिएशन अपनी जिद पर अड़ी रही। यही कारण है कि बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों को हड़ताल का फैसला लेना पड़ा है।
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ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर एसोसिएशन के जिला प्रभारी रणवीर सिंह के अनुसार बैंक यूनियन और सरकार के बीच हर पांच साल में समझौता होता है। पिछली बार एक जनवरी 2012 को समझौता होना चाहिए था, लेकिन सरकार ने नहीं किया। ऐसे में यह समझौता दो साल की देरी से चल रहा है।
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उन्होंने बताया कि बैंक कर्मचारियों की मांग 25 प्रतिशत वेतन वृद्धि की थी और आईबीए के साथ बातचीत में बैंक कर्मचारी 23 प्रतिशत तक आ गए, लेकिन आईबीए 11 प्रतिशत से ऊपर नहीं बढ़ी। इसके अलावा आउटसोर्सिंग से कर्मचारियों की भर्ती करने, बैंकों का विलय करने और निजी बैंकों को लाइसेंस देने के विरोध में भी हड़ताल रखी गई।
निजी बैंकों से चला काम
सार्वजनिक बैंकों की हड़ताल होने के कारण लोगों ने निजी बैंकों की शरण ली। इसके चलते निजी बैंकों में अन्य दिनों के मुकाबले अधिक भीड़ रही। विशेषकर पैसे जमा करवाने वाले कारोबारियों ने हड़ताल के कारण निजी बैंकों में ही पैसे जमा करवाए।
अटके चैक और ट्रांसफर
हड़ताल के चलते बैंकों में जमा करवाए गए चेक क्लीयर नहीं होने से लोगों के करोड़ों रुपये बैंकों में फंस गए। चेक क्लीयर नहीं होने से उपभोक्ताओं के अपने काम भी बाधित हुए।
नहीं भरी गई फीस
नौकरी के लिए चालान फीस स्टेट बैंक ऑफ पटियाला में भरनी थी। बड़ी मुश्किल से समय निकालकर इस काम के लिए आया, लेकिन हड़ताल के कारण फीस जमा नहीं हो सकी। पूरा दिन खराब हो गया। -सुमित, विजय नगर
नहीं निकला कैश
मुझे पैसे की बहुत जरूरत है और कैश निकलवाने के लिए बैंक शाखा आया हूं लेकिन अब यहां आकर पता चला कि हड़ताल है। सारी योजना धरी रह गई। -ओमप्रकाश, शिव कॉलोनी
नहीं मिली पेंशन
मैं सेना से सेवानिवृत्त हूं और पेंशन लेने के लिए आया हूं, बैंक की हड़ताल होने के कारण पेंशन नहीं मिल सकी। इससे घर के अन्य काम भी बाधित हुए और दोबारा से आना पड़ेगा। -लखमी, सिंधवीखेड़ा
पत्नी के इलाज में आई बाधा
पत्नी का इलाज करवाने के लिए गांव से आया था, लेकिन बैंक की हड़ताल होने के कारण पैसे नहीं मिले और पत्नी का इलाज भी नहीं हो सका। - लखी, ग्रामीण चौकीदार निडानी