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Jind News: नौ दिन बाद जगजीत सिंह डल्लेवाल को ड्रिप लगाना दोबारा से की गई है शुरू

Tue, 25 Feb 2025 12:21 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Updated Tue, 25 Feb 2025 12:21 AM IST
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After nine days, drip treatment of Jagjit Singh Dallewal has been started again
24जेएनडी24-जगजीत सिंह डल्लेवाल को ड्रिप लगाते हुए डॉक्टर। स्रोत किसान
नरवाना। खनौरी बॉर्डर किसान मोर्चे पर 91वें दिन किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का आमरण अनशन जारी रहा। सोमवार को नौ दिन बाद जगजीत सिंह डल्लेवाल की ड्रिप दोबारा शुरू करी गई है, जो नस बंद होने के कारण 14 फरवरी से बंद थी। किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक), किसान मजदूर मोर्चा के 28 प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के मंत्रियों के बीच हुई बातचीत के बारे में कुछ नेता गलत बयानबाजी कर रहे हैं जो उस मीटिंग का हिस्सा ही नहीं थे।
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कोहाड़ ने बताया कि नेताओं ने स्पष्ट किया कि उन्होंने केंद्र सरकार के साथ बैठक में कहा है कि देश के सभी किसानों की 23 फसलों की 100 प्रतिशत पैदावार एमएसपी पर खरीदे जाने का एमएसपी गारंटी कानून बनाया जाना चाहिए और कोई भी सरकारी खरीद एजेंसी का अधिकारी या व्यापारी एमएसपी से कम पर फसल खरीदें तो उसे गैर कानूनी घोषित किया जाना चाहिए। किसान नेताओं ने कहा कि एक हरियाणा के किसान संगठन का नेता अपने किसी पदाधिकारी से संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) के सदस्य अभिमन्यु कोहाड़ से कोई मुद्दा समझने के नाम पर फोन कराता है और दोनों के बीच हुई साढ़े 13 मिनट की बातचीत को बीच में से काटकर लगभग छह मिनट की ऑडियो गलत तरीके से पेश करी जाती है। किसान नेताओं ने कहा कि ऑडियो-वीडियो को बीच में से काटकर गलत तरीके से पेश करने का कार्य राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ता करते थे, लेकिन अब समय-समय पर राजनीति करने वाले किसान नेता भी ऐसे कार्य करने लगे हैं। किसान नेताओं ने बताया कि केंद्र सरकार के साथ बैठक में 25 प्रतिशत या 30 प्रतिशत पैदावार एमएसपी पर खरीदने की कोई मांग नहीं करी गई है। उनकी मांग है कि एमएसपी गारंटी कानून के तहत देश में किसी भी किसान की किसी भी फसल का एक भी दाना एमएसपी से नीचे नहीं खरीदा जाना चाहिए। किसान नेताओं ने कहा कि कुछ सरकारी दरबारी अर्थशास्त्री ये कहकर लोगों को गुमराह करने का कार्य करते हैं कि एमएसपी गारंटी कानून बन गया तो 17 लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा। मार्केट बिगड़ जाएगा या व्यापारी काम करना छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि जब सरकार एमएसपी गारंटी कानून बनाएगी तो 25 से 30 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक खर्च आएगा। किसान नेताओं ने बताया कि आरबीआई की रिपोर्ट कहती है कि खाद्यान्न वस्तुओं के फाइनल रिटेल मूल्य में से 30 प्रतिशत से भी कम किसान को मिलता है बाकि 70 प्रतिशत बिचौलिया कमाते हैं। यदि एमएसपी गारंटी कानून बनेगा तो किसान को भी उचित मूल्य मिलेगा, उपभोक्ता को भी फायदा होगा और बिचौलियों का मुनाफा 70 प्रतिशत से घटकर कम हो जाएगा। किसान नेताओं ने कहा कि जो लोग डब्ल्यूटीओ के हिमायती रहे हैं वह नहीं चाहते कि एमएसपी गारंटी कानून बने।
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