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सत्य और धर्म से किया कर्म देता है उत्तम फल : योगेश दत्त
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फोटो 1 नरवाना। विद्यार्थियों को दिए संस्कारों के संदेश देते हुए। स्रोत समाज।
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नरवाना। आर्य समाज नरवाना में चल रहे चतुर्वेदी यज्ञ पारायण कार्यक्रम के तहत बुधवार को बृहद यज्ञ का आयोजन किया गया। यज्ञ में आर्य समाज के सदस्यों, स्टाफ सदस्यों और विद्यार्थियों ने आहुति डालकर पर्यावरण शुद्धि में योगदान दिया।
कार्यक्रम के रात्रिकालीन सत्र में भजन उपदेशक योगेश दत्त ने कर्म के सिद्धांत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सत्य, न्याय, धर्म, धैर्य, संयम, चिंतन, मनन और विवेक से किया गया कर्म उत्तम फल देता है। वेदों में मनुष्य को 100 वर्ष तक निस्वार्थ भाव से कर्म करते हुए जीवन जीने का विधान बताया गया है। प्रात:कालीन सत्र में उन्होंने ईश्वर के गुण, कर्म, स्वभाव, शक्ति और सामर्थ्य की व्याख्या की।
उन्होंने कहा कि परमात्मा ब्रह्मा स्वरूप में रचनाकार, विष्णु स्वरूप में पालनहार और शिव स्वरूप में कल्याणकारी है। विद्यार्थियों से आदर्श मूल्य अपनाकर सत्यनिष्ठा से अध्ययन करने और श्रेष्ठ नागरिक बनने का आह्वान किया।
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प्रधान चंद्रकांत आर्य ने कहा कि भारत प्राचीन काल से ज्ञान-विज्ञान में अग्रणी रहा है। मां संतान का निर्माण, पिता संरक्षण और आचार्य ज्ञान-विज्ञान से उसे श्रेष्ठ नागरिक बनाता है। जयपाल सिंह आर्य ने कहा कि विद्वानों और प्रबुद्ध नागरिकों का सम्मान करने से आयु, विद्या, यश और बल बढ़ते हैं। इस अवसर पर पुरोहित मिथिलेश शास्त्री सहित अन्य सदस्य और विद्यार्थी मौजूद रहे।
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कार्यक्रम के रात्रिकालीन सत्र में भजन उपदेशक योगेश दत्त ने कर्म के सिद्धांत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सत्य, न्याय, धर्म, धैर्य, संयम, चिंतन, मनन और विवेक से किया गया कर्म उत्तम फल देता है। वेदों में मनुष्य को 100 वर्ष तक निस्वार्थ भाव से कर्म करते हुए जीवन जीने का विधान बताया गया है। प्रात:कालीन सत्र में उन्होंने ईश्वर के गुण, कर्म, स्वभाव, शक्ति और सामर्थ्य की व्याख्या की।
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उन्होंने कहा कि परमात्मा ब्रह्मा स्वरूप में रचनाकार, विष्णु स्वरूप में पालनहार और शिव स्वरूप में कल्याणकारी है। विद्यार्थियों से आदर्श मूल्य अपनाकर सत्यनिष्ठा से अध्ययन करने और श्रेष्ठ नागरिक बनने का आह्वान किया।
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प्रधान चंद्रकांत आर्य ने कहा कि भारत प्राचीन काल से ज्ञान-विज्ञान में अग्रणी रहा है। मां संतान का निर्माण, पिता संरक्षण और आचार्य ज्ञान-विज्ञान से उसे श्रेष्ठ नागरिक बनाता है। जयपाल सिंह आर्य ने कहा कि विद्वानों और प्रबुद्ध नागरिकों का सम्मान करने से आयु, विद्या, यश और बल बढ़ते हैं। इस अवसर पर पुरोहित मिथिलेश शास्त्री सहित अन्य सदस्य और विद्यार्थी मौजूद रहे।