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जुलाना के सामुदायिक स्वास्थ्य में नहीं है, एंटी रेबीज के टीके
Updated Fri, 27 Jul 2018 12:01 AM IST
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जुलाना के सामुदायिक स्वास्थ्य में नहीं है एंटी रेबीज का टीका
अमर उजाला ब्यूरो
जुलाना। जुलाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाओं का टोटा स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी पड़ रहा है। 100 रुपये का एंटी रेबीज का टीका बाजार से महंगे भाव में कस्बे के लोगों खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसे में कस्बे के लोगों का इलाज हो तो कैसे।
जुलाना का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र वैसे तो 30 बेड का है, लेकिन यहां पर स्वास्थ्य सेवाएं पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए स्वास्थ्य को लेकर कस्बे के लोग प्राइवेट अस्पताल में अपनी जेबें ढीली करवाने को मजबूर हैं। जहां एक तरफ प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर तरह तरह के वादे प्रदेश की जनता के साथ करते हैं, वहीं दूसरी तरफ जुलाना का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र केवल नाम का स्वास्थ्य केंद्र रह गया है। जब भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एंटी रेबीज का टिका लगवाने के लिए कस्बे के लोग जाते हैं उन्हें यह सुविधा नहीं मिलने के कारण प्राइवेट अस्पताल में टीका लगवाना पड़ता है। यहां पर मोटी रकम वसूली जाती है। जिस कारण उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कस्बे के लोगों का कहना है कि एंटी रेबीज के टीके का इलाज लंबा चलता है, जिस कारण प्राइवेट अस्पताल में काफी रुपये लोगों से ऐंठ लिए जाते हैं। इसलिए कस्बे के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जुलाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पर्याप्त सुविधाएं मुहैया करवाई जाएं, ताकि कस्बे के लोगों को जींद या रोहतक के सरकारी अस्पतालों में न भागना पड़े।
उनके द्वारा एंटी रेबीज के टीकों के लिए डिमांड भेजी जा चुकी है। जींद सिविल अस्पताल में बात की गई थी लेकिन ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल के कारण टीके नहीं पहुंच पाएं है एक या दो दिन में जुलाना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एंटी रेबीज के टीकें उपलब्ध हो जाएंगे।
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नरेश वर्मा, एसएमओ, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जुलाना।
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अमर उजाला ब्यूरो
जुलाना। जुलाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाओं का टोटा स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी पड़ रहा है। 100 रुपये का एंटी रेबीज का टीका बाजार से महंगे भाव में कस्बे के लोगों खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसे में कस्बे के लोगों का इलाज हो तो कैसे।
जुलाना का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र वैसे तो 30 बेड का है, लेकिन यहां पर स्वास्थ्य सेवाएं पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए स्वास्थ्य को लेकर कस्बे के लोग प्राइवेट अस्पताल में अपनी जेबें ढीली करवाने को मजबूर हैं। जहां एक तरफ प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर तरह तरह के वादे प्रदेश की जनता के साथ करते हैं, वहीं दूसरी तरफ जुलाना का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र केवल नाम का स्वास्थ्य केंद्र रह गया है। जब भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एंटी रेबीज का टिका लगवाने के लिए कस्बे के लोग जाते हैं उन्हें यह सुविधा नहीं मिलने के कारण प्राइवेट अस्पताल में टीका लगवाना पड़ता है। यहां पर मोटी रकम वसूली जाती है। जिस कारण उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कस्बे के लोगों का कहना है कि एंटी रेबीज के टीके का इलाज लंबा चलता है, जिस कारण प्राइवेट अस्पताल में काफी रुपये लोगों से ऐंठ लिए जाते हैं। इसलिए कस्बे के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जुलाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पर्याप्त सुविधाएं मुहैया करवाई जाएं, ताकि कस्बे के लोगों को जींद या रोहतक के सरकारी अस्पतालों में न भागना पड़े।
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उनके द्वारा एंटी रेबीज के टीकों के लिए डिमांड भेजी जा चुकी है। जींद सिविल अस्पताल में बात की गई थी लेकिन ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल के कारण टीके नहीं पहुंच पाएं है एक या दो दिन में जुलाना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एंटी रेबीज के टीकें उपलब्ध हो जाएंगे।
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नरेश वर्मा, एसएमओ, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जुलाना।