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नियमों को ताक पर रखकर चल रहे वाहन, विभाग चालान काटकर राजस्व जुटाने तक सिमटा प्रशासन --नियमों का उल्लघंन रोकने के लिए नहीं कठोर न
Updated Wed, 06 Jun 2018 01:08 AM IST
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सुशील टुर्ण
जींद। नियमों को ताक पर रखकर चलने वाले वाहनों को रोकने के लिए जिला परिवहन विभाग के पास कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। जिस कारण आए दिन सड़कों पर ओवरलोडेड वाहन चलते हैं और दुर्घटनाओं को अंजाम देते हैं। प्रतिवर्ष ओवरलोडेड और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के कारण सैकड़ों दुर्घटनाएं घटती हैं, लेकिन प्रशासन नियमों का उल्लघंन करने वालों का केवल चालान काटने तक ही सीमित है। वाहन चालक नियमों का उल्लंघन नहीं करें, इसके लिए विभाग के पास कोई नीति नहीं है। इसके चलते हालांकि सरकार ने एक करोड़ 98 लाख 13 हजार 535 रुपये का राजस्व एक साल में कमाया है।
आए दिन शहर की सड़कों पर ओवरलोड और बिना नंबर के वाहन सरेआम दौड़ते रहते हैं, लेकिन इन वाहनों पर पूर्ण रूप से शिकंजा कसने के लिए न तो आरटीए विभाग और न ही पुलिस प्रशासन कोई काम कर रहा है। इसके कारण आए दिन यह वाहन लोगों की जिंदगियों को लील रहे हैं। पिछले एक साल के आंकड़ों पर नजर डाले तो आरटीए विभाग द्वारा बटोरी गई राशि तथा वाहनों की संख्या सब कुछ बयां कर देगी। बीते वर्ष 2017-18 में आरटीए ने 784 हैवी वाहनों के चालान काटकर 19813535 रुपये का राजस्व कमाया। इसमें सबसे ज्यादा ओवरलोडेड वाहनों के 456 चालान काटे गए और दूसरे नंबर पर 358 बिना नंबर प्लेट के वाहनों के चालान कटे तो वहीं 37 स्कूल बसों के नियमों को ताक पर रखने के अपराध में चालान काटे गए। शिक्षा विभाग भी आए दिन स्कूल संचालकों को बसों में सभी तरह की व्यवस्था के लिए निर्देश देते हैं, लेकिन यह स्कूल संचालक भी इन नियमों को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। विभाग द्वारा काटे गए स्कूल बसों के चालान का कारण सबसे जरूरी माने जाने वाले सीसीटीवी, लेडी अटेंडेंट और स्पीड गवर्नर नहीं होना था।
नियमों का उल्लंघन करने पर चालान के रूप में दी जाती है सजा
रोड पर नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों का चालान काटकर उनको सजा दी जाती है, ताकि वह दोबारा से गलती न करें, लेकिन वाहन चालक नियमों की अवहेलना करने से बाज नहीं आते और अपनी गलती को दोहराते हैं। इनके खिलाफ अगर सरकार कठोर गाइडलाइन जारी करे तो उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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-ओपी मोर, आरटीए सहायक सचिव।
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जींद। नियमों को ताक पर रखकर चलने वाले वाहनों को रोकने के लिए जिला परिवहन विभाग के पास कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। जिस कारण आए दिन सड़कों पर ओवरलोडेड वाहन चलते हैं और दुर्घटनाओं को अंजाम देते हैं। प्रतिवर्ष ओवरलोडेड और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के कारण सैकड़ों दुर्घटनाएं घटती हैं, लेकिन प्रशासन नियमों का उल्लघंन करने वालों का केवल चालान काटने तक ही सीमित है। वाहन चालक नियमों का उल्लंघन नहीं करें, इसके लिए विभाग के पास कोई नीति नहीं है। इसके चलते हालांकि सरकार ने एक करोड़ 98 लाख 13 हजार 535 रुपये का राजस्व एक साल में कमाया है।
आए दिन शहर की सड़कों पर ओवरलोड और बिना नंबर के वाहन सरेआम दौड़ते रहते हैं, लेकिन इन वाहनों पर पूर्ण रूप से शिकंजा कसने के लिए न तो आरटीए विभाग और न ही पुलिस प्रशासन कोई काम कर रहा है। इसके कारण आए दिन यह वाहन लोगों की जिंदगियों को लील रहे हैं। पिछले एक साल के आंकड़ों पर नजर डाले तो आरटीए विभाग द्वारा बटोरी गई राशि तथा वाहनों की संख्या सब कुछ बयां कर देगी। बीते वर्ष 2017-18 में आरटीए ने 784 हैवी वाहनों के चालान काटकर 19813535 रुपये का राजस्व कमाया। इसमें सबसे ज्यादा ओवरलोडेड वाहनों के 456 चालान काटे गए और दूसरे नंबर पर 358 बिना नंबर प्लेट के वाहनों के चालान कटे तो वहीं 37 स्कूल बसों के नियमों को ताक पर रखने के अपराध में चालान काटे गए। शिक्षा विभाग भी आए दिन स्कूल संचालकों को बसों में सभी तरह की व्यवस्था के लिए निर्देश देते हैं, लेकिन यह स्कूल संचालक भी इन नियमों को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। विभाग द्वारा काटे गए स्कूल बसों के चालान का कारण सबसे जरूरी माने जाने वाले सीसीटीवी, लेडी अटेंडेंट और स्पीड गवर्नर नहीं होना था।
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नियमों का उल्लंघन करने पर चालान के रूप में दी जाती है सजा
रोड पर नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों का चालान काटकर उनको सजा दी जाती है, ताकि वह दोबारा से गलती न करें, लेकिन वाहन चालक नियमों की अवहेलना करने से बाज नहीं आते और अपनी गलती को दोहराते हैं। इनके खिलाफ अगर सरकार कठोर गाइडलाइन जारी करे तो उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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-ओपी मोर, आरटीए सहायक सचिव।