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Jhajjar-Bahadurgarh News: अदालत से.. दहेज प्रताड़ना के आरोप साबित न कर पाने पर युवक बरी
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संवाद न्यूज एजेंसी
झज्जर। दहेज की मांग, मारपीट, रुपये हड़पने और जान से मारने की धमकी के मामले में झज्जर की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी नीलम झाझरिया की अदालत ने आरोपी पति विमल कुमार को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
अभियोग के अनुसार, महिला की शादी 11 नवंबर 2016 को विमल कुमार से हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि विवाह के बाद पति ने बुलेट मोटरसाइकिल और अन्य ससुरालजनों ने सोने के आभूषण की मांग की। महिला ने मारपीट, बैंक खाते से करीब एक लाख रुपये जबरन निकलवाने, बच्चों सहित घर से निकालने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप भी लगाए थे।
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता और उसकी मां कमलेश अपने पूर्व बयानों से मुकर गईं। दोनों ने अदालत में कहा कि विवाद दहेज नहीं, बल्कि वैचारिक मतभेदों के कारण हुआ था। उन्होंने दहेज मांगने, मारपीट, धमकी देने और बैंक खाते से जबरन रुपये निकलवाने के आरोपों से भी इनकार कर दिया।
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अदालत ने कहा कि प्रमुख गवाहों के अपने बयानों से मुकर जाने और आरोपों के समर्थन में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत न होने के कारण अभियोजन पक्ष मामला साबित नहीं कर सका। इस आधार पर आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
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झज्जर। दहेज की मांग, मारपीट, रुपये हड़पने और जान से मारने की धमकी के मामले में झज्जर की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी नीलम झाझरिया की अदालत ने आरोपी पति विमल कुमार को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
अभियोग के अनुसार, महिला की शादी 11 नवंबर 2016 को विमल कुमार से हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि विवाह के बाद पति ने बुलेट मोटरसाइकिल और अन्य ससुरालजनों ने सोने के आभूषण की मांग की। महिला ने मारपीट, बैंक खाते से करीब एक लाख रुपये जबरन निकलवाने, बच्चों सहित घर से निकालने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप भी लगाए थे।
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सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता और उसकी मां कमलेश अपने पूर्व बयानों से मुकर गईं। दोनों ने अदालत में कहा कि विवाद दहेज नहीं, बल्कि वैचारिक मतभेदों के कारण हुआ था। उन्होंने दहेज मांगने, मारपीट, धमकी देने और बैंक खाते से जबरन रुपये निकलवाने के आरोपों से भी इनकार कर दिया।
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अदालत ने कहा कि प्रमुख गवाहों के अपने बयानों से मुकर जाने और आरोपों के समर्थन में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत न होने के कारण अभियोजन पक्ष मामला साबित नहीं कर सका। इस आधार पर आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।