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Jhajjar-Bahadurgarh News: एंबुलेंस न मिलने पर ठेले पर बीमार बेटी को लेकर अस्पताल पहुंचा मनोज
Tue, 05 Mar 2024 01:00 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Tue, 05 Mar 2024 01:00 AM IST
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तुषार शर्मा
बहादुगढ़। जरूरतमंदों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के दावे स्वास्थ्य विभाग कर रहा है लेकिन हकीकत कुछ ओर है। इसका नजारा सोमवार को उस वक्त देखने को मिला जब एंबुलेंस न मिलने पर एक लाचार पिता अपनी बीमारी बेटी को ठेले लेकर उपचार कराने सिविल अस्पताल पहुंचा। उसने भरे मन से कहा कि 500 मीटर दूर अस्पताल तक लाने के लिए एंबुलेंस वाले ने दो हजार रुपये मांगे थे।
मनोज ने बताया कि उसकी दो साल की बेटी नीतू को तीन दिन से बुखार व खांसी हो रही थी। वह तीन दिन पहले उसे नागरिक अस्पताल में डॉक्टर के यहां लेकर गया था। सोमवार को तबीयत ज्यादा खराब हो गई तो घर के पास छिकारा में ही एक निजी डॉक्टर के क्लीनिक लेकर गया। डॉक्टर ने हालत गंभीर बात कर नागरिक अस्पताल ले जाने को कहा दिया। उसने एंबुलेंस चालकों से नागरिक अस्पताल ले जाने को कहा तो उसने दो हजार रुपये मांगे। मनोज ने बताया कि 500 मीटर की दूरी पर जाने के लिए दो हजार रुपये काफी अधिक है। उसकी इतनी कमाई नहीं है। एंबुलेंस नहीं मिली तो वह अपनी बेटी को ठेले में बैठाकर ही अस्पताल ले आया। मनोज को इस बात का मलाल था कि सरकार स्वास्थ्य सेवा देने का दम भरती है लेकिन जरूरत पड़ने पर कोई सुविधा नहीं मिलती। मनोज ने कहा कि सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए ताकि किसी जरूरतमंद को पैसों की तंगी की वजह से जीवन से ही हाथ न धोना पड़ जाए।
वर्जन:
सरकारी अस्पताल का यदि कोई भी एंबुलेंस वाला पैसे मागें तो उस पर कार्रवाई की जायेगी। अगर कोई ठेले में मरीज को लेकर आया तो इसकी भी जांच की जायेगी।
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बहादुगढ़। जरूरतमंदों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के दावे स्वास्थ्य विभाग कर रहा है लेकिन हकीकत कुछ ओर है। इसका नजारा सोमवार को उस वक्त देखने को मिला जब एंबुलेंस न मिलने पर एक लाचार पिता अपनी बीमारी बेटी को ठेले लेकर उपचार कराने सिविल अस्पताल पहुंचा। उसने भरे मन से कहा कि 500 मीटर दूर अस्पताल तक लाने के लिए एंबुलेंस वाले ने दो हजार रुपये मांगे थे।
मनोज ने बताया कि उसकी दो साल की बेटी नीतू को तीन दिन से बुखार व खांसी हो रही थी। वह तीन दिन पहले उसे नागरिक अस्पताल में डॉक्टर के यहां लेकर गया था। सोमवार को तबीयत ज्यादा खराब हो गई तो घर के पास छिकारा में ही एक निजी डॉक्टर के क्लीनिक लेकर गया। डॉक्टर ने हालत गंभीर बात कर नागरिक अस्पताल ले जाने को कहा दिया। उसने एंबुलेंस चालकों से नागरिक अस्पताल ले जाने को कहा तो उसने दो हजार रुपये मांगे। मनोज ने बताया कि 500 मीटर की दूरी पर जाने के लिए दो हजार रुपये काफी अधिक है। उसकी इतनी कमाई नहीं है। एंबुलेंस नहीं मिली तो वह अपनी बेटी को ठेले में बैठाकर ही अस्पताल ले आया। मनोज को इस बात का मलाल था कि सरकार स्वास्थ्य सेवा देने का दम भरती है लेकिन जरूरत पड़ने पर कोई सुविधा नहीं मिलती। मनोज ने कहा कि सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए ताकि किसी जरूरतमंद को पैसों की तंगी की वजह से जीवन से ही हाथ न धोना पड़ जाए।
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सरकारी अस्पताल का यदि कोई भी एंबुलेंस वाला पैसे मागें तो उस पर कार्रवाई की जायेगी। अगर कोई ठेले में मरीज को लेकर आया तो इसकी भी जांच की जायेगी।