{"_id":"b0736d3b72f6660747f55ed1ece93311","slug":"urea-shortage-yet-farmers-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूरिया की किल्लत नहीं, फिर भी किसान परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूरिया की किल्लत नहीं, फिर भी किसान परेशान
अमर उजाला झज्जर/ब्यूरो
Updated Thu, 03 Dec 2015 01:03 AM IST
विज्ञापन
कृषि मंत्री के गृह जिले में गेहूं की बिजाई के बाद इसकी प्रथम सिंचाई में लगे किसान यूरिया को लेकर परेशान हैं। फसल में पानी देने के साथ ही उसमें यूरिया डालना जरूरी हैै।
विज्ञापन
जिले में यूरिया की फिलहाल कोई किल्लत नहीं है, लेकिन हैफेड की ओर से बिगड़ी व्यवस्था ने किसानों को शहर तक की दौड़ लगाने पर विवश कर दिया है।
यहां विभिन्न खाद केंद्रों पर यूरिया के लिए कतारें लगने लगी हैं। स्टॉक के हिसाब से पर्ची काटी जा रही हैं और बहुत से किसानों को या तो जरूरत से कम या फिर बिना यूरिया लिए ही लौटना पड़ रहा है। इस बीच हैफेड का दावा है कि बृहस्पतिवार से व्यवस्था सही हो जाएगी।
विज्ञापन
एक लाख हेक्टेयर में हुई है गेहूं की बिजाई
रबी के सीजन में जिले में 1 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बिजाई की गई है। फसल में इन दिनों पहला पानी दिया जा रहा है और साथ में यूरिया डाला जाना है।
अकेले गेहूं के लिए ही यहां यूरिया के 4 लाख बैग की आवश्यकता है। किसानों की जरूरत के हिसाब से यूरिया स्टॉक में उपलब्ध है, लेकिन फिलहाल किसानों तक नहीं पहुंच पाया है।
विज्ञापन
जिले में अभी तक यूरिया के करीब 55 हजार बैग ही किसानों को मिले हैं। किसानों को यूरिया के दो लाख बैग की 10 से 15 दिन की अवधि में जरूरत है, लेकिन व्यवस्था के डगमगाने से यूरिया किसानों की पहुंच से दूर है।
हैफेड ने बढ़ाई परेशानी
झज्जर जिले में किसानों तक यूरिया पहुंचाने की बड़ी जिम्मेदारी हैफेड के कंधे पर है। अधिकतर किसान यूरिया के लिए गांवों में बने मिनी बैंकों पर आश्रित हैं।
कारण यह कि किसान यहां फसल के लिए खाद बीज उधार में ले सकते हैं और फिर यूरिया आसपास की उपलब्ध है। मिनी बैंकों में यूरिया की सप्लाई हैफेड की ओर से की जानी है, लेकिन हो नहीं रही।
नवंबर महीने के अंत तक हैफेड इन बैंकों में केवल 24 हजार यूरिया बैग ही सप्लाई कर पाया। वर्तमान में यूरिया के 50 हजार बैग हैफेड के गोदाम में हैं, लेकिन भेजने की व्यवस्था यहां डगमगाई हुई है।
हैफेड के जिम्मेदार अधिकारियों की मानें तो मिनी बैंकों में पहले रैक से सीधे यूरिया की सप्लाई जानी थी, लेकिन इसमें हैफेड चूक गया। खाद गोदामों में पहुंच गया और सप्लाई थम गई।
परेशानी को बयां करती स्थिति
यूरिया को लेकर किसान कितने परेशान हैं, इसका प्रमाण बुधवार को अनाजमंडी सिथत इफको के बिक्री केंद्र में दिखा। किसानों की खाद के लिए यहां भारी भीड़ थी।
दोपहर बाद यूरिया के साढ़े 3 सौ बैग रेवाड़ी से यहां पहुंचे, और हाथों हाथ बिक गए। इफको के फिल्ड मैनेजर राजेंद्र शर्मा ने बताया कि उनके पास यूरिया की जितनी आवक थी, उसके हिसाब से सुबह ही पर्ची काटने यानी किसानों से पैसे लेकर बुकिंग करने का काम पूरा हो गया। देरी से आए किसान यूरिया लिए बिना लौटे ओर कुछ किसानों की जरूरत ज्यादा थी।
बोले अधिकारी, आज से दिक्कत नहीं
किसानों को हो रही यूरिया खाद की परेशानी को लेकर हैफेड की स्थानीय प्रबंधक रितू ने कहा कि मिनी बैंकों में यूरिया की सप्लाई सीधे रैक (रेलवे स्टेशन जहां बैग उतरे) से होनी थी।
किंही कारणों से यूरिया सीधे जाने की बजाय गोदामों में पहुंचाना पड़ा। सप्लाई भेजने की व्यवस्था कर ली गई है और बृहस्पतिवार से किसानों को किसी प्रकार की किल्लत नहीं होगी।
यूरिया के लिए खा रहे धक्के किसान बोले
सिलाना-सिलानी के मिनी बैंक से खाद बीज लेते हैं, लेकिन कई दिन से वहां यूरिया नहीं मिल रहा। मजबूरन शहर में खाद लेने आना पड़ा। उनकी तरह गांव के अनेक किसानों को यूरिया के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं।
बलबीर सिंह, गांव सिलानी
सरकार के या फिर विभिन्न खाद कंपनियों के खरीद केंद्रों पर नीमवाले यूरिया की कीमत 284 रुपये प्रति बैग है। खाद बीज की प्राइवेट दुकानों पर यूरिया हाथों हाथ मिल रहा है, लेकिन प्रति बैग दुकानदार 300 रुपये मांग रहे हैं। सीधे एक बैग यूरिया पर 16 रुपये का डाका पड़ रहा है।
प्रवीण, गांव रईया
गेहूं में पानी का समय है, लेकिन पानी देने के साथ ही यूरिया की जरूरत पड़ेगी। सुबह से वे अनाजमंडी में खाद के लिए लाइन में लगे हैं। बिल तो किसी तरह कटवा लिया, अब दो घंटे से यूरिया लेकर आ रही गाड़ी का इंतजार है।
-ईश्वर सिंह, किसान
पांच एकड़े में गेहूं की फसल की बिजाई की है। दो बार यूरिया डालना है। इसके लिए 10 बैग यूरिया की जरूरत है। सुबह से यहां खड़ें हैं, लेकिन उनको पांच बैग यूरिया की पर्ची मिली है। सभी किसानों को यूरिया मिले, इसके लिए डिमांड के हिसाब से कम यूरिया बैग दिए गए हैं। फिर दोबारा आकर लाइन में लगना पड़ेगा।
रामकुमार, किसान