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टीकरी बार्डर से आवागमन के लिए ढाई-ढाई फुट का रास्ता खुला
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टीकरी बार्डर पर ढाई-ढाई फुट चौड़ा रास्तों से जाते-आते बाइक सवार और पैदल राहगीर। संवाद
- फोटो : Bahadurgarh
बहादुरगढ़। किसानों और पुलिस प्रशासन में तीन दौर की बातचीत के बाद आखिरकार आंदोलनकारियों ने टीकरी बार्डर पर हाईवे की एक साइड से थोड़ा सा रास्ता खोल दिया। इससे दिल्ली आने-जाने वाले दुपहिया सवारों और पैदल राहगीरों को कुछ राहत मिली है। एंबुलेंस आएगी तो उसको भी रास्ता दिया जाएगा। उद्यमियों और ट्रांसपोर्टरों ने इस पर असंतोष व्यक्त किया है और एक तरफ की पूरी लेन खोलने की मांग की है।
आंदोलनकारी किसानों की सहमति मिलने पर दिल्ली पुलिस ने हाईवे की दिल्ली से हरियाणा में आने वाली साइड से ढाई फुट आने के लिए और ढाई फुट जाने के लिए रास्ता खोला। इतने रास्ते में से केवल दोपहिया वाहन, साइकिल सवार और पैदल राहगीर ही निकल सकते हैं। हालांकि किसानों ने एंबुलेंस को भी निकलाने का आश्वासन दिया। आने-जाने की इन दोनों लेन के बीच में लोहे के बैरिकेड लगाए गए हैं। यानी किसानों ने इन बैरिकेड्स की दीवार से रास्ते को दो हिस्सों में विभाजित कर दिया है। दिल्ली पुलिस ने टीकरी बॉर्डर पर लगे आरसीसी के भारी ब्लाक के बेरिकेड्स और नुकीली कीलों को हटा दिया। यह रास्ता खुलने से खास तौर पर उन लोगों को सुविधा होगी जो हर रोज दिल्ली और बहादुरगढ़ के बीच आवागमन करते हैं। इन लोगों में फैक्ट्रियों में मजदूरों की संख्या हजारों में है।
ग्यारह महीने बाद रास्ता खुलते ही दोनों तरफ से लोगों ने आना-जाना शुरू कर दिया। ठीक हरियाणा की सीमा पर बहादुरगढ़ पुलिस ने नाका लगाकर केवल दोपहिया वाहनों और पैदल राहगीरों को ही दिल्ली की ओर जाने दिया तो दिल्ली पुलिस ने टीकरी बार्डर मेट्रो स्टेशन के निकट नाका लगाकर केवल दोपहिया वाहनों और पैदल राहगीरों को हरियाणा के तरफ आने दिया। दिल्ली की तरफ से आई एंबुलेंस को पुलिस व किसानों ने एक बैरिकेड हटाकर निकलवाया।
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किसानों ने कहा, एक साइड का रास्ता फिलहाल नहीं खोलेंगे
वहीं, किसान नेताओं ने यह साफ कर दिया है कि एक साइड का भी पूरा रास्ता फिलहाल वह नहीं खोलेंगे। रास्ता खोलने को लेकर शनिवार तक हुई कवायद की पूरी रिपोर्ट वे 6 नवंबर को सिंघु बार्डर पर होने वाली संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में रखेंगे। उसके बाद मोर्चा की केंद्रीय कमेटी के निर्णय पर ही टीकरी बार्डर से रास्ता खोलने को लेकर अगली कार्रवाई की जाएगी।
दिल्ली पुलिस के अधिकारी रास्ता खोलने के लिए किसान नेताओं के साथ शनिवार सुबह ही बात करने लगे थे। सुबह किसान नेताओं ने पुलिस अधिकारियों के बुलावे पर जाकर बातचीत की, लेकिन बात सिरे नहीं चढ़ी। इस पर बहादुरगढ़ के उद्यमियों ने पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में किसान नेताओं से निवेदन किया। इन उद्यमियों में बहादुरगढ़ चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के महासचिव सुभाष जग्गा, उपाध्यक्ष विकास आनंद सोनी व पवन जैन भी शामिल थे। लेकिन किसान नेता कामर्शियल वाहनों को रास्ता देने के लिए तैयार नहीं हुए और केवल पांच फुट का ही रास्ता देने पर अड़े रहे। आखिर करीब एक बजे किसानों और अधिकारियों में ढाई-ढाई फुट रास्ता देने की सहमति बनी। इसके बावजूद उद्यमियों ने राहत महसूस नहीं की।
इन अधिकारियों ने की मशक्कत
दिल्ली पुलिस की तरफ से डीसीपी परविंदर सिंह, एसीपी महेंद्र कुमार और मुंडका थारा प्रभारी इंस्पेक्टर गुलशन नागपाल, हरियाणा से बहादुरगढ़ के एसडीएम भूपेंद्र सिंह व डीएसपी पवन कुमार ने रास्ता खुलवाने के लिए किसानों से बातचीत की। आंदोलनकारियों की ओर से किसान नेता बूटा सिंह बुर्जगिल, जोगिंदर नैन, जगजीत सिंह दल्लेवाल विकास सीसर, रवि आजाद, जियालाल, बारूराम व जोगिंदर सिंह तालूवाला ने अधिकारियों से बातचीत की।
हालांकि इतना थोड़ा सा रास्ता खुलने से भी दोपहिया सवार और पैदल राहगीर खुश नजर आए। दिल्ली से हरियाणा आ रहे बाइक सवार राकेश ने कहा कि 11 महीने से उसको बाबा हरीदास नगर की कई गलियों में से घूमकर बार्डर पार करना पड़ता था। अधिकतर गलियां टूट-फूटी हैं, संकरी हैं या उनमें भीड़भाड़ रहती है। अब उस समस्या से राहत मिल गई है।
बार्डर से रास्ता खोलने के लिए जब बैरिकेड हटाए जा रहे थे तो देखने वालों की भीड़ लग गई। यहां दुकानें चलाने वाले और फैक्ट्रियों में काम करने वाले लोग राहत महसूस कर रहे थे। बुजुर्ग महिला सावित्री ने भगवान का शुक्रिया किया। उन्होंने बताया कि वह नांगलोई से हर रोज कपड़े बेचने के लिए बार्डर पार करके आसपास की कालोनियों में आती है। रास्ता बंद होने से उन्हें टीकरी टर्मिनल पर उतरकर अपने कपड़ों की गठरी सिर पर रख कई गलियों में घूमकर आना पड़ता था, लेकिन अब परेशानी नहीं होगी।
वर्जन
यह हरियाणा पुलिस, दिल्ली पुलिस व प्रशासन की बड़ी जीत है। फिलहाल कुछ बातों पर सहमति बनी है। कोशिश है कि पूरा रास्ता खोला जाए। हम यह भी कोशिश कर रहे हैं कि पांच फुट से ज्यादा रोड खोला जाए और चौपहिया वाहनों को भी निकलने दिया जाए। यहां पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और हम हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। हमारी तरफ से रास्ते पर कोई रोक नहीं है।
- परविंदर सिंह, डीसीपी, आउटर सर्कल
वर्जन
हमने पांच फुट चौड़ा रास्ता खोलने पर सहमति दी है। दरअसल ये औद्योगिक क्षेत्र है, इसलिए मजदूरों और उद्यमियों की समस्या को देखते हुए हमने ये फैसला लिया है। इस रास्ते से केवल दोपहिया, एंबुलेंस और पैदल आने-जाने वाले निकल सकेंगे। रास्ता केवल सुबह 7 बजे से शाम 8 बजे तक खुला रहेगा। रात को सिर्फ एंबुलेंस को निकलने दिया जाएगा। रात को तेज गति वाहन हादसा न कर दें, इसलिए रात को वाहनों को नहीं आने देंगे।
- बूटा सिंह बुर्जगिल, किसान नेता
वर्जन
हमारी कोशिशों का उचित लाभ नहीं मिला। जितना रास्ता खोला गया है उससे उद्योगों को कोई फायदा नहीं होने वाला। हमारे मालवाहक वाहन नहीं आ सकते। हर रोज करोड़ों का नुकसान हो रहा है। कारों को भी रास्ता नहीं दिया गया है, जबकि अधिकतर उद्यमी दिल्ली में रहते हैं। हम लोगों को 10-12 किलोमीटर अधिक घूमकर आना पड़ता है। हम किसानों और सरकार से फिर अपील करते हैं कि कम से कम एक साइड की पूरी सड़क खोली जाए।
- सुभाष जग्गा, महासचिव, बीसीसीआई
वर्जन
टीकरी बार्डर से रास्ता खोलकर केवल औपचारिकता पूरी की गई है। बार्डर बंद होने से हम लोगों को भारी नुकसान हो रहा है। हमारा व्यवसाय घाटे का सौदा बन गया है। नए कृषि कानून बनाने में हमारा कोई कुसूर नहीं है। किसानों को चाहिए कि दूसरों को नुकसान नहीं पहुंचाएं। आंदोलनकारियों को सरकार से लड़ना चाहिए।
- दीपक कुमार, ट्रांसपोर्टर
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आंदोलनकारी किसानों की सहमति मिलने पर दिल्ली पुलिस ने हाईवे की दिल्ली से हरियाणा में आने वाली साइड से ढाई फुट आने के लिए और ढाई फुट जाने के लिए रास्ता खोला। इतने रास्ते में से केवल दोपहिया वाहन, साइकिल सवार और पैदल राहगीर ही निकल सकते हैं। हालांकि किसानों ने एंबुलेंस को भी निकलाने का आश्वासन दिया। आने-जाने की इन दोनों लेन के बीच में लोहे के बैरिकेड लगाए गए हैं। यानी किसानों ने इन बैरिकेड्स की दीवार से रास्ते को दो हिस्सों में विभाजित कर दिया है। दिल्ली पुलिस ने टीकरी बॉर्डर पर लगे आरसीसी के भारी ब्लाक के बेरिकेड्स और नुकीली कीलों को हटा दिया। यह रास्ता खुलने से खास तौर पर उन लोगों को सुविधा होगी जो हर रोज दिल्ली और बहादुरगढ़ के बीच आवागमन करते हैं। इन लोगों में फैक्ट्रियों में मजदूरों की संख्या हजारों में है।
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ग्यारह महीने बाद रास्ता खुलते ही दोनों तरफ से लोगों ने आना-जाना शुरू कर दिया। ठीक हरियाणा की सीमा पर बहादुरगढ़ पुलिस ने नाका लगाकर केवल दोपहिया वाहनों और पैदल राहगीरों को ही दिल्ली की ओर जाने दिया तो दिल्ली पुलिस ने टीकरी बार्डर मेट्रो स्टेशन के निकट नाका लगाकर केवल दोपहिया वाहनों और पैदल राहगीरों को हरियाणा के तरफ आने दिया। दिल्ली की तरफ से आई एंबुलेंस को पुलिस व किसानों ने एक बैरिकेड हटाकर निकलवाया।
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किसानों ने कहा, एक साइड का रास्ता फिलहाल नहीं खोलेंगे
वहीं, किसान नेताओं ने यह साफ कर दिया है कि एक साइड का भी पूरा रास्ता फिलहाल वह नहीं खोलेंगे। रास्ता खोलने को लेकर शनिवार तक हुई कवायद की पूरी रिपोर्ट वे 6 नवंबर को सिंघु बार्डर पर होने वाली संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में रखेंगे। उसके बाद मोर्चा की केंद्रीय कमेटी के निर्णय पर ही टीकरी बार्डर से रास्ता खोलने को लेकर अगली कार्रवाई की जाएगी।
दिल्ली पुलिस के अधिकारी रास्ता खोलने के लिए किसान नेताओं के साथ शनिवार सुबह ही बात करने लगे थे। सुबह किसान नेताओं ने पुलिस अधिकारियों के बुलावे पर जाकर बातचीत की, लेकिन बात सिरे नहीं चढ़ी। इस पर बहादुरगढ़ के उद्यमियों ने पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में किसान नेताओं से निवेदन किया। इन उद्यमियों में बहादुरगढ़ चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के महासचिव सुभाष जग्गा, उपाध्यक्ष विकास आनंद सोनी व पवन जैन भी शामिल थे। लेकिन किसान नेता कामर्शियल वाहनों को रास्ता देने के लिए तैयार नहीं हुए और केवल पांच फुट का ही रास्ता देने पर अड़े रहे। आखिर करीब एक बजे किसानों और अधिकारियों में ढाई-ढाई फुट रास्ता देने की सहमति बनी। इसके बावजूद उद्यमियों ने राहत महसूस नहीं की।
इन अधिकारियों ने की मशक्कत
दिल्ली पुलिस की तरफ से डीसीपी परविंदर सिंह, एसीपी महेंद्र कुमार और मुंडका थारा प्रभारी इंस्पेक्टर गुलशन नागपाल, हरियाणा से बहादुरगढ़ के एसडीएम भूपेंद्र सिंह व डीएसपी पवन कुमार ने रास्ता खुलवाने के लिए किसानों से बातचीत की। आंदोलनकारियों की ओर से किसान नेता बूटा सिंह बुर्जगिल, जोगिंदर नैन, जगजीत सिंह दल्लेवाल विकास सीसर, रवि आजाद, जियालाल, बारूराम व जोगिंदर सिंह तालूवाला ने अधिकारियों से बातचीत की।
हालांकि इतना थोड़ा सा रास्ता खुलने से भी दोपहिया सवार और पैदल राहगीर खुश नजर आए। दिल्ली से हरियाणा आ रहे बाइक सवार राकेश ने कहा कि 11 महीने से उसको बाबा हरीदास नगर की कई गलियों में से घूमकर बार्डर पार करना पड़ता था। अधिकतर गलियां टूट-फूटी हैं, संकरी हैं या उनमें भीड़भाड़ रहती है। अब उस समस्या से राहत मिल गई है।
बार्डर से रास्ता खोलने के लिए जब बैरिकेड हटाए जा रहे थे तो देखने वालों की भीड़ लग गई। यहां दुकानें चलाने वाले और फैक्ट्रियों में काम करने वाले लोग राहत महसूस कर रहे थे। बुजुर्ग महिला सावित्री ने भगवान का शुक्रिया किया। उन्होंने बताया कि वह नांगलोई से हर रोज कपड़े बेचने के लिए बार्डर पार करके आसपास की कालोनियों में आती है। रास्ता बंद होने से उन्हें टीकरी टर्मिनल पर उतरकर अपने कपड़ों की गठरी सिर पर रख कई गलियों में घूमकर आना पड़ता था, लेकिन अब परेशानी नहीं होगी।
वर्जन
यह हरियाणा पुलिस, दिल्ली पुलिस व प्रशासन की बड़ी जीत है। फिलहाल कुछ बातों पर सहमति बनी है। कोशिश है कि पूरा रास्ता खोला जाए। हम यह भी कोशिश कर रहे हैं कि पांच फुट से ज्यादा रोड खोला जाए और चौपहिया वाहनों को भी निकलने दिया जाए। यहां पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और हम हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। हमारी तरफ से रास्ते पर कोई रोक नहीं है।
- परविंदर सिंह, डीसीपी, आउटर सर्कल
वर्जन
हमने पांच फुट चौड़ा रास्ता खोलने पर सहमति दी है। दरअसल ये औद्योगिक क्षेत्र है, इसलिए मजदूरों और उद्यमियों की समस्या को देखते हुए हमने ये फैसला लिया है। इस रास्ते से केवल दोपहिया, एंबुलेंस और पैदल आने-जाने वाले निकल सकेंगे। रास्ता केवल सुबह 7 बजे से शाम 8 बजे तक खुला रहेगा। रात को सिर्फ एंबुलेंस को निकलने दिया जाएगा। रात को तेज गति वाहन हादसा न कर दें, इसलिए रात को वाहनों को नहीं आने देंगे।
- बूटा सिंह बुर्जगिल, किसान नेता
वर्जन
हमारी कोशिशों का उचित लाभ नहीं मिला। जितना रास्ता खोला गया है उससे उद्योगों को कोई फायदा नहीं होने वाला। हमारे मालवाहक वाहन नहीं आ सकते। हर रोज करोड़ों का नुकसान हो रहा है। कारों को भी रास्ता नहीं दिया गया है, जबकि अधिकतर उद्यमी दिल्ली में रहते हैं। हम लोगों को 10-12 किलोमीटर अधिक घूमकर आना पड़ता है। हम किसानों और सरकार से फिर अपील करते हैं कि कम से कम एक साइड की पूरी सड़क खोली जाए।
- सुभाष जग्गा, महासचिव, बीसीसीआई
वर्जन
टीकरी बार्डर से रास्ता खोलकर केवल औपचारिकता पूरी की गई है। बार्डर बंद होने से हम लोगों को भारी नुकसान हो रहा है। हमारा व्यवसाय घाटे का सौदा बन गया है। नए कृषि कानून बनाने में हमारा कोई कुसूर नहीं है। किसानों को चाहिए कि दूसरों को नुकसान नहीं पहुंचाएं। आंदोलनकारियों को सरकार से लड़ना चाहिए।
- दीपक कुमार, ट्रांसपोर्टर