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Jhajjar-Bahadurgarh News: पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले सरकारी स्कूल के बच्चों का होगा सर्वे
Sat, 18 Nov 2023 01:35 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Sat, 18 Nov 2023 01:35 AM IST
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झज्जर। बीच में ही पढ़ाई छोड़ने वाले सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों को दोबारा स्कूल में दाखिले कराने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा सर्वे करवाया जाएगा। सबसे पहले स्कूल स्तर पर सर्वे होगा। इसके लिए 20 से 28 नवंबर तक का समय तक किया गया है। इसमें एजुकेशन वॉलंटियर अपने एरिया में सर्वे करेंगे और स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की सूची तैयार करेंगे। इसका मकसद बच्चों के स्कूल छोड़ने की वजह पता लगाकर शिक्षा विभाग और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से उनका स्कूल में दाखिला कराना है। स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद ने इसके आदेश जारी किए हैं।
यह सूची संबंधित स्कूल मुखिया को दी जाएगी। स्कूल मुखिया आगे सूची कलस्टर हैड को साैंपेगा। इसके बाद कलस्टर स्तर पर कलस्टर मुखिया द्वारा 29 व 30 नवंबर को अपने कलस्टर के तहत आने वाले स्कूलों की सूची तैयार करेंगे और उसे उसका रिकार्ड खंड शिक्षा अधिकारी , ब्लाक रिसोर्स काॅर्डिनेटर को सौंपेगा। इसके बाद खंड स्तर पर एक व दो दिसंबर को ब्लाक मुखिया अपने सभी कलस्टर के तहत आने वाले स्कूलाें की सूची तैयार करेंगे और उसे जिला परियोजना संयोजक को भेजेंगे। इसके बाद जिला स्तर पर जिला परियोजना संयोजक द्वारा 4 व 5 दिसंबर को अपने सभी ब्लॉक की सूची तैयार करनी होगी। उसे मुख्यालय को दिए गए प्रोफार्मा के अनुुसार भेजनी होगी।
ऐसे होगा सर्वे का काम
जिला परियोजना संयोजक द्वारा एडीसी की अध्यक्षता में एनजीओ, बीईओ, बीईईओ, एपीसी, एबीआरसी, एजुकेशन वालेंटियर, जिला काॅर्डिनेटर स्काउट एंड गाइड, एनएसएस की बैठक बुलाई जाएगी। यह सर्वे एजुकेशन वालेंटियर, एबीआरसी, स्काउट, गाइड, एनएसएस, एनसीसी के वॉलंटियर करेंगे। इसमें एससी, एसटी, स्ट्रीट चिल्ड्रन, भीख मांगने वाले, अनाथ, बेघर, माइग्रेंट के बच्चे शामिल होंगे। ब्लाॅक स्तर पर बीईओ नोडल अधिकारी होंगे और अपने एरिया की शत-प्रतिशत सर्वे को कवर कराने की उनकी जिम्मेदारी होगी। कलस्टर स्तर पर कलस्टर हैड सभी स्कूल मुखियाओं से समन्वय करेंगे और शिक्षकों को उनकी ड्यूटी देंगे। बीईओ, बीआरसी और एपीसी सर्वे टीम की मॉनिटरिंग करेंगे और एबीआरसी स्कूल मुखिया के फाइनल सर्वे को सत्यापित करेंगे। स्कूल स्तर पर मुखिया सभी ईवी, स्काउट्स, गाइडस, एनएसएस टीचर, एसएमसी सदस्य, पंचायत सदस्य, आंगबाड़ी वर्कर, गांव के नंबरदार, एनजीओ से बैठक करेंगे। स्कूल मुखिया द्वारा इन सभी को कलस्टर हैड द्वारा तैयार किए गए एरिया के बारे में जानकारी देंगे। सर्वे में सामने आए डाटा को सरपंच या पार्षद और एसएमसी द्वारा प्रमाणित किया जाएगा कि कोई बच्चा स्कूल से उनके एरिया का ड्रापआउट नहीं है।
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सर्वे में यह जानकारी प्राेफार्मा में भरी जाएगी...
प्राथमिक स्तर (7 से 14 साल और 15 से 19)
-6 साल के बच्चे जो स्कूल में सीधे दाखिल हुए
-7 से 10 साल के बच्चों की संख्या
-11 से 14 साल के बच्चों की संख्या
-7 से 14 साल के बच्चे जो विशेष ट्रेनिंग चाहते हैं।
-कितने बच्चे माइग्रेट लेबर परिवारों से संबंध रखते हैं।
-क्या बच्चे का आधार कार्ड है।
-कितने बच्चे के नाम स्कूल में नहीं लिखे गए।
-कितने बच्चे ड्रापआउट हैं।
-विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की संख्या
-एजुकेशन रजिस्टर स्कूलों में व्यवस्थित किया जा रहा है।
-15 से 19 साल के बच्चे, जिनको विशेष ट्रेनिंग देने की जरूरत है।
वर्जन
ड्रापआउट बच्चों के लिए सर्वे के निर्देश मिल चुके हैं। उसके आदेश संबंधित अधिकारियों को जारी कर दिए गए हैं। मीटिंग कर इसकी कार्रवाई करने को कहा गया है ताकि ड्रापआउट बच्चों को दोबारा स्कूल तक लाया जा सके।
विनोद लांबा, जिला परियोजना संयोजक, समग्र शिक्षा अभियान, झज्जर
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यह सूची संबंधित स्कूल मुखिया को दी जाएगी। स्कूल मुखिया आगे सूची कलस्टर हैड को साैंपेगा। इसके बाद कलस्टर स्तर पर कलस्टर मुखिया द्वारा 29 व 30 नवंबर को अपने कलस्टर के तहत आने वाले स्कूलों की सूची तैयार करेंगे और उसे उसका रिकार्ड खंड शिक्षा अधिकारी , ब्लाक रिसोर्स काॅर्डिनेटर को सौंपेगा। इसके बाद खंड स्तर पर एक व दो दिसंबर को ब्लाक मुखिया अपने सभी कलस्टर के तहत आने वाले स्कूलाें की सूची तैयार करेंगे और उसे जिला परियोजना संयोजक को भेजेंगे। इसके बाद जिला स्तर पर जिला परियोजना संयोजक द्वारा 4 व 5 दिसंबर को अपने सभी ब्लॉक की सूची तैयार करनी होगी। उसे मुख्यालय को दिए गए प्रोफार्मा के अनुुसार भेजनी होगी।
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ऐसे होगा सर्वे का काम
जिला परियोजना संयोजक द्वारा एडीसी की अध्यक्षता में एनजीओ, बीईओ, बीईईओ, एपीसी, एबीआरसी, एजुकेशन वालेंटियर, जिला काॅर्डिनेटर स्काउट एंड गाइड, एनएसएस की बैठक बुलाई जाएगी। यह सर्वे एजुकेशन वालेंटियर, एबीआरसी, स्काउट, गाइड, एनएसएस, एनसीसी के वॉलंटियर करेंगे। इसमें एससी, एसटी, स्ट्रीट चिल्ड्रन, भीख मांगने वाले, अनाथ, बेघर, माइग्रेंट के बच्चे शामिल होंगे। ब्लाॅक स्तर पर बीईओ नोडल अधिकारी होंगे और अपने एरिया की शत-प्रतिशत सर्वे को कवर कराने की उनकी जिम्मेदारी होगी। कलस्टर स्तर पर कलस्टर हैड सभी स्कूल मुखियाओं से समन्वय करेंगे और शिक्षकों को उनकी ड्यूटी देंगे। बीईओ, बीआरसी और एपीसी सर्वे टीम की मॉनिटरिंग करेंगे और एबीआरसी स्कूल मुखिया के फाइनल सर्वे को सत्यापित करेंगे। स्कूल स्तर पर मुखिया सभी ईवी, स्काउट्स, गाइडस, एनएसएस टीचर, एसएमसी सदस्य, पंचायत सदस्य, आंगबाड़ी वर्कर, गांव के नंबरदार, एनजीओ से बैठक करेंगे। स्कूल मुखिया द्वारा इन सभी को कलस्टर हैड द्वारा तैयार किए गए एरिया के बारे में जानकारी देंगे। सर्वे में सामने आए डाटा को सरपंच या पार्षद और एसएमसी द्वारा प्रमाणित किया जाएगा कि कोई बच्चा स्कूल से उनके एरिया का ड्रापआउट नहीं है।
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सर्वे में यह जानकारी प्राेफार्मा में भरी जाएगी...
प्राथमिक स्तर (7 से 14 साल और 15 से 19)
-6 साल के बच्चे जो स्कूल में सीधे दाखिल हुए
-7 से 10 साल के बच्चों की संख्या
-11 से 14 साल के बच्चों की संख्या
-7 से 14 साल के बच्चे जो विशेष ट्रेनिंग चाहते हैं।
-कितने बच्चे माइग्रेट लेबर परिवारों से संबंध रखते हैं।
-क्या बच्चे का आधार कार्ड है।
-कितने बच्चे के नाम स्कूल में नहीं लिखे गए।
-कितने बच्चे ड्रापआउट हैं।
-विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की संख्या
-एजुकेशन रजिस्टर स्कूलों में व्यवस्थित किया जा रहा है।
-15 से 19 साल के बच्चे, जिनको विशेष ट्रेनिंग देने की जरूरत है।
वर्जन
ड्रापआउट बच्चों के लिए सर्वे के निर्देश मिल चुके हैं। उसके आदेश संबंधित अधिकारियों को जारी कर दिए गए हैं। मीटिंग कर इसकी कार्रवाई करने को कहा गया है ताकि ड्रापआउट बच्चों को दोबारा स्कूल तक लाया जा सके।
विनोद लांबा, जिला परियोजना संयोजक, समग्र शिक्षा अभियान, झज्जर