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Jhajjar-Bahadurgarh News: एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचने तक रामभरोसे मरीजों की जान
Tue, 09 Jul 2024 06:34 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Tue, 09 Jul 2024 06:34 AM IST
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सिविल अस्पताल झज्जर में खड़ी एंबुलेंस।
झज्जर। बीमार और घायल मरीजों को अस्पताल तक लाने के लिए सरकार से सरकारी अस्पतालों को एंबुलेंस तो उपलब्ध करा दी है लेकिन इनपर रहने वाले इमरजेंसी मेडिकल टेक्निशियन (ईएमटी) की कमी है। जिले में 24 एंबुलेंस के लिए तीन शिफ्टाें में 72 टीएमटी की जरूरत है लेकिन विभाग के पास सिर्फ 27 ही उपलब्ध हैं। ऐसे में बिना टीएमटी के ही एंबुलेंस भेजनी पड़ रही है। जिससे रास्ते में मरीजों की जान मेडिकल टेक्नीशियन के अभाव में राम भरोसे रहती है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से भी मुख्यालय को ईएमटी की कमी के बारे में अवगत कराया है, लेकिन कोई नई नियुक्ति इनकी नहीं की जा रही है।
किसी भी इमरजेंसी में मरीज को एंबुलेंस से अस्पताल तक लाने के लिए एंबुलेंस के अंदर इमरजेंसी मेडिकल टेक्निशियन होता है। वह रास्ते में मरीज को प्राथमिक उपचार देता है। इसका काम एंबुलेंस में ऑक्सीजन, ग्लूकोज लगाना और दवा आदि देना है। एक एंबुलेंस पर एक चालक और एक मेडिकल टेक्निशियन (ईएमटी) की तैनाती है। यह लोग 8-8 घंटे की शिफ्ट में ड्यूटी करते हैं। जिले में 24 एंबुलेंस स्वास्थ्य विभाग के पास हैं। ऐसे में कुल 72 टीएमटी की आवश्यकता है लेकिन विभाग के पास केवल 24 टीएमटी हैं। ऐसे में कुछ एंबूलेंस को बिना टीएमटी के भी भेजना पड़ता है। ऐसे में मरीज की देखरेख के लिए रास्ते में कोई नहीं होता है। मेडिकल स्तर पर मरीज का प्राथमिक उपचार भी संभव नहींं होता ऐसे में मरीज की जान रामभरोसे रहती है। 72 चालकों की जरूरत है लेकिन विभाग के पास 65 उपलब्ध हैं। नियमानुसार तो सात चालक कम हैं लेकिन फिलहाल काम चल रहा है।
सीएम फ्लाइंग भी कर चुकी जांच
सिविल अस्पताल झज्जर में 27 जून को सीएम फ्लाइंग भी रेफरल सेवाओं की जांच कर चुकी है। तब भी एंबुलेंस में ईएमटी की संख्या कम मिली थी। एक एंबुलेंस पर ईएमटी तैनात ही नहीं मिला था।
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वर्जन
ईएमटी की कमी है। उसके लिए मुख्यालय से ही भर्ती की जाती है। जब भी जानकारी मांगी जाती है तो उसके बारे में सूचना दे दी जाती है। जिले में ईएमटी की जरूरत है।
डॉ. शैलेंद्र डोगरा, उप सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, झज्जर
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किसी भी इमरजेंसी में मरीज को एंबुलेंस से अस्पताल तक लाने के लिए एंबुलेंस के अंदर इमरजेंसी मेडिकल टेक्निशियन होता है। वह रास्ते में मरीज को प्राथमिक उपचार देता है। इसका काम एंबुलेंस में ऑक्सीजन, ग्लूकोज लगाना और दवा आदि देना है। एक एंबुलेंस पर एक चालक और एक मेडिकल टेक्निशियन (ईएमटी) की तैनाती है। यह लोग 8-8 घंटे की शिफ्ट में ड्यूटी करते हैं। जिले में 24 एंबुलेंस स्वास्थ्य विभाग के पास हैं। ऐसे में कुल 72 टीएमटी की आवश्यकता है लेकिन विभाग के पास केवल 24 टीएमटी हैं। ऐसे में कुछ एंबूलेंस को बिना टीएमटी के भी भेजना पड़ता है। ऐसे में मरीज की देखरेख के लिए रास्ते में कोई नहीं होता है। मेडिकल स्तर पर मरीज का प्राथमिक उपचार भी संभव नहींं होता ऐसे में मरीज की जान रामभरोसे रहती है। 72 चालकों की जरूरत है लेकिन विभाग के पास 65 उपलब्ध हैं। नियमानुसार तो सात चालक कम हैं लेकिन फिलहाल काम चल रहा है।
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सीएम फ्लाइंग भी कर चुकी जांच
सिविल अस्पताल झज्जर में 27 जून को सीएम फ्लाइंग भी रेफरल सेवाओं की जांच कर चुकी है। तब भी एंबुलेंस में ईएमटी की संख्या कम मिली थी। एक एंबुलेंस पर ईएमटी तैनात ही नहीं मिला था।
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ईएमटी की कमी है। उसके लिए मुख्यालय से ही भर्ती की जाती है। जब भी जानकारी मांगी जाती है तो उसके बारे में सूचना दे दी जाती है। जिले में ईएमटी की जरूरत है।
डॉ. शैलेंद्र डोगरा, उप सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, झज्जर