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Jhajjar-Bahadurgarh News: दो चपरासियों पर पुस्तकालय का भार, उदासीन बने जिम्मेदार
Wed, 25 Oct 2023 12:36 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Wed, 25 Oct 2023 12:36 AM IST
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झज्जर। शहर के तहसील रोड पुरानी नगर परिषद कार्यालय परिसर में स्थित बाबू बाल मुकुंद गुप्त पुस्तकालय को कई साल से दो चपरासी संभाल रहे हैं। कई साल से इस पुस्तकालय में न तो पुस्तकालय अध्यक्ष हैं न हीं कोई लिपिक है जो पुस्तकों का लेखा-जोखा रख सके। एक पुरुष और महिला चपरासी ही पुस्तकों का रखरखाव का काम कर रहे हैं।
यह पुस्तकालय नेहरू स्नातकोतर महाविद्यालय के अंतर्गत संचालित है। नेहरू कॉलेज के प्राचार्य व अन्य स्टाफ पुस्तकालय को संभालने के लिए आते तो हैं, लेकिन मुख्य कमी स्टाफ की है, जिसको कई वर्ष से पूरा नहीं किया सका है। इसके चलते दो चपरासी ही पुस्तकालय को चलाने का काम कर रहे हैं। बाबू बालमुकुंद गुप्त पुस्तकालय का भव्य भवन छह जून 2022 को करीब एक करोड़ 77 लाख रुपये की लागत से बनकर तैयार हो गया था। 12 सितंबर 2022 को शहर के घंटाघर से बाबू बालमुकुंद पुस्तकालय को नए लाइब्रेरी परिसर में स्थानांतरण किया गया था। इससे पहले शहर के डॉ. आंबेडकर चौक के पास लाइब्रेरी हाेती थी। चौक और शहर के बीच में होने के कारण बच्चों को शोर गुल होने के कारण अध्ययन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था।
बाहर से मंगवाने पड़ते हैं पानी के कैंपर
पुस्तकालय में पानी के कैंपर बाहर से मंगवा जाते हैं। पुस्तकालय में पानी के लिए वाटर कूलर तो हैं, लेकिन बिजली अव्यवस्थित रूप से आने के कारण इस पुस्तकालय में पीने के पानी की व्यवस्था न के बराबर है।
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सैकड़ों बच्चे करते हैं अध्ययन
सुबह करीब 9 बजे से ही पुस्तकालय में सैकड़ों की संख्या में लड़के- लड़कियां व बुजुर्गों का अध्ययन करने के लिए आना शुरू हो जाता है। इस बीच लड़के व लड़कियों को बुजुर्गों को कौन सी पुस्तक कौन से विषय की चाहिए, इन सबकी जिम्मेदारी दो चपरासियों की रहती है। प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान करीब 500 बच्चे यहां आते हैं। बाबू बालमुकुंद गुप्त पुस्तकालय में करीब 18 हजार पुस्तकों का संग्रह है।
बच्चे कर रहे इंटरनेट की मांग
बाबू बालमुकुंद गुप्त पुस्तकालय में अध्ययन करने वाले बच्चों ने बताया कि पुस्तकालय में यदि इंटरनेट वाई-फाई की सुविधा दे दी जाए तो यह हाइटेक बन जाए। बच्चों ने बताया कि बाबू बालमुकुंद गुप्त पुस्तकालय में काफी पठनीय सामग्री हैं।
वर्जन
बाबू बालमुकुंद पुस्तकालय के लिए पुस्कालयाध्यक्ष व लिपिक के कई बार मुख्यालय को डिमांड भेज दी गई हैं। काफी दिनों से पुस्कालयाध्यक्ष और लिपिक की बेहद जरूरत है। दो कर्मचारी बहुत मेहनत से काम कर रहें हैं। नेहरू कॉलेज से प्राचार्य भी समय-समय पर पुस्तकालय का दौरा करते हैं।
डॉ. सुरेंद्र कुमार पूनिया, कार्यकारी पुस्कालयाध्यक्ष, झज्जर
यह पुस्तकालय नेहरू स्नातकोतर महाविद्यालय के अंतर्गत संचालित है। नेहरू कॉलेज के प्राचार्य व अन्य स्टाफ पुस्तकालय को संभालने के लिए आते तो हैं, लेकिन मुख्य कमी स्टाफ की है, जिसको कई वर्ष से पूरा नहीं किया सका है। इसके चलते दो चपरासी ही पुस्तकालय को चलाने का काम कर रहे हैं। बाबू बालमुकुंद गुप्त पुस्तकालय का भव्य भवन छह जून 2022 को करीब एक करोड़ 77 लाख रुपये की लागत से बनकर तैयार हो गया था। 12 सितंबर 2022 को शहर के घंटाघर से बाबू बालमुकुंद पुस्तकालय को नए लाइब्रेरी परिसर में स्थानांतरण किया गया था। इससे पहले शहर के डॉ. आंबेडकर चौक के पास लाइब्रेरी हाेती थी। चौक और शहर के बीच में होने के कारण बच्चों को शोर गुल होने के कारण अध्ययन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था।
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बाहर से मंगवाने पड़ते हैं पानी के कैंपर
पुस्तकालय में पानी के कैंपर बाहर से मंगवा जाते हैं। पुस्तकालय में पानी के लिए वाटर कूलर तो हैं, लेकिन बिजली अव्यवस्थित रूप से आने के कारण इस पुस्तकालय में पीने के पानी की व्यवस्था न के बराबर है।
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सैकड़ों बच्चे करते हैं अध्ययन
सुबह करीब 9 बजे से ही पुस्तकालय में सैकड़ों की संख्या में लड़के- लड़कियां व बुजुर्गों का अध्ययन करने के लिए आना शुरू हो जाता है। इस बीच लड़के व लड़कियों को बुजुर्गों को कौन सी पुस्तक कौन से विषय की चाहिए, इन सबकी जिम्मेदारी दो चपरासियों की रहती है। प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान करीब 500 बच्चे यहां आते हैं। बाबू बालमुकुंद गुप्त पुस्तकालय में करीब 18 हजार पुस्तकों का संग्रह है।
बच्चे कर रहे इंटरनेट की मांग
बाबू बालमुकुंद गुप्त पुस्तकालय में अध्ययन करने वाले बच्चों ने बताया कि पुस्तकालय में यदि इंटरनेट वाई-फाई की सुविधा दे दी जाए तो यह हाइटेक बन जाए। बच्चों ने बताया कि बाबू बालमुकुंद गुप्त पुस्तकालय में काफी पठनीय सामग्री हैं।
वर्जन
बाबू बालमुकुंद पुस्तकालय के लिए पुस्कालयाध्यक्ष व लिपिक के कई बार मुख्यालय को डिमांड भेज दी गई हैं। काफी दिनों से पुस्कालयाध्यक्ष और लिपिक की बेहद जरूरत है। दो कर्मचारी बहुत मेहनत से काम कर रहें हैं। नेहरू कॉलेज से प्राचार्य भी समय-समय पर पुस्तकालय का दौरा करते हैं।
डॉ. सुरेंद्र कुमार पूनिया, कार्यकारी पुस्कालयाध्यक्ष, झज्जर