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Jhajjar-Bahadurgarh News: खेल व खनन विभाग के अधिकारी करेंगे मौके का निरीक्षण
Tue, 06 Feb 2024 04:00 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Tue, 06 Feb 2024 04:00 AM IST
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बहादुरगढ़। मेला ग्राउंड में बने आंबेडकर स्टेडियम की जमीन से गौधन सेवा समिति द्वारा तीन से चार फीट मिट्टी उठाने के मामले में खेल और खनन विभाग के अधिकारी जल्द ही मौके का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि चाहे वह सरकारी जमीन हो या फिर प्राइवेट। इसकी अनुमति लेना जरूरी होता है जबकि समिति द्वारा इस संबंध में किसी तरह की कोई अनुमति नहीं ली गई। दरअसल समिति द्वारा चलाई जा रही नंदीशाला में खनन विभाग और जिला प्रशासन की अनुमति के बिना ही तीन से चार फीट गहराई तक मिट्टी उठा ली गई। इस मिट्टी को नंदीशाला में एक और शेड बनाने के लिए प्रयोग किया जा रहा है। स्टेडियम की जिस जमीन से मिट्टी उठाई गई है, वहां नगर परिषद के ठेकेदारों द्वारा मुफ्त में सीमेंट कंक्रीट का मलबा व अन्य कूड़ा-कर्कट डालकर उसे भरा जा रहा है। ऐसे में यहां पर खेल विभाग की ओर से भविष्य में खेल मैदानों को बनाने में काफी परेशानी हो सकती है। जिला खेल अधिकारी ललिता मलिक ने बताया कि उच्चाधिकारियों के मौखिक आदेश पर हमने गोशाला चलाने के लिए जमीन दे रखी है, न कि हमारी जमीन से मिट्टी उठाकर उसका प्रयोग करने तथा वहां पर कूड़ा-कर्कट व निर्माण सामग्री का मलबा डालने की। इस जमीन को खाली करने के नोटिस पहले भी दिए गए हैं। अब वे पहले तो अपने कोच की ड्यूटी लगाएंगी ताकि मिट्टी खनन और मलबा डालने की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जा सके। दूसरा वे अभी चंडीगढ़ में हैं। वहां से आते ही गोशाला समिति को जल्द ही इस जमीन को खाली करने का नोटिस थमाएंगी। यहां पर हमने अपने खेल मैदान बनाने हैं। मिट्टी उठाकर मलबा डालने से खेल मैदान बनाने में परेशानी होगी।
-ललिता मलिक, जिला खेल अधिकारी, झज्जर।
वर्जन...
ेबिना अनुमति के मिट्टी उठाना गैर कानूनी है। अगर कहीं से भी मिट्टी की खोदाई करनी है तो इसकी अनुमति जरूरी है, चाहे वह सरकारी जमीन हो या फिर प्राइवेट। वे खुद अपने कर्मचारियों को साथ लेकर संबंधित जमीन का निरीक्षण करेंगे और उसके बाद आगामी कार्रवाई करेंगे।
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-बलराम सिंह, खनन अधिकारी, रोहतक।
वर्जन...
गोशाला में नंदियों की संख्या बढ़ाने के लिए शैड बनाने के लिए मिट्टी उठाई गई है। नगर परिषद के ठेकेदारों ने हमें मुफ्त में मलबा दिया है जिसे जहां से मिट्टी उठाई गई है वहां डाला जा रहा है। यह मलबा गलियों को उखाड़कर लाया जा रहा है। नंदीशाला में फिलहाल 220 नंदी रखे गए हैं। हर रोज करीब 25 हजार रुपये का खर्च आ रहा है। हमें दान के रूप में हर रोज मात्र 200-250 रुपये ही प्राप्त हो रहे हैं। अब वे करीब 400 नंदी और रखने की व्यवस्था करने में जुटे हुए हैं।
-कृष्ण चावला, गोधन सेवा समिति
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अधिकारियों का कहना है कि चाहे वह सरकारी जमीन हो या फिर प्राइवेट। इसकी अनुमति लेना जरूरी होता है जबकि समिति द्वारा इस संबंध में किसी तरह की कोई अनुमति नहीं ली गई। दरअसल समिति द्वारा चलाई जा रही नंदीशाला में खनन विभाग और जिला प्रशासन की अनुमति के बिना ही तीन से चार फीट गहराई तक मिट्टी उठा ली गई। इस मिट्टी को नंदीशाला में एक और शेड बनाने के लिए प्रयोग किया जा रहा है। स्टेडियम की जिस जमीन से मिट्टी उठाई गई है, वहां नगर परिषद के ठेकेदारों द्वारा मुफ्त में सीमेंट कंक्रीट का मलबा व अन्य कूड़ा-कर्कट डालकर उसे भरा जा रहा है। ऐसे में यहां पर खेल विभाग की ओर से भविष्य में खेल मैदानों को बनाने में काफी परेशानी हो सकती है। जिला खेल अधिकारी ललिता मलिक ने बताया कि उच्चाधिकारियों के मौखिक आदेश पर हमने गोशाला चलाने के लिए जमीन दे रखी है, न कि हमारी जमीन से मिट्टी उठाकर उसका प्रयोग करने तथा वहां पर कूड़ा-कर्कट व निर्माण सामग्री का मलबा डालने की। इस जमीन को खाली करने के नोटिस पहले भी दिए गए हैं। अब वे पहले तो अपने कोच की ड्यूटी लगाएंगी ताकि मिट्टी खनन और मलबा डालने की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जा सके। दूसरा वे अभी चंडीगढ़ में हैं। वहां से आते ही गोशाला समिति को जल्द ही इस जमीन को खाली करने का नोटिस थमाएंगी। यहां पर हमने अपने खेल मैदान बनाने हैं। मिट्टी उठाकर मलबा डालने से खेल मैदान बनाने में परेशानी होगी।
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-ललिता मलिक, जिला खेल अधिकारी, झज्जर।
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ेबिना अनुमति के मिट्टी उठाना गैर कानूनी है। अगर कहीं से भी मिट्टी की खोदाई करनी है तो इसकी अनुमति जरूरी है, चाहे वह सरकारी जमीन हो या फिर प्राइवेट। वे खुद अपने कर्मचारियों को साथ लेकर संबंधित जमीन का निरीक्षण करेंगे और उसके बाद आगामी कार्रवाई करेंगे।
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-बलराम सिंह, खनन अधिकारी, रोहतक।
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गोशाला में नंदियों की संख्या बढ़ाने के लिए शैड बनाने के लिए मिट्टी उठाई गई है। नगर परिषद के ठेकेदारों ने हमें मुफ्त में मलबा दिया है जिसे जहां से मिट्टी उठाई गई है वहां डाला जा रहा है। यह मलबा गलियों को उखाड़कर लाया जा रहा है। नंदीशाला में फिलहाल 220 नंदी रखे गए हैं। हर रोज करीब 25 हजार रुपये का खर्च आ रहा है। हमें दान के रूप में हर रोज मात्र 200-250 रुपये ही प्राप्त हो रहे हैं। अब वे करीब 400 नंदी और रखने की व्यवस्था करने में जुटे हुए हैं।
-कृष्ण चावला, गोधन सेवा समिति
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