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विश्व थैलीसीमिया दिवस पर विशेष : बच्चों पर न आएं आंच, शादी से पहले कराएं जांच

Thu, 08 May 2025 02:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Thu, 08 May 2025 02:06 AM IST
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Special on World Thalassemia Day: Do not harm your children, get them tested before marriage
बहादुरगढ़। थैलेसीमिया आनुवांशिक रक्त रोग है और थैलेसिमिया बच्चे को जन्म से उम्र भर रक्त चढ़ाना पड़ता है। इस घातक बीमारी से बच्चे को बचाना है तो शादी से पहले युवक-युवती को रक्त की जांच करा लेनी चाहिए, ताकि पता चल जाए कि उनमें थैलेसीमिया के लक्षण तो नहीं हैं। इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर वर्ष 8 मई को थैलेसीमिया दिवस मनाया जाता है।
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नागरिक अस्पताल के एसएमओ डॉ. विनय देशवाल ने बताया कि इस रोग के होने पर शरीर की हीमोग्लोबिन निर्माण प्रक्रिया में गड़बड़ी हो जाती है, जिसके कारण रक्तक्षीणता के लक्षण प्रकट होते हैं। इसकी पहचान छह माह की आयु के बाद ही होती है। इसमें रोगी बच्चे के शरीर में रक्त की कमी होने लगती है, जिसके कारण बार-बार बाहरी खून चढ़ाने की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि साल भर में इस तरह के 3-4 मरीज आते हैं।
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पीड़ित मरीज का शरीर दुर्बल और अशक्त
डॉ. देशवाल ने बताया कि सामान्य रूप से शरीर में लाल रक्त कणों की उम्र करीब 120 दिनों की होती है परंतु थैलेसीमिया के कारण इनकी उम्र सिमटकर महज 20 दिन की हो जाती है। इसका सीधा असर शरीर में मौजूद हीमोग्लोबिन पर पड़ता है। हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाने से शरीर दुर्बल हो जाता है और अशक्त होकर हमेशा किसी न किसी बीमारी से ग्रसित रहता है। मरीज को हर 15 से 30 दिन में खून बदलवाना पड़ता है।
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थैलेसीमिया के लक्षण

- बच्चों की त्वचा और नाखूनों में पीलापन आने लगता है।

- आंखें और जीभ भी पीली पड़ने लगती है।

- ऊपरी जबड़े में दोष आ जाता है।

- आंतों में विषमताएं आने लगती हैं।

- दांत निकलने में काफी कठिनाई होने लगती है।

- बच्चे का विकास एकदम रुक जाता है।



ऐसे करें बचाव

- रक्त परीक्षण करवाकर इस रोग की उपस्थिति की पहचान करा लेनी चाहिए।

- शादी करने से पूर्व लड़का एवं लड़की के रक्त का परीक्षण करवाएं।

- गर्भधारण के चार महीने के अंदर भ्रूण का परीक्षण कराना चाहिए।
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