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सेमग्रस्त खेतों का होगा समाधान, विभाग लीज पर लेकर करेगा मत्स्य पालन
अमर उजाला/ब्यूराो/बहादुरगढ़/झज्जजर
Updated Wed, 26 Apr 2017 12:07 AM IST
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मत्स्यय पालन करते किसान
- फोटो : amar ujala
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जिले के उन किसानों के लिए अच्छी खबर है जिन किसानों की भूमि जलभराव से प्रभावित है। ऐसी भूमि को मत्स्य पालन विभाग लीज पर लेगा और उस जमीन पर मछली पालन करेगा। विभाग ने ऐसी भूमि की पहचान भी कर ली है। इस योजना के लिए झज्जर को पॉयलेट प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है। दिल्ली के निकट होने के कारण मछली की खेती करने वाले किसानों को अच्छा लाभ भी मिलता है। जिले का एक किसान मत्स्य रत्न पुरस्कार भी जीत चुका है। मैदानी इलाकों में मछली उत्पादन में हरियाणा तेजी से आगे बढ़ रहा है। किसानों को इससे अच्छी आय भी हो रही है। मगर जिले की करीब 6 हजार एकड़ भूमि ऐसी है, जिस पर जलप्रभाव होने के कारण खेती नहीं हो पाती। ऐसे किसानों को नुकसान होता है। इसलिए कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने इस चुनौती को अवसर में बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस भूमि का सदुपयोग कैसे हो, इसे लेकर पिछले दिनों कृषिमंत्री ने मत्स्य, सिंचाई, पंचायत और कृषि विभाग के अधिकारियों की बैठक बुलाई। इसमें यह तय हुआ की इस भूमि को मत्स्य विभाग लीज पर लेकर मत्स्य पालन करे।
ये हैं प्रमुख गांव
झज्जर के 25 गांवों जिनमें जलभराव की समस्या रहती है। इनमें मातनहेल, गोधड़ी, मुन्दसा, खापड़वास, गवालीसन, मुंडाह़ेड़ा, ढाकला, धौड़, बेरी, जमालपुर, कालियावास, लकड़िया, डीघल सहित 25 गांवों की 6 हजार एकड़ भूमि है। इस जमीन को लीज पर लेकर इस योजना को मूर्त रूप दिया जायेगा। इन गांवों में कृषिमंत्री ओपी धनखड़ का गांव ढाकला भी शामिल है।
इन किसानों को भी मिल सकता है लाभ
राज्य में कोई 4 लाख 15 हजार हेक्टेयर भूमि इस समस्या से प्रभावित है। इसमें से 62728 हेक्टेयर भूमि ऐसी है जहां का जमीनी पानी लेवल (चव्वा) 1.50 मीटर से कम है जबकि 3,52,204 हेक्टेयर भूमि ऐसी है जिसका लेवल 1.5 से 3 मीटर है। इस भूमि से किसान को फसल नहीं मिलती। किसानों को भूमि से आय नहीं होने के कारण उनके लिए यह एक चुनौती बनी हुई है। अब कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने इस चुनौती को अवसर में बदलने के लिये ठोस कदम उठाये हैं। इस बैठक में अधिकारियों की कमेटी को धरातल पर काम करने के निर्देश कृषि मंत्री ने दिए हैं और 20 मई तक रिपोर्ट मांगी है।
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योजना के लिए जिम्मेदारी तय
योजना पर तेजी से काम करने के लिये अथॉरिटी बनाकर जिम्मेदारी भी तय की गई है। इस कमेटी में कृषि, पंचायत, सिंचाई और मत्स्य विभाग के राज्य स्तर के अधिकारी शामिल होंगे। यह कमेटी इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए तेजी से काम करेगी। कृषि विभाग के निदेशक इस कमेटी का संचालन करेंगे, जबकि मत्स्य विभाग के डीजी सचिव होंगे।
इच्छुक किसान बीडीपीओ को दें आवेदन,
अभी तक जलभराव वाली भूमि एक चुनौती बनी हुई है, अब इसे अवसर में बदलने का प्रयास किया है। दिल्ली के साथ का यह क्षेत्र होने के कारण इन जिलों को चुना गया। पैरी अर्बन एग्रीकल्चर को बढ़ावा देने की कृषि मंत्री ओ पी धनखड़ की योजना में ये पॉयलेट प्रोजेक्ट मील का पत्थर साबित हो सकता है। नई योजना के अनुसार किसानों की ऐसी भूमि को मत्स्य पालन विभाग लीज पर लेगा। पंचायत विभाग के निर्धारित रेट के अनुसार इस जमीन को पांच साल के लिए देना होगा। इच्छुक किसान अपने अपने बीडीपीओ को जानकारी दे सकते है। लीज पर ली गई जमीन पर मतस्य विभाग मछली की खेती कराएगा। इससे किसानों की अनुपयोगी भूमि से उनको अच्छी आय हो सकेगी।
झज्जर का किसान बन चुका है मत्स्य रत्न
सूरजकुंड मेले के दौरान जो राज्य स्तरीय पुरस्कार देने की घोषणा की थी। उसमें मछली पालन में मत्स्य रत्न पुरस्कार झज्जर के डावला गांव के जयपाल को मिला था। इस पुरस्कार में उसे एक लाख की राशि और प्रमाण पत्र प्रदान किया गया था। जयपाल बड़े पैमाने पर मछली उत्पादन का काम करते हैं। अब झज्जर जिले में जलभराव की भूमि में मत्स्य पालन होने से यहां के किसान लाभांवित होंगे।
सेमग्रस्त जमीन पर पॉयलेट प्रोजेक्ट चलाकर मछली पालन का कार्य किया जाएगा। अब तक खेती नहीं होने के चलते चुनौती बनी 6 हजार एकड़ भूमि पर मत्स्य पालन कर इसे अवसर में बदलेंगे। किसानों के हित के लिए बेहतर योजना है। योजना का लाभ जल्द ही किसानों को मिलने लगेगा।
ओपी धनखड़, कृषिमंत्री।
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ये हैं प्रमुख गांव
झज्जर के 25 गांवों जिनमें जलभराव की समस्या रहती है। इनमें मातनहेल, गोधड़ी, मुन्दसा, खापड़वास, गवालीसन, मुंडाह़ेड़ा, ढाकला, धौड़, बेरी, जमालपुर, कालियावास, लकड़िया, डीघल सहित 25 गांवों की 6 हजार एकड़ भूमि है। इस जमीन को लीज पर लेकर इस योजना को मूर्त रूप दिया जायेगा। इन गांवों में कृषिमंत्री ओपी धनखड़ का गांव ढाकला भी शामिल है।
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इन किसानों को भी मिल सकता है लाभ
राज्य में कोई 4 लाख 15 हजार हेक्टेयर भूमि इस समस्या से प्रभावित है। इसमें से 62728 हेक्टेयर भूमि ऐसी है जहां का जमीनी पानी लेवल (चव्वा) 1.50 मीटर से कम है जबकि 3,52,204 हेक्टेयर भूमि ऐसी है जिसका लेवल 1.5 से 3 मीटर है। इस भूमि से किसान को फसल नहीं मिलती। किसानों को भूमि से आय नहीं होने के कारण उनके लिए यह एक चुनौती बनी हुई है। अब कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने इस चुनौती को अवसर में बदलने के लिये ठोस कदम उठाये हैं। इस बैठक में अधिकारियों की कमेटी को धरातल पर काम करने के निर्देश कृषि मंत्री ने दिए हैं और 20 मई तक रिपोर्ट मांगी है।
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योजना के लिए जिम्मेदारी तय
योजना पर तेजी से काम करने के लिये अथॉरिटी बनाकर जिम्मेदारी भी तय की गई है। इस कमेटी में कृषि, पंचायत, सिंचाई और मत्स्य विभाग के राज्य स्तर के अधिकारी शामिल होंगे। यह कमेटी इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए तेजी से काम करेगी। कृषि विभाग के निदेशक इस कमेटी का संचालन करेंगे, जबकि मत्स्य विभाग के डीजी सचिव होंगे।
इच्छुक किसान बीडीपीओ को दें आवेदन,
अभी तक जलभराव वाली भूमि एक चुनौती बनी हुई है, अब इसे अवसर में बदलने का प्रयास किया है। दिल्ली के साथ का यह क्षेत्र होने के कारण इन जिलों को चुना गया। पैरी अर्बन एग्रीकल्चर को बढ़ावा देने की कृषि मंत्री ओ पी धनखड़ की योजना में ये पॉयलेट प्रोजेक्ट मील का पत्थर साबित हो सकता है। नई योजना के अनुसार किसानों की ऐसी भूमि को मत्स्य पालन विभाग लीज पर लेगा। पंचायत विभाग के निर्धारित रेट के अनुसार इस जमीन को पांच साल के लिए देना होगा। इच्छुक किसान अपने अपने बीडीपीओ को जानकारी दे सकते है। लीज पर ली गई जमीन पर मतस्य विभाग मछली की खेती कराएगा। इससे किसानों की अनुपयोगी भूमि से उनको अच्छी आय हो सकेगी।
झज्जर का किसान बन चुका है मत्स्य रत्न
सूरजकुंड मेले के दौरान जो राज्य स्तरीय पुरस्कार देने की घोषणा की थी। उसमें मछली पालन में मत्स्य रत्न पुरस्कार झज्जर के डावला गांव के जयपाल को मिला था। इस पुरस्कार में उसे एक लाख की राशि और प्रमाण पत्र प्रदान किया गया था। जयपाल बड़े पैमाने पर मछली उत्पादन का काम करते हैं। अब झज्जर जिले में जलभराव की भूमि में मत्स्य पालन होने से यहां के किसान लाभांवित होंगे।
सेमग्रस्त जमीन पर पॉयलेट प्रोजेक्ट चलाकर मछली पालन का कार्य किया जाएगा। अब तक खेती नहीं होने के चलते चुनौती बनी 6 हजार एकड़ भूमि पर मत्स्य पालन कर इसे अवसर में बदलेंगे। किसानों के हित के लिए बेहतर योजना है। योजना का लाभ जल्द ही किसानों को मिलने लगेगा।
ओपी धनखड़, कृषिमंत्री।