झज्जर में खत्म हुआ वीआईपी कल्चर, अफसरों ने हटाई बत्ती
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वीआईपी कल्चर खत्म करने के लिए मोदी कैबिनेट के द्वारा लिया गया फैसला देशभर में भले ही एक मई से लागू होना हो, लेकिन झज्जर जिले में यह फैसला शनिवार से ही पूर्ण रूप से लागू हो गया है। जिला प्रशासन के तमाम अफसरों ने अपनी गाड़ियों से नीली और लाल रंग की बत्तियां हटा दी हैं। जिसके बाद से अब जिले में वीआईपी कल्चर पूरी तरह से खत्म होता नजर आ रहा है। केंद्रीय कैबिनेट के फैसले को अभी तक केवल पुलिस विभाग के अधिकारियों ने पूरी तरह से फॉलो नहीं किया है। शायद विभाग अभी तक आदेशों की कॉपी का इंतजार कर रहा है। पुलिस विभाग की राईडर, पीसीआर और महिला थाने की कर्मियों को विभाग की तरफ से मिली स्कूटी पर अभी भी नीली के साथ लाल रंग की बत्ती नजर आ रही है।
डीसी ने हटाई थी सबसे पहले बत्ती
गत 20 अप्रैल को मोदी कैबिनेट में जैसे ही गाड़ियों से बत्ती हटाने का फैसला लेने की मीडिया में खबर आई तो डीसी ने उसी दिन की शाम अपनी गाड़ी से बत्ती हटवा दी थी। वहीं, एसडीएम ने भी कहा था कि वे शुक्रवार को अपनी गाड़ी से बत्ती हटा देंगे, जिसके बाद शुक्रवार को उन्होंने गाड़ी से बत्ती हटा दी। लेकिन जिले के कुछ अफसरों की गाड़ियों पर शुक्रवार शाम तक नीली बत्ती नजर आ रही थी। जबकि शनिवार को एडीसी नरहरि सिंह बांगड़, सीटीएम विजय मलिक, डीडीपीओ विशाल की गाड़ियों पर बत्ती नजर नहीं आई।
बहादुरगढ़ के विधायक हटा चुके हैं बत्ती
नेताओं में अब तक केवल बहादुरगढ़ के विधायक नरेश कौशिक ने ही अपनी गाड़ी से बत्ती हटाई है। वहीं, कृषि मंत्री ओपी धनखड़, झज्जर विधायक गीता भुक्कल, बेरी विधायक रघबीर सिंह कादियान दिल्ली एमसीडी चुनाव में व्यस्त हैं। जबकि गीता भुक्कल बत्ती हटाने के फैसले को केवल भाजपा का स्टंट बता रही हैं।
केंद्र सरकार का फैसला मीडिया में आने पर उन्होंने गाड़ी से तुरंत बत्ती हटवा दी थी। जिसके बाद अन्य सभी अफसरों ने अपनी गाड़ियों से बत्तियों को हटा दिया है। सरकार के आदेशों की पालना करवाई जाएगी।
आरसी बिढाण, डीसी झज्जर।
उनके पास अभी गाइडलाइन नहीं आई है। विभागीय अधिकारियों के निर्देश मिलने पर सभी राईडर और पीसीआर से बत्तियां शीघ्र हटवा दी जाएंगी।
चमनलाल, पीआरओ, एसपी झज्जर।