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राकेश टिकैत की भावुक अपील ने आंदोलन में फिर फूंकी जान

Sat, 30 Jan 2021 12:08 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 30 Jan 2021 12:08 AM IST
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Rakesh Tikait's emotional appeal burnt life again
ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर टीकरी बॉर्डर जाते किसान। संवाद - फोटो : Bahadurgarh
गाजीपुर बॉर्डर पर किसान नेता राकेश टिकैत द्वारा की गई भावुक अपील ने एक बार फिर किसान आंदोलन में जान फूंक दी है। वीरवार को जहां टीकरी बॉर्डर पर आंदोलनरत किसानों की संख्या घटने लगी थी, वहीं देर शाम गाजीपुर बॉर्डर पर हुए घटनाक्रम से एकाएक फिर से धरनास्थल पर किसानों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई है।
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शुक्रवार को टीकरी बार्डर पर काफी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और निजी वाहनों में किसान यहां पहुंचे और आंदोलन को अपना समर्थन दिया। आंदोलनरत किसानों के काफिले के चलते दिल्ली-रोहतक मार्ग पर दिनभर जाम की स्थिति बनी रही। यही नहीं वाहनों में सवार किसानों ने जहां किसान एकता जिंदाबाद के नारे लगाए, वहीं शहर में ट्रैक्टरों के माध्यम से पंजाब-हरियाणा भाईचारा जिंदाबाद की घोषणा भी की जाती रही। उधर, टीकरी बॉर्डर पर दोपहर के बाद आसपास के लोगों ने धरनास्थल को लेकर काफी लोगों ने कड़ा विरोध भी किया। इस दौरान यहां तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
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टीकरी बॉर्डर पर दिनभर सभाओं का दौर चला। आंदोलनरत किसानों के बीच गाजीपुर बॉर्डर पर हुए घटनाक्रम को लेकर चर्चा करते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।
आंदोलन करने वाले किसानों ने कहा कि सरकार आंदोलन को समाप्त करने के लिए ओछी हरकत कर रही है। गाजीपुर बॉर्डर पर धरने को समाप्त करवाने के लिए बिजली, पानी व अन्य सुविधाओं को बंद करवाना सरकार की मंशा को दर्शा रहा है। मगर अब फिर से आंदोलन तेज किया जाएगा। अब वे तब तक अपने घर नहीं लौटेंगे, जब तक तीनों कानून रद्द नहीं हो जाते। क्योंकि वे अगर ऐसे ही अपने घर लौट गए तो अपने बच्चों से क्या कहेंगे। किसानों का धरना पहले भी शांतिपूर्ण चल रहा था और अब भी शांतिपूर्ण चलेगा। दिल्ली में हुई हिंसा और लाल किले की घटना की वे कड़े शब्दों में निंदा करते है। आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हैं। कुछ असामाजिक तत्वों के कारण सभी किसानों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। किसानों ने लोगों को पेट भरना सिखा है। दो माह से ज्यादा समय तक किसानों ने शांतिपूर्ण ढंग से धरना देने के साथ अपनी बात सरकार के समक्ष रखी है। मगर कुछ नेताओं द्वारा किसानों को कभी खालिस्तानी तो कभी उपद्रवी कहा जाता है।
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फिर वही जोश और उत्साह
ट्रैक्टर परेड के बाद आंदोलनरत किसानों में कम हुआ जोश और उत्साह गाजीपुर बॉर्डर पर हुए घटनाक्रम के बाद एक बार फिर लौट आया है। शुक्रवार को किसानों ने टीकरी बॉर्डर, जहां पंजाब-हरियाणा भाईचारा एकता जिंदाबाद के नारे लगाए, वहीं सरकार पर जमकर निशाना साधा। टीकरी बॉर्डर के अलावा रोहद टोल पर भारी संख्या में किसान एकत्रित होकर विरोध जताया। उन्होंने कहा कि सरकार लाल किले पर झंडा फहराने वाले दोषियों को पकड़ने की बजाय किसान नेताओं पर मुकदमे दर्ज कर रही। जो सरकार की मंशा पर सवाल उठाती है।

 टीकरी बॉर्डर धरनास्थल की ओर नारे लगाते हुए जाते किसान। संवाद

टीकरी बॉर्डर धरनास्थल की ओर नारे लगाते हुए जाते किसान। संवाद- फोटो : Bahadurgarh

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