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Jhajjar-Bahadurgarh News: ई-गेम्स से नजदीकी ने बढ़ाई मैदान-सेहत से दूरी
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-फोटो 51 : दीपक जैन
बहादुरगढ़।
मैदानों में भौतिक रूप से खेले जाने वाले खेलों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम में बदल दिया है। ई-गेम्स का बढ़ते क्रेज के चलते सेहत पर असर पड़ रहा है। नागरिक अस्पताल के फिजिशियन डॉ. सुंदरम ने कहा, बच्चों और युवाओं को मैदान में व्यायाम करना चाहिए और क्रिकेट, फुटबॉल जैसे गेम खेलने चाहिए।
पिछले दो-तीन सालों में जिस कदर सोशल मीडिया प्लेटफार्म और यूट्यूब पर गेमिंग इन्फ्लूएंसर की संख्या बढ़ी है, उसी तरह ई-गेम्स और इसे खेलने वाले खिलाड़ियों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है।
ई-गेम्स कराने वाली संस्थाओं का दावा है कि कोरोना काल के बाद से ई-गेम्स का क्रेज बढ़ रहा है। अब लाखों रुपयों के ई-स्पोर्ट्स टूर्नामेंट भी आयोजित किए जा रहे हैं। फिलहाल 7 लाख से अधिक ई-गेम्स खेलने वाले खिलाड़ी हैं। इनमें युवाओं के साथ-साथ महिलाएं और नौकरीपेशा की तादाद भी खासी है।
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बॉक्स
बच्चे हो या युवा मोबाइल हाथ में रखते हैं। समय मिला नहीं कि गेम खेलने लगते हैं। गेम की लत इतनी खराब है कि वह कितने घंटे इसके पीछे खराब कर रहे हैं, पता भी नहीं चलता। ज्यादातर बच्चे फ्री फायर, माइंड क्राफ्ट, यूनाइट खेलते हैं। इन गेम्स को खेलने के लिए पैसे भी देने पड़ते हैं।
-दीपक जैन, सेक्टर-6 निवासी
बच्चों को मोबाइल की लत लग रही है। बच्चे मैदान में क्रिकेट, फुटबॉल न खेलकर मोबाइल में खेलते हैं। यह सही नहीं है। काफी बच्चे एकांत में बैठकर मोबाइल में गेम खेलते रहते हैं। इसकी वजह से न केवल बच्चों पर बल्कि युवाओं के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
-डॉ. अनिल कुमार, निजामपुर रोड़ निवासी
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मैदानों में भौतिक रूप से खेले जाने वाले खेलों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम में बदल दिया है। ई-गेम्स का बढ़ते क्रेज के चलते सेहत पर असर पड़ रहा है। नागरिक अस्पताल के फिजिशियन डॉ. सुंदरम ने कहा, बच्चों और युवाओं को मैदान में व्यायाम करना चाहिए और क्रिकेट, फुटबॉल जैसे गेम खेलने चाहिए।
पिछले दो-तीन सालों में जिस कदर सोशल मीडिया प्लेटफार्म और यूट्यूब पर गेमिंग इन्फ्लूएंसर की संख्या बढ़ी है, उसी तरह ई-गेम्स और इसे खेलने वाले खिलाड़ियों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है।
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ई-गेम्स कराने वाली संस्थाओं का दावा है कि कोरोना काल के बाद से ई-गेम्स का क्रेज बढ़ रहा है। अब लाखों रुपयों के ई-स्पोर्ट्स टूर्नामेंट भी आयोजित किए जा रहे हैं। फिलहाल 7 लाख से अधिक ई-गेम्स खेलने वाले खिलाड़ी हैं। इनमें युवाओं के साथ-साथ महिलाएं और नौकरीपेशा की तादाद भी खासी है।
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बच्चे हो या युवा मोबाइल हाथ में रखते हैं। समय मिला नहीं कि गेम खेलने लगते हैं। गेम की लत इतनी खराब है कि वह कितने घंटे इसके पीछे खराब कर रहे हैं, पता भी नहीं चलता। ज्यादातर बच्चे फ्री फायर, माइंड क्राफ्ट, यूनाइट खेलते हैं। इन गेम्स को खेलने के लिए पैसे भी देने पड़ते हैं।
-दीपक जैन, सेक्टर-6 निवासी
बच्चों को मोबाइल की लत लग रही है। बच्चे मैदान में क्रिकेट, फुटबॉल न खेलकर मोबाइल में खेलते हैं। यह सही नहीं है। काफी बच्चे एकांत में बैठकर मोबाइल में गेम खेलते रहते हैं। इसकी वजह से न केवल बच्चों पर बल्कि युवाओं के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
-डॉ. अनिल कुमार, निजामपुर रोड़ निवासी

-फोटो 51 : दीपक जैन