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Hindi News ›   Haryana ›   Jhajjar/Bahadurgarh News ›   Only one dog license issued in a year; questions also raised about the meat licensing system.

Jhajjar-Bahadurgarh News: एक साल में सिर्फ एक कुत्ते का लाइसेंस, मीट लाइसेंस व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 04 Jan 2026 02:34 AM IST
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Only one dog license issued in a year; questions also raised about the meat licensing system.
फोटो-55: बहादुरगढ़ के विवेकानंद नगर में घूम रहे आवारा कुत्ते। संवाद
बहादुरगढ़।
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शहर में 1 अप्रैल 2024 से 29 अगस्त 2025 तक पूरे केवल एक ही पालतू कुत्ते का पंजीकरण कराया गया है जिससे नगर परिषद को मात्र 500 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। इसके अलावा मीट की दुकान के लिए नगर परिषद की ओर से एक भी लाइसेंस जारी नहीं किया गया है।
नगर परिषद बहादुरगढ़ की कार्यप्रणाली को लेकर जन सूचना अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली जानकारी से तथ्य उजागर हुए हैं। सामने आया कि केवल एक पालतू कुत्ते का पंजीकरण हुआ है जबकि एक भी कुत्ते के लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं हुआ। नियमों के अनुसार हर वर्ष 250 रुपये शुल्क पर नवीनीकरण अनिवार्य है।
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मीट बेचने के लिए नगर परिषद की ओर से एक भी लाइसेंस जारी नहीं किया गया जबकि शहर में कई स्थानों पर खुलेआम मीट की बिक्री हो रही है। इससे नगर परिषद को प्रतिवर्ष लाखों रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
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आरटीआई एक्टीविस्ट सतपाल हांडा ने बताया कि शहर में हजारों लोग बिना लाइसेंस के पालतू कुत्ते पाल रहे हैं जिनमें कई खतरनाक नस्ल के भी हैं। नियमों के अनुसार कुत्ता पालने के लिए नगर परिषद में पंजीकरण और निर्धारित नियमों का पालन आवश्यक है लेकिन इस पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही।
पिछले पांच साल में 42,458 लोगों को काटा
आवारा कुत्तों की स्थिति पर नजर डालें तो पिछले पांच वर्षों में बहादुरगढ़ में 42,458 लोगों को आवारा कुत्तों ने काटा। केवल जनवरी 2025 से जुलाई 2025 के बीच 12,257 लोग शिकार हुए। शहर के नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 70 से 80 नागरिक एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं।
अस्पताल में इंजेक्शन की आपूर्ति सीमित
नागरिक अस्पताल में इंजेक्शन की आपूर्ति सीमित है जबकि निजी मेडिकल स्टोर पर एक इंजेक्शन की कीमत करीब 340 रुपये है और कुत्ते के काटने पर तीन इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं। आरटीआई में यह सवाल भी उठाया गया है कि गरीब व श्रमिक वर्ग के लोगों के इंजेक्शन का खर्च कौन वहन करेगा।

स्ट्रीट डॉग की संख्या नियंत्रित करने के लिए उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने, अर्बन लोकल बॉडी चंडीगढ़ को पत्र लिखने व स्वास्थ्य विभाग से बहादुरगढ़ नागरिक अस्पताल के लिए प्रतिमाह कम से कम 3000 एंटी-रेबीज इंजेक्शन की मांग की जाएगी।
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