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Jhajjar-Bahadurgarh News: दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन जैन मंदिरों में उत्तम तप धर्म का महत्व समझाया
Thu, 04 Sep 2025 02:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Thu, 04 Sep 2025 02:41 AM IST
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-फोटो 68 : अग्रवाल कॉलोनी स्थित श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में दीप जलाकर पूजा अर्चना करती मह
बहादुरगढ़। दशलक्षण पर्युषण महापर्व के सातवें दिन बुधवार को शहर के सभी जैन मंदिरों में उत्तम तप धर्म दिवस मनाया गया। पद्म प्रभु श्री दिगंबर जैन मंदिर, अग्रवाल कॉलोनी स्थित महाबीर दिगंबर जैन मंदिर, अनाजमंडी पांडूशिला, संत कॉलोनी स्थित जैन मंदिर जैन में उत्तम तप दिवस की पूजा अर्चना की गई। पूरे विधि-विधान के साथ पूजन प्रक्रिया चली। अग्रवाल कॉलोनी स्थित जैन मंदिर में महिलाओं ने मिलकर 48 दीपों से बड़े भक्ति भाव से भक्तामर का पाठ करते हुए आरती भी की।
अनाजमंडी पांडूशिला समिति प्रधान सुनील जैन ने कहा कि बुधवार को उत्तम तप धर्म की आराधना हुई। उन्होंने कहा कि कल्याण के लिए तप जरूरी होता है। तप करने वाला मनुष्य अपने जीवन को निर्मल बना सकता है। तप करने से ही मानव का कल्याण संभव है। उन्होंने कहा कि मानव की सोच अपने जीवन को मंगलमय बनाने की ही होती है।
जीवन को पावन या मंगलमय बनाने के लिए त्याग परमावश्यक है। हमारी संस्कृति में भोग व संग्रह का नहीं, त्याग का महत्व है। मनुष्य की प्रतिष्ठा उसकी त्याग वृत्ति से बनती है क्योंकि लोभी व्यक्ति की मानसिकता अपवित्र होती है। ऐसा व्यक्ति कभी भी महानता को प्राप्त नहीं कर सकता। दूसरों की भलाई के लिए अपनी वस्तु को छोड़ देना ही त्याग है।
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अनाजमंडी पांडूशिला समिति प्रधान सुनील जैन ने कहा कि बुधवार को उत्तम तप धर्म की आराधना हुई। उन्होंने कहा कि कल्याण के लिए तप जरूरी होता है। तप करने वाला मनुष्य अपने जीवन को निर्मल बना सकता है। तप करने से ही मानव का कल्याण संभव है। उन्होंने कहा कि मानव की सोच अपने जीवन को मंगलमय बनाने की ही होती है।
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जीवन को पावन या मंगलमय बनाने के लिए त्याग परमावश्यक है। हमारी संस्कृति में भोग व संग्रह का नहीं, त्याग का महत्व है। मनुष्य की प्रतिष्ठा उसकी त्याग वृत्ति से बनती है क्योंकि लोभी व्यक्ति की मानसिकता अपवित्र होती है। ऐसा व्यक्ति कभी भी महानता को प्राप्त नहीं कर सकता। दूसरों की भलाई के लिए अपनी वस्तु को छोड़ देना ही त्याग है।
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