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Jhajjar-Bahadurgarh News: मेरी बगिया...घर में बगिया लगाकर युवाओं को दे रहीं प्रेरणा
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15jjrp17- अपने घर में लगी बगिया में गांव मातनहेल निवासी सरपंच विजय लता। स्रोत-परिजन
साल्हावास। गांव मातनहेल निवासी सरपंच विजय लता ने अपने घर की बगिया में सैकड़ों पौधे लगा रखे हैं। परिजनों के सहयोग से ही वे आज विशेषकर युवा पीढ़ी, महिलाओं और युवतियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हुई हैं। सरपंच विजय लता का कहना है कि उनके पति कैप्टन बिजेंद्र सिंह सेना में कार्यरत रहे हैं।
उनके साथ उन्हें भी अनेक सैन्य क्षेत्रों में जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। वहां फौजियों व उनकी पत्नियों को देखकर उन्हीं प्रेरणा मिली और उनसे प्रेरित होकर उन्होंने भी रुचि हुई। उन्होंने अपने घर में पांच पौधे लगाकर इसकी शुरुआत की जिनकी संख्या आज लगभग सैकड़ों हो गई है।
उनके पति कैप्टन बिजेंद्र सिंह, पुत्र नवदीप, प्रदीप पुत्रवधू प्रीति व स्वाति, पौत्री नव्या, दीपश्री व पूर्वी भी सहयोग करते हैं। उन्होंने अपने खेत में भी लगभग सैकड़ों छायादार, फलदार और औषधीय पौधे लगाए हैं।
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उन्होंने कहा कि औषधीय पौधों को लगाने से उन्हें विभिन्न प्रकार की औषधियां के लिए पैसा खर्च नहीं करना पड़ता और बहुत सारी चीज उन्हें पौधों से ही मिल जाती हैं।
जब वह गांव में कोई उच्च स्तर का कार्यक्रम करवाती हैं तो अतिथि को पौधा भेंट करना नहीं भूलतीं। आज उनके घर में गमलों में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगे हैं। इनमें मनी प्लांट, एलोवीरा, स्नेक्स, गुलाब, पाम, गुड़हल शामिल हैं।
दस हजार की आबादी वाले मातनहेल गांव की महिलाएं हो रहीं प्रेरित
सरपंच विजय लता का मानना है कि अगर हर घर की छत या आंगन में कुछ पौधे लग जाएं तो पर्यावरण को बड़ी राहत मिल सकती है। इस हरियाली भरी पहल से पड़ोसी और रिश्तेदार भी प्रभावित हो रहे हैं। कई लोग उनसे पौधे लगाने और उनकी देखभाल के तरीके सीख रहे हैं। उनका कहना है कि हरियाली के लिए बड़े संसाधनों की नहीं बल्कि जागरूकता और प्रेम की जरूरत होती है।
बगिया में लगे ये पौधे
सरपंच विजय लता का कहना है कि तुलसी, एलोवेरा, गिलोय, अश्वगंधा, पुदीना, लेमनग्रास, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, अडूसा, नीम, अजवाइन, हरसिंगार, गुड़हल, कनेर, अपराजिता, चमेली, रजनीगंधा, गुलाब, गेंदा, बेलपत्र और सदाबहार आदि पौधे न केवल घर की शोभा बढ़ाते हैं बल्कि सेहत दुरुस्त रखने के भी काम आते हैं। उन्हें अधिकतर औषधियां अपने घर में ही उगे पौधों से मिल जाती हैं जिनका इस्तेमाल करके उन्हें और रोगों से लड़ने की शारीरिक शक्ति भी मिलती है।
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उनके साथ उन्हें भी अनेक सैन्य क्षेत्रों में जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। वहां फौजियों व उनकी पत्नियों को देखकर उन्हीं प्रेरणा मिली और उनसे प्रेरित होकर उन्होंने भी रुचि हुई। उन्होंने अपने घर में पांच पौधे लगाकर इसकी शुरुआत की जिनकी संख्या आज लगभग सैकड़ों हो गई है।
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उनके पति कैप्टन बिजेंद्र सिंह, पुत्र नवदीप, प्रदीप पुत्रवधू प्रीति व स्वाति, पौत्री नव्या, दीपश्री व पूर्वी भी सहयोग करते हैं। उन्होंने अपने खेत में भी लगभग सैकड़ों छायादार, फलदार और औषधीय पौधे लगाए हैं।
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उन्होंने कहा कि औषधीय पौधों को लगाने से उन्हें विभिन्न प्रकार की औषधियां के लिए पैसा खर्च नहीं करना पड़ता और बहुत सारी चीज उन्हें पौधों से ही मिल जाती हैं।
जब वह गांव में कोई उच्च स्तर का कार्यक्रम करवाती हैं तो अतिथि को पौधा भेंट करना नहीं भूलतीं। आज उनके घर में गमलों में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगे हैं। इनमें मनी प्लांट, एलोवीरा, स्नेक्स, गुलाब, पाम, गुड़हल शामिल हैं।
दस हजार की आबादी वाले मातनहेल गांव की महिलाएं हो रहीं प्रेरित
सरपंच विजय लता का मानना है कि अगर हर घर की छत या आंगन में कुछ पौधे लग जाएं तो पर्यावरण को बड़ी राहत मिल सकती है। इस हरियाली भरी पहल से पड़ोसी और रिश्तेदार भी प्रभावित हो रहे हैं। कई लोग उनसे पौधे लगाने और उनकी देखभाल के तरीके सीख रहे हैं। उनका कहना है कि हरियाली के लिए बड़े संसाधनों की नहीं बल्कि जागरूकता और प्रेम की जरूरत होती है।
बगिया में लगे ये पौधे
सरपंच विजय लता का कहना है कि तुलसी, एलोवेरा, गिलोय, अश्वगंधा, पुदीना, लेमनग्रास, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, अडूसा, नीम, अजवाइन, हरसिंगार, गुड़हल, कनेर, अपराजिता, चमेली, रजनीगंधा, गुलाब, गेंदा, बेलपत्र और सदाबहार आदि पौधे न केवल घर की शोभा बढ़ाते हैं बल्कि सेहत दुरुस्त रखने के भी काम आते हैं। उन्हें अधिकतर औषधियां अपने घर में ही उगे पौधों से मिल जाती हैं जिनका इस्तेमाल करके उन्हें और रोगों से लड़ने की शारीरिक शक्ति भी मिलती है।