{"_id":"621686cb36557b545651489c","slug":"mobile-app-anydesk-can-be-fraud-sp-jhjhar-news-rtk6393023128","type":"story","status":"publish","title_hn":"मोबाइल एप एनीडेस्क से हो सकती है ठगी : एसपी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मोबाइल एप एनीडेस्क से हो सकती है ठगी : एसपी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झज्जर। ऑनलाइन खरीदारी या खाते से पैसे ट्रांसफर करने के लिए ज्यादातर लोग मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करते हैं। अगर मोबाइल पर किसी सोशल मीडिया के जरिए एनी डेस्क मोबाइल एप का लिंक फॉरवर्ड होकर आ जाए तो उस पर क्लिक करने से बचें। यह एप बैंक खाते के लिए घातक हो सकता है। साइबर शातिर आजकल ऑनलाइन ठगी के लिए एनी डेस्क एप का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। इस संदर्भ में झज्जर पुलिस ने आमजन के लिए एडवाइजरी जारी की है।
पुलिस अधीक्षक वसीम अकरम ने बताया कि साइबर ठग प्रतिदिन धोखाधड़ी कर रहे हैं। पैसे हड़पने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। झज्जर पुलिस ने सलाह दी है कि किसी भी दूरस्थ डेस्कटॉप एप को अपने डिवाइस में डाउनलोड न करें। किसी भी व्यक्ति को अपनी आईडी, पासवर्ड, पिन, खाता संख्या आदि की जानकारी न दें। उन्होंने बताया है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने एनीडेस्क नाम के एक रिमोट डेस्कटॉप एप बारे आगाह किया है। एनी डेस्क एप ठगो के लिए एक बहुत ही सरल साधन है, क्योंकि यह उपयोगकर्ताओं को इंटरनेट पर अलग-अलग मोबाइल और सिस्टम से कनेक्ट करने की अनुमति देता है। आम शब्दों में यह एक स्क्रीन शेयरिंग प्लेटफॉर्म की तरह है। इसके अलावा क्विक स्पोर्ट्स नाम का एक और एप है जो कमोवेश यही काम करता है। अपराधी इसका उपयोग धोखा देने और ऑनलाइन ठगी के लिए कर रहे हैं।
कुछ व्यक्ति गूगल पर मौजूद कस्टमर केयर का नंबर सर्च करके इस्तेमाल करते हैं। कुछ मामलों में पीड़ित खुद कुछ समस्याओं के समाधान के लिए कस्टमर केयर को कॉल करता है। ऐसे में धोखाधड़ी करने वाले का मकसद पीड़ित के मोबाइल फोन पर एनी डेस्क या टीम वीवर एप डाउनलोड करने के लिए बाध्य करना होता है। कोई भी एप डाउनलोड करने के बाद धोखाखड़ी करने वाले को 9 अंकों के रिमोट डेस्क कोड की आवश्यकता होती है। इसलिए वह उसके लिए पीड़ित से पूछताछ करेगा। एक बार जब पीड़ित 9 अंकों वाला कोड बता देता है और एप की अनुमति दे देता है तो धोखाधड़ी करने वाले को अपने डिवाइस पर पीड़ित के डिवाइस की स्क्रीन देखने को मिल जाएगी और इसे वह रिकॉर्ड भी कर सकता है। जब वह अपने बैंकिंग या यूपीआई एप का आईडी या पासवर्ड टाइप करता है तो ठग उसे नोट कर लेता है। यह एप फोन के लॉक होने पर भी बैकग्राउंड में काम करता है। एंड्रायड फोन पर एनीडेस्क एप आसानी से धोखाबाज व्यक्ति को उसकी जानकारी के बिना पीड़ित के फोन की स्क्रीन को देखने और रिकॉर्ड करने की अनुमित देता है। दूसरी तरफ आईफोन एनीडेस्क एप को आईओएस को पीसी में डालने की अनुमति नहीं देता है। कोई भी व्यक्ति साइबर अपराध से संबंधित किसी प्रकार की शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क कर सकता है या वेब पोर्टल एचटीटीपीएस:// सीइबरक्राइम.गो.इन/ पर विजिट कर सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
पुलिस अधीक्षक वसीम अकरम ने बताया कि साइबर ठग प्रतिदिन धोखाधड़ी कर रहे हैं। पैसे हड़पने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। झज्जर पुलिस ने सलाह दी है कि किसी भी दूरस्थ डेस्कटॉप एप को अपने डिवाइस में डाउनलोड न करें। किसी भी व्यक्ति को अपनी आईडी, पासवर्ड, पिन, खाता संख्या आदि की जानकारी न दें। उन्होंने बताया है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने एनीडेस्क नाम के एक रिमोट डेस्कटॉप एप बारे आगाह किया है। एनी डेस्क एप ठगो के लिए एक बहुत ही सरल साधन है, क्योंकि यह उपयोगकर्ताओं को इंटरनेट पर अलग-अलग मोबाइल और सिस्टम से कनेक्ट करने की अनुमति देता है। आम शब्दों में यह एक स्क्रीन शेयरिंग प्लेटफॉर्म की तरह है। इसके अलावा क्विक स्पोर्ट्स नाम का एक और एप है जो कमोवेश यही काम करता है। अपराधी इसका उपयोग धोखा देने और ऑनलाइन ठगी के लिए कर रहे हैं।
विज्ञापन
कुछ व्यक्ति गूगल पर मौजूद कस्टमर केयर का नंबर सर्च करके इस्तेमाल करते हैं। कुछ मामलों में पीड़ित खुद कुछ समस्याओं के समाधान के लिए कस्टमर केयर को कॉल करता है। ऐसे में धोखाधड़ी करने वाले का मकसद पीड़ित के मोबाइल फोन पर एनी डेस्क या टीम वीवर एप डाउनलोड करने के लिए बाध्य करना होता है। कोई भी एप डाउनलोड करने के बाद धोखाखड़ी करने वाले को 9 अंकों के रिमोट डेस्क कोड की आवश्यकता होती है। इसलिए वह उसके लिए पीड़ित से पूछताछ करेगा। एक बार जब पीड़ित 9 अंकों वाला कोड बता देता है और एप की अनुमति दे देता है तो धोखाधड़ी करने वाले को अपने डिवाइस पर पीड़ित के डिवाइस की स्क्रीन देखने को मिल जाएगी और इसे वह रिकॉर्ड भी कर सकता है। जब वह अपने बैंकिंग या यूपीआई एप का आईडी या पासवर्ड टाइप करता है तो ठग उसे नोट कर लेता है। यह एप फोन के लॉक होने पर भी बैकग्राउंड में काम करता है। एंड्रायड फोन पर एनीडेस्क एप आसानी से धोखाबाज व्यक्ति को उसकी जानकारी के बिना पीड़ित के फोन की स्क्रीन को देखने और रिकॉर्ड करने की अनुमित देता है। दूसरी तरफ आईफोन एनीडेस्क एप को आईओएस को पीसी में डालने की अनुमति नहीं देता है। कोई भी व्यक्ति साइबर अपराध से संबंधित किसी प्रकार की शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क कर सकता है या वेब पोर्टल एचटीटीपीएस:// सीइबरक्राइम.गो.इन/ पर विजिट कर सकते हैं।
विज्ञापन