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मां भीमेश्वरी मंदिरों को दुल्हन की तरह सजाया, पहला नवरात्र आज से

Thu, 07 Oct 2021 01:06 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 07 Oct 2021 01:06 AM IST
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Maa Bhimeshwari temples decorated like a bride, first Navratri from today
माता भीमेश्वरी देवी मंदिर में नवरात्र को लेकर बुधवार को कोरोना के नियमों का पालन करते हुए दर्शन कराए जाएंगे। प्रशासन ने मंदिर परिसर के आसपास सफाई करवाई और वहीं मंदिर ट्रस्ट की ओर से माता भीमेश्वरी देवी मंदिर के बाहर व अंदर वाले भवन को फूलों से सजाया गया है। प्रशासन ने भक्तों की आस्था को देखते हुए व कोरोना महामारी के चलते निर्णय लिया है कि मंदिर में सिर्फ श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे। मंदिर में प्रसाद, नारियल चुनरी चढ़ाने की अनुमति नहीं है।
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पिछले दो साल से कोरोना महामारी के चलते बेरी मेें मेले का आयोजन न होने से मेले परिसर के आसपास दुकान लगाने वाले दुकानदारों के मायूस नजर आ रहे है। दुकानदारों का कहना है कि सोचा था कि अबकि बार मेले का आयोजन होगा, लेकिन मंगलवार को अधिकारियों ने जैसे ही बैठक कर फैसला लिया कि मंदिर में प्रसाद चढ़ाने पर रोक रहेगी तो दुकानदारों के चहरे मायूस नजर आए। जिसके चलते दुकानदारों पर आर्थिक संकट छाया हुआ है।
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नगरपालिका सचिव नरेंद्र सैनी का कहना है कि बाहर व अंदर मंदिर तक सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए 60 कर्मचारियों की मंजूरी मिली है। यह कर्मचारी बाहर मंदिर से अंदर तक सफाई व्यवस्था बनाए रखेंगे। मंदिर दर्शन करने वाले रास्तों मेें सैनिटाइजर की व्यवस्था भी करवाई जाएगी। मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
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मंदिर के पुजारी पुरूषोतम वशिष्ट ने बताया कि मां भीमेश्वरी देवी का मंदिर एक ऐसा अनोखा मंदिर है। जहां पर मां की प्रतिमा तो एक है, किंतु मां के मंदिर दो हैं। परंपरानुसार मां भीमेश्वरी सुबह 5 बजे से दोपहर साढ़े 12 बजे तक बाहर वाले मंदिर में रहती हैं। वह उसके बाद मंदिर का पुजारी मां की प्रतिमा को गोद में लेकर अंदर वाले मंदिर जाते हैं। बताया जाता है कि यहां पर मां की पूजा अर्चना का सिलसिला महाभारत काल से चला आ रहा है। मंदिर को महाभारत काल में स्थापित किया गया था।
नवरात्र के व्रत की सामग्री की बढ़ी माग। बेरी के व्यापारी रामकिशन पोपी ने बताया कि नवरात्रों के व्रत के चलते पूजन मे प्रयोग होने वाली सामग्री की डिमांड बढ गई है। जिसके चलते इन दिनों व्रत के दौरान कुटू के आटे, सेंधा नमक , सामक दोनों आदि की ब्रिकी है उन्होंने बताया इसके अलावा चुनरी ,नारियल व माता का श्रृंगार में होने वाले प्रसाधनों की भी डिमांड है।
देवी दुर्गा के नौ रूप होते हैं। पहले स्वरूप में शैलपुत्री के नाम से जानी जाती है। आचार्य जयप्रकाश वत्स के अनुसार पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। नवरात्र-पूजन में प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है। इस प्रथम दिन की उपासना में योगी अपने मन को मूलाधार चक्र में स्थित करते हैं। यहीं से उनकी योग साधना का प्रारंभ होता है। देवी की आराधना से साधक को मूलाधार चक्र जाग्रत होने से प्राप्त होने वाली सिद्धियां हासिल होती हैं।
आचार्य जयप्रकाश वत्स ने बताया कि नवरात्र के नौ दिनों के दौरान काले रंग के कपड़े न पहनें। यदि नवरात्र में प्रतिदिन पूजन करने में असमर्थ हो तो अष्टमी के दिन विशेष रूप से पूजन करें। वत्स ने बताया कि यदि कोई नवरात्र के उपवास न कर सकता हो तो सप्तमी, अष्टमी और नवमी तीन दिन उपवास करके देवी की पूजा करने से वह सम्पूर्ण नवरात्र के उपवास के फल को प्राप्त कर सकता है।

नवरात्र को लेकर बाहर व अंदर में पुलिस कर्मचारियों की ड्यूटी लग दी गई है। बुधवार शाम को अंदर व बाहर मंदिर का जायजा लिया गया। मंदिर में श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी ना हो इसके लिए पुलिस कर्मचारियों की अलग-अलग जगह ड्यूूटी लगा दी गई है। - सुंदरपाल, उप निरीक्षक, थाना बेरी।
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