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Jhajjar-Bahadurgarh News: चैंबर न मिलने पर वकीलों का वर्क सस्पेंड, टाइपिस्ट को भी नहीं मिली जगह
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फोटो नंबर 72: वर्क सस्पेंड कर नए भवन के बाहर बैठे वकील और टाइपराइटर्स। संवाद
बादली। उपमंडल स्तर पर चैंबर अलॉट न होने से आक्रोशित वकीलों ने कोर्ट में वर्क सस्पेंड कर विरोध प्रदर्शन किया है। टाइपिस्ट भी धरने पर बैठे और जगह की मांग की। एसडीएम ने बताया कि वकील और टाइपिस्ट के लिए भवन नक्शा में जगह नहीं रखी गई है।
बादली बार एसोसिएशन के प्रधान सज्जन गुलिया, वकील अरविंद और जसबीर ने बताया कि उपमंडल स्तर पर नया भवन बनकर तैयार हो गया है लेकिन वकीलों के बैठने के लिए जगह चिह्नित नहीं की गई है। पुराने और नए भवन की दूरी करीब 5 किलोमीटर की है जिससे वकीलों को परेशानी का सामना करना होता है।
दिन में कई बार उपमंडल परिसर और पुराने परिसर स्थित चैंबर के चक्कर लगाने से वकीलों का समय खराब हो रहा है। धरने पर मास्टर रविंद्र दरियापुर, अमित, प्रमोद कौशिक, योगेश और एडवोकेट संदीप मुंडाखेड़ा सहित काफी संख्या में वकील और टाइपिस्ट मौजूद रहे।
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आश्वासन के बाद बनवाए पोटा केबिन
धरने पर बैठे वकीलों ने बताया कि एसडीएम की ओर से पहले पोटा केबिन बनवाने के बाद जगह चिह्नित करने का आश्वासन दिया गया था लेकिन अब पोटा केबिन बनवाने के बाद भी उन्हें जगह अलॉटमेंट नहीं की गई। पोटा केबिन बनवाने में उन्हें 70 हजार से एक लाख रुपए खर्च करने पड़े हैं।
भवन निर्माण के दौरान चैंबर के लिए जगह निर्धारित नहीं की गई। वकील और टाइपिस्ट के लिए भवन नक्शा में जगह नहीं रखी गई है। इसके अतिरिक्त बिजली विभाग ने भी हॉटलाइन और ट्रांसफार्मर का हवाला देकर अलग कनेक्शन देने से मना कर दिया है। समस्या के उचित समाधान के लिए उच्च अधिकारियों और सरकारी आदेशों का इंतजार किया जा रहा है।
-डॉ. रमन गुप्ता, एसडीएम बादली।
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बादली बार एसोसिएशन के प्रधान सज्जन गुलिया, वकील अरविंद और जसबीर ने बताया कि उपमंडल स्तर पर नया भवन बनकर तैयार हो गया है लेकिन वकीलों के बैठने के लिए जगह चिह्नित नहीं की गई है। पुराने और नए भवन की दूरी करीब 5 किलोमीटर की है जिससे वकीलों को परेशानी का सामना करना होता है।
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दिन में कई बार उपमंडल परिसर और पुराने परिसर स्थित चैंबर के चक्कर लगाने से वकीलों का समय खराब हो रहा है। धरने पर मास्टर रविंद्र दरियापुर, अमित, प्रमोद कौशिक, योगेश और एडवोकेट संदीप मुंडाखेड़ा सहित काफी संख्या में वकील और टाइपिस्ट मौजूद रहे।
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आश्वासन के बाद बनवाए पोटा केबिन
धरने पर बैठे वकीलों ने बताया कि एसडीएम की ओर से पहले पोटा केबिन बनवाने के बाद जगह चिह्नित करने का आश्वासन दिया गया था लेकिन अब पोटा केबिन बनवाने के बाद भी उन्हें जगह अलॉटमेंट नहीं की गई। पोटा केबिन बनवाने में उन्हें 70 हजार से एक लाख रुपए खर्च करने पड़े हैं।
भवन निर्माण के दौरान चैंबर के लिए जगह निर्धारित नहीं की गई। वकील और टाइपिस्ट के लिए भवन नक्शा में जगह नहीं रखी गई है। इसके अतिरिक्त बिजली विभाग ने भी हॉटलाइन और ट्रांसफार्मर का हवाला देकर अलग कनेक्शन देने से मना कर दिया है। समस्या के उचित समाधान के लिए उच्च अधिकारियों और सरकारी आदेशों का इंतजार किया जा रहा है।
-डॉ. रमन गुप्ता, एसडीएम बादली।