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Jhajjar-Bahadurgarh News: सिविल अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी
Wed, 27 Nov 2024 02:28 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Wed, 27 Nov 2024 02:28 AM IST
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झज्जर। जिला मुख्यालय स्थित सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की लंबे समय से कमी चल रही है। ऐसे में मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है।
मरीजों को निजी अस्पताल या फिर पीजीआई में जाकर इलाज करवाना पड़ता है। सिविल अस्पताल में आम दिनों में 800 से 900 ओपीडी प्रतिदिन होती है, लेकिन मौसम बदलाव के चलते इन दिनों ओपीडी की संख्या 1200 तक पहुंच गई है। सिविल अस्पताल में आने वाले मरीजों में खांसी, बुखार, जुकाम के अलावा गायनी, नेत्र रोग, दंत रोग, बाल रोगियों की संख्या ज्यादा है।
लगभग 6 माह से सरकारी अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। पहले यहां बाल रोग विशेषज्ञ थे, लेकिन उनका तबादला हो गया। अब लगभग कई माह से यहां पर पीजीआई से ट्रेनी चिकित्सक आकर बच्चों की जांच करते हैं। ज्यादा बीमार होने की स्थिति में बच्चों को पीजीआई रेफर करना पड़ता है। यहां पर बच्चों की ओपीडी प्रतिदिन लगभग 100 के आसपास है।
इसके अलावा सिविल अस्पताल में नियमित महिला रोग विशेषज्ञ नहीं है। यहां केवल एक महिला रोग विशेषज्ञ हैं और वह भी एनएचएम के तहत लगी हुई हैं। ओपीडी और ऑपरेशन एक ही महिला रोग विशेषज्ञ को देखने पड़ते हैं। सिविल अस्पताल में महिलाओं की ओपीडी प्रतिदिन 90 से 120 तक है।
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इसी प्रकार से सिविल अस्पताल में चर्म रोग विशेषज्ञ भी नहीं है। सप्ताह में केवल एक दिन निजी मेडिकल कॉलेज से डॉक्टर आते हैं। यहां पर चर्म रोग विशेषज्ञ की ओपीडी भी 50 से 70 प्रतिदिन है, लेकिन डॉक्टर न होने के कारण मरीजों को बाहर निजी अस्पताल में इलाज करवाना पड़ता है। इसके अलावा लंबे समय से यहां पर फिजिशियन भी नहीं है, इसलिए आने वाले मरीजों को पीजीआई रेफर करना पड़ता है।
अस्पताल में कफ सिरप भी खत्म
सिविल अस्पताल में पिछले पांच-छह दिन से कफ सिरप भी खत्म है। इन दिनों सर्दी का मौसम चल रहा है और खांसी, जुकाम, बुखार के मरीज ज्यादा आते हैं। ऐसे में चिकित्सक कफ सिरप लिख देते हैं, लेकिन दवा काउंटर पर यह नहीं मिल रहा। इस कारण मरीजों को बाहर से खरीद करनी पड़ रही है।
फिजिशियन को लेकर मुख्यालय को पत्र लिखा गया है। सिविल अस्पताल में नियमित महिला रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति की गई है।
- डॉ. ब्रह्मदीप सिंह, सिविल सर्जन, झज्जर
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मरीजों को निजी अस्पताल या फिर पीजीआई में जाकर इलाज करवाना पड़ता है। सिविल अस्पताल में आम दिनों में 800 से 900 ओपीडी प्रतिदिन होती है, लेकिन मौसम बदलाव के चलते इन दिनों ओपीडी की संख्या 1200 तक पहुंच गई है। सिविल अस्पताल में आने वाले मरीजों में खांसी, बुखार, जुकाम के अलावा गायनी, नेत्र रोग, दंत रोग, बाल रोगियों की संख्या ज्यादा है।
लगभग 6 माह से सरकारी अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। पहले यहां बाल रोग विशेषज्ञ थे, लेकिन उनका तबादला हो गया। अब लगभग कई माह से यहां पर पीजीआई से ट्रेनी चिकित्सक आकर बच्चों की जांच करते हैं। ज्यादा बीमार होने की स्थिति में बच्चों को पीजीआई रेफर करना पड़ता है। यहां पर बच्चों की ओपीडी प्रतिदिन लगभग 100 के आसपास है।
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इसके अलावा सिविल अस्पताल में नियमित महिला रोग विशेषज्ञ नहीं है। यहां केवल एक महिला रोग विशेषज्ञ हैं और वह भी एनएचएम के तहत लगी हुई हैं। ओपीडी और ऑपरेशन एक ही महिला रोग विशेषज्ञ को देखने पड़ते हैं। सिविल अस्पताल में महिलाओं की ओपीडी प्रतिदिन 90 से 120 तक है।
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इसी प्रकार से सिविल अस्पताल में चर्म रोग विशेषज्ञ भी नहीं है। सप्ताह में केवल एक दिन निजी मेडिकल कॉलेज से डॉक्टर आते हैं। यहां पर चर्म रोग विशेषज्ञ की ओपीडी भी 50 से 70 प्रतिदिन है, लेकिन डॉक्टर न होने के कारण मरीजों को बाहर निजी अस्पताल में इलाज करवाना पड़ता है। इसके अलावा लंबे समय से यहां पर फिजिशियन भी नहीं है, इसलिए आने वाले मरीजों को पीजीआई रेफर करना पड़ता है।
अस्पताल में कफ सिरप भी खत्म
सिविल अस्पताल में पिछले पांच-छह दिन से कफ सिरप भी खत्म है। इन दिनों सर्दी का मौसम चल रहा है और खांसी, जुकाम, बुखार के मरीज ज्यादा आते हैं। ऐसे में चिकित्सक कफ सिरप लिख देते हैं, लेकिन दवा काउंटर पर यह नहीं मिल रहा। इस कारण मरीजों को बाहर से खरीद करनी पड़ रही है।
फिजिशियन को लेकर मुख्यालय को पत्र लिखा गया है। सिविल अस्पताल में नियमित महिला रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति की गई है।
- डॉ. ब्रह्मदीप सिंह, सिविल सर्जन, झज्जर