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नहर टूटने से सैकड़ों एकड़ में भरा पानी
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर
Updated Tue, 15 Nov 2016 12:36 AM IST
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विरवट कोन्हवलिया के सामने तेजी से कटान कर रही गंडक नदी।
- फोटो : अमर उजाला
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गांव लडरावन में रजबाहा (माइनर) टूट गया। जिससे सैकड़ों खेतों में पानी भर गया। दर्जनों किसानों के खेतों में खड़ी फसल और काटकर रखी गई फसल नष्ट हो गई। नहर टूटे हुए काफी समय होने के बावजूद प्रशासन ने मरम्मत नहीं कराई है। किसानों ने सरकार से अपने खेतों में हुए नुकसान का मुआवजा देने की मांग की है।
नष्ट हुई खड़ी व कटी फसल
लडरावन गांव के पास बराही माइनर ओवरफ्लो होने के कारण टूट गई। जिससे लगभग 250 एकड़ जमीन में पानी भर गया और सैंकड़ों एकड़ में खड़ी और कटी हुई धान की फसल नष्ट हो गई। गेहूं की बुआई के लिए तैयार काफी खेत भी पानी से लबालब हो गए। प्रभावित किसानों ने सरकार से क्षतिपूर्ति करने की मांग की है। हालत यह हो गई है कि झाड़ने के लिए खेतों में काट कर रखी धान की फसल पानी में तैर रही है। पककर तैयार खड़ी धान की फसल भी खराब होना तय है। किसानों विजय कुमार व सुखबीर सिंह ने कहा कि उन्होंने इस जमीन को प्रति एकड़ 20 से 30 हजार रुपये उगाही पर लिया था, मगर अब उसकी फसल बर्बाद हो गई है। न तो उसके पास जमीन मालिक को देने के लिए पैसे होंगे और ना खुद के खर्च के लिए।
जेई बोले, जल्द कर देंगे मरम्मत
किसानों ने बताया कि माइनर में तीन दिन पहले अधिक पानी आने और कमजोर किनारों के कारण यह टूट गई थी। सिंचाई विभाग को शिकायत की लेकिन समाधान नहीं हुआ। अस्थायी रूप से सिंचाई विभाग के कुछ कर्मचारियों के साथ किसानों ने अपने स्तर पर नहर का कटाव बंद किया, लेकिन रात को अधिक पानी के कारण वह फिर टूट गया। विभाग के जेई चंद्रकांत का कहना है कि माइनर में पानी सोनीपत से आता है। वहां पानी रोकने के लिए कहा गया है और माइनर की मरम्मत जल्द ही कर दी जाएगी।
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नष्ट हुई खड़ी व कटी फसल
लडरावन गांव के पास बराही माइनर ओवरफ्लो होने के कारण टूट गई। जिससे लगभग 250 एकड़ जमीन में पानी भर गया और सैंकड़ों एकड़ में खड़ी और कटी हुई धान की फसल नष्ट हो गई। गेहूं की बुआई के लिए तैयार काफी खेत भी पानी से लबालब हो गए। प्रभावित किसानों ने सरकार से क्षतिपूर्ति करने की मांग की है। हालत यह हो गई है कि झाड़ने के लिए खेतों में काट कर रखी धान की फसल पानी में तैर रही है। पककर तैयार खड़ी धान की फसल भी खराब होना तय है। किसानों विजय कुमार व सुखबीर सिंह ने कहा कि उन्होंने इस जमीन को प्रति एकड़ 20 से 30 हजार रुपये उगाही पर लिया था, मगर अब उसकी फसल बर्बाद हो गई है। न तो उसके पास जमीन मालिक को देने के लिए पैसे होंगे और ना खुद के खर्च के लिए।
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जेई बोले, जल्द कर देंगे मरम्मत
किसानों ने बताया कि माइनर में तीन दिन पहले अधिक पानी आने और कमजोर किनारों के कारण यह टूट गई थी। सिंचाई विभाग को शिकायत की लेकिन समाधान नहीं हुआ। अस्थायी रूप से सिंचाई विभाग के कुछ कर्मचारियों के साथ किसानों ने अपने स्तर पर नहर का कटाव बंद किया, लेकिन रात को अधिक पानी के कारण वह फिर टूट गया। विभाग के जेई चंद्रकांत का कहना है कि माइनर में पानी सोनीपत से आता है। वहां पानी रोकने के लिए कहा गया है और माइनर की मरम्मत जल्द ही कर दी जाएगी।
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